अधिकारी ने कोटेशन के आधार पर फर्म का चयन कर दिया था
पूरे मामले की शिकायत पार्ट टाइम पर कंप्यूटर ऑपरेटर रहे प्रशांत शुक्ला ने तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार से की थी। इस पर जिलाधिकारी ने तत्कालीन वरिष्ठ कोषाधिकारी अतिरिक्त मजिस्ट्रेट से जांच कराई। इसमें सेवा प्रदाता फर्म के चयन की पूरी प्रक्रिया को ही गलत पाया गया। दरअसल फर्म का चयन निविदा प्रक्रिया के आधार पर होना था, लेकिन तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने कोटेशन के आधार पर फर्म का चयन कर दिया था।
मामला मंत्री तक पहुंचने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई
22 अक्तूबर 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने हर्ष मवार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था। तब से यह पत्रावली शासन में दबी थी। इसी बीच मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को हुई। असीम अरुण हरदोई के प्रभारी मंत्री भी हैं। मामला उन तक पहुंचने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई।
आगाज से अंजाम तक पहुंचाने में सफल रहा युवा, धमकी से डरा न प्रलोभन में आया
जनपद में तैनात रहे हर्ष मवार के कारनामों की पोल कछौना के तुलसी मार्केट निवासी प्रशांत शुक्ला ने सबसे पहले 15 मई 2020 को खोली थी। प्रशांत ने तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी की कारगुजारी का काला चिट्ठा तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कुमार के सामने रखा था। अविनाश कुमार ने पूरे मामले की जांच कराई तो शिकायत सही मिली। इस पर उन्होंने समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की संस्तुति कर दी थी। इसके बाद हर्ष मवार अपने रसूख और पहुंच के कारण पत्रावली दबाने में कामयाब रहे। इस बीच प्रशांत शुक्ला को किसी न किसी माध्यम से धमकी भी दी गई और प्रलोभन भी। प्रशांत न तो किसी के दबाव में आया और न ही प्रलोभन में। कुछ माह पहले उसने पूरे मामले की जानकारी समाज कल्याण मंत्री को दी थी। इसके बाद हर्ष मवार की बर्खास्तगी की गई।