मेरे पापा मेरे सबसे अच्छे दोस्त
मेरे पापाजी सुबह जल्दी उठते हैं। वह डॉक्टर और हमारे परिवार के मुखिया हैं। वह बहुत दयालु, मेहनती व ईमानदार हैं। वह हमेशा दूसरों की मदद करते हैं। मेरे पापा मेरे आदर्श हैं। वह मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। पिछले वर्ष जब मैं बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती हुई थी, तब मेरे पापा दिन-रात मेरा बहुत ध्यान रखते थे। मैं अपने पापा से बहुत प्यार करती हूं।
- अमार्या सिंह, पुत्री सत्येंद्र कुमार
जीवन की कठिनाइयों में ढाल बनाकर हमारा रास्ता किया आसान
प्रिय पापा,
आपके बारे में जितना भी कहूं, वह कम ही होगा। मैं आपको धन्यवाद कहना चाहती हूं, अपने जीवन की खुशियां और आराम त्यागकर मेरे सपनों को साकार करने का हरसंभव प्रयास किया। आपने जीवन की कठिनाइयों में ढाल बनाकर हमारे लिए रास्ता आसान किया। आप रोज सुबह जल्दी उठकर काम पर जाते हैं, ताकि मेरी पढ़ाई और जरूरतों की पूर्ति हो सके। आपने कभी यह नहीं जताया कि थक गए हैं, बल्कि हर पल मेरी खुशी और जरूरतों का ख्याल रखा। मेरी पढ़ाई के लिए आपने कई बार अपने शौक त्यागे, खर्चों में कटौती की, ताकि मुझे किसी चीज की कमी न हो। पापा, आपने मुझे जीवन के हर मोड़ पर प्रेरणा दी है, चाहे वह छोटी सी परीक्षा हो या जीवन का बड़ा निर्णय। आपके त्याग और स्नेह ने मुझे सिखाया कि सच्चा हीरो वही होता है जो बिना किसी शोर के, चुपचाप अपने परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करता है।
आपकी, रश्मि कुमारी पुत्री धनंजय
प्यारे पापा,
हर बच्चे के लिए उनके पिता आदर्श होते हैं। आपने मुझे कभी हार न मानने और हमेशा आगे बढ़ने की सीख दी है। आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। आप सिर्फ मेरे पिता ही नहीं बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी हैं, जो समय-समय पर अच्छी और बुरी बातें समझाते हैं। मुझे आपकी कुछ बातें बहुत अच्छी लगती हैं, जैसे कि आप मुझसे और परिवार के बाकी लोगों से बहुत प्रेम करते हैं। आप कभी भी किसी तरह की कमी नहीं होने देते और हमारी सारी जरूरतें पूरी करते हैं। आपसे मुझे अनुशासन में रहने की सीख मिलती है। आखिर में मैं आपसे यह कहना चाहूंगी की आप मेरे लिए दुनिया के सबसे अच्छे इंसान हैं और मैं बड़े होकर आपका नाम जरूर रौशन करूंगी।
आपकी लाडली बेटी, अपेक्षा
मेरे प्यारे-प्यारे पापा जी
नमस्ते, आपको फादर्स डे की ढेर सारी शुभकामनाएं। आज का दिन आपके प्यार, त्याग और संघर्ष को याद कराने का दिन है, जो अपने हमारी खुशियों के लिए किया। बचपन से लेकर आज तक मैंने आपको अपने सपनों को पीछे रखकर हमारे लिए मेहनत करते देखा है। आपके संघषों और बलिदानों के कारण ही आज मैं आत्मनिर्भर बन पाई हूं। आपने हर परिस्थिति में मुस्कुराना सिखाया, मुश्किलों से हार न मानना सिखाया और सबसे बड़ी बात सच्चाई और मेहनत से जीना सिखाया। मैं जानती हूं कि आपने कितनी चुनौतियों का सामना किया, कभी जाहिर नहीं किया, लेकिन आपकी आंखों में देखा है वो थकान, वो चिंता और फिर भी वो सुकून भरी मुस्कान हमारे लिए। पापा, आपके बिना मैं अधूरी हूं। आप मेरे पहले हीरो हो, मेरी ताकत हो, और मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा भी। आपके संघर्षों और प्यार के लिए दिल से धन्यवाद।
- आपकी बेटी, तनिष्का सिंह
आपके समर्थन, प्यार और मार्गदर्शन का रहूंगा आभारी
प्रिय पिताजी
मैं आपको यह पत्र इस खास दिन पर लिख रहा हूं, जिसमें मैं आपके प्रति अपने आभार को व्यक्त कर सकूं। आपके द्वारा दिए गए समर्थन, प्यार और मार्गदर्शन के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा। आप हमेशा मेरे लिए एक महान प्रेरणा रहे हैं। आपने मुझे जीवन के बारे में बहुत कुछ सिखाया है और आपकी सलाह ने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया है। आपकी अच्छाई और दयालुता ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। मैं आपको बहुत प्यार करता हूं। आपके प्रति आभार व्यक्त करने करने के लिए मेरे पास पर्याप्त शब्द नहीं है लेकिन में आपको यह बताना चाहता हूं कि आप मेरे जीवन में कितना मायने रखते हैं।
- आपका पुत्र चित्रांश राजपूत
आप जैसा पिता मिलना सच में किस्मत की बात
प्रिय पापा,
नमस्ते, सबसे पहले आपको फादर्स डे की ढेर सारी शुभकामनाएं। इस दिन बस एक बात बार-बार दिल में आती है, कि आप जैसा पिता मिलना सच में किस्मत की बात है। हम निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। मैं जानती हूं कि कितना कठिन था अपने परिवार को कानपुर में छोड़कर बड़े शहर दिल्ली जाना, सिर्फ हमारी जरूरतें और सपने पूरे करने के लिए। आपने कभी हमें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। न जाने कितनी छोटी-बड़ी मुश्किलें हमारी जिंदगी में आईं, न जाने कितनी बार मैं बीमार पड़ी और आपका बुरा-से-बुरा हादसा हुआ...फिर भी आपने कभी हार नहीं मानी। मैं जानती हूं आपका सपना था कि मैं और भैया सरकारी नौकरी करें, खासकर मैं आईएएस बनूं। हमारे सपने भले अलग हों फिर भी पापा, मुझ पर विश्वास रखिए, मैं कभी आपको निराश नहीं करूंगी। आपका प्यार और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
आपकी बेटी सौम्या
मुझे आत्मनिर्भर बनने, विश्वास जताने के लिए पापा धन्यवाद
जब मैं छोटी थी तो पापा अक्सर हफ्तों तक बाहर रहते थे। उस समय फोन भी नहीं हुआ करते थे। पापा कभी-कभी पीसीओ से फोन करते थे और बताते थे कि वो कब आएंगे। उस समय मेरी मां मुझे सात समंदर पार से, गुड़ियों के बाजार से, पापा जल्दी घर आ जाना... गाना सुनाती थीं। मेरे पापा के पास बहुत पैसे नहीं थे, लेकिन फिर भी वह कानपुर की सबसे अच्छी दुकान से कपड़े दिलाते थे, भले खुद पुराने कपड़े पहनते थे। सबसे अच्छा तब लगता है...जब कोई कहता है कि तुम्हारे पापा बहुत अच्छे इंसान हैं। पापा, अगर मैं आज लिखना चाहूं कि तुमने मेरे लिए क्या किया...तो जगह कम पड़ जाएगी। मम्मी और मुझे आत्मनिर्भर बनने और मुझ पर विश्वास करने के लिए आपका धन्यवाद।
आपकी बेटी, आर्ची वर्मा
पापा आप मेरी सबसे बड़ी ताकत
प्रिय पापा,
नमस्ते, मैं तो अभी छोटी हूं, मम्मा ने यह पत्र लिखने में मेरी मदद की, क्योंकि मैं आपको धन्यवाद कहना चाहती हूं। आप मेरे लिए जो कुछ भी करते हैं, वह मेरे लिए बहुत खास है। आप काम से थककर आते हैं फिर भी मेरे साथ खेलते हैं, मेरी कहानियां सुनते हैं और मुझे गोद में उठाकर घुमाते हैं यह मुझे बहुत अच्छा लगता है। आप मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। जब आप मुझे स्कूल छोड़ने आते हैं और मुस्कुरा कर गुड लक कहते हैं, मेरा सारा डर भाग जाता है। जब आप मुझे सुलाते हैं और माथे पर प्यार से चूमते हैं, तो मुझे लगता है कि मैं सबसे सुरक्षित हूं। पापा, आप हमेशा मेरे हीरो रहेंगे। आपने मुझे सिखाया कि प्यार क्या होता है बिना किसी शर्त के। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। हमेशा मेरे साथ रहिए, मुझे थामिए, और ऐसे ही प्यार करते रहिए।
आपकी प्यारी बेटी, रिद्धि गुप्ता
डॉ. आरती त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
जिनकी मैं लिखावट हूं, उन पिता के लिए क्या लिखूं
जिनकी लिखावट हूं मैं, उन पिता के लिए क्या लिखूं? बस यही कह सकती हूं कि उनकी जगह इस दुनिया में कोई नहीं ले सकता। मेरे पापा भारतीय वायुसेना में अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुए हैं और यही वजह है कि वे सदैव समय के पाबंद और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहे हैं। अपनी हर छोटी-बड़ी उपलब्धि में मैंने अपने पापा को अपने साथ पाया है। आज भी जब कभी किसी साहित्यिक संगोष्ठी में वक्तव्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है तो अपने पापा को अपने साथ उपस्थित पाया है। मुझे आज भी याद है जनवरी 2000 में हमारे आवास गुरुसर सुधार, लुधियाना में इंटेलीजेंस ब्यूरो की ओर से मेरे नाम का फरमान आया था। घर वाले यह सोचकर घबरा रहे थे कि गृह मंत्रालय के अधीन सुरक्षा एजेंसी तो प्रायः अपराधियों की तलाश में आती है पर मेरे पापा को मुझ पर पूरा विश्वास था। वे बिना डरे उनसे आईबी अफसरों से मिले और उनका वह आत्मविश्वास तब गर्व में बदल गया जब उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी का चयन देश के उन 100 छात्रों में हुआ है, जिन्हें गणतंत्र दिवस की परेड प्रधानमंत्री बॉक्स से देखने का अवसर मिलेगा। ईश्वर से बस यही कामना है कि मेरे पापा का प्यार रूपी अनमोल तोहफा मुझे और मेरे भैया को जीवन भर मिलता रहे।
डॉ. आरती त्रिपाठी, शिक्षिका, डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर श्यामनगर
मेरी खुशी के लिए आपको अपना हर दर्द छुपाते देखा
प्रिय पापा,आपको फादर्स डे की ढेर सारी शुभकामनाएं। बहुत कुछ कहना चाहती हूं, पर कई बार भावनाएं शब्दों से भी बड़ी हो जाती हैं। इसलिए आपको बताने के लिए यह पत्र लिख रही हूं, कि मैं आपसे कितना प्यार करती हूं। आप हमेशा मेरी ताकत, मेरा सहारा और मेरा मार्गदर्शक हैं। मैंने आपको चुपचाप अपने दर्द को छुपाते हुए, हर कठिनाई का सामना करते देखा है, सिर्फ मेरी खुशी के लिए। आपने न सिर्फ मुझे सपने देखना सिखाया, बल्कि उन्हें ईमानदारी से पूरा करने के लिए मेहनत करना भी सिखाया। पापा, आप मेरे सबसे बड़े हीरो हैं। मैं आपके हाथ को हमेशा अपने हाथ में थामे रहूंगी। ढेर सारा प्यार...
आपकी बेटी, हर्षाली भदौरिया, पिता - राघवेंद्र सिंह भदौरिया
सब कुछ सह जाते हैं पापा
मेरे प्यारे-प्यारे पापा,
मेरे दिल में रहते पापा,
मेरी छोटी सी खुशी के लिए
सब कुछ सह जाते हैं पापा,
पूरी करते मेरी इच्छा
उनके जैसा नहीं कोई अच्छा
मम्मी मेरी जब भी डांटे,
मुझे दुलारते मेरे पापा,
मेरे पापा मेरे हीरो हैं,
मेरे प्यारे प्यारे पापा ।
- हर्षित झा
आपका मार्गदर्शन, समर्थन और प्यार मेरे लिए अमूल्य
पूज्य पिताजी, चरण स्पर्श
आपको पितृ दिवस की शुभकामनाएं। आपकी ओर से मेरे लिए किए गए हर काम के लिए मैं अपना आभार व्यक्त करने के लिए कुछ समय चाहता हूं। आपका मार्गदर्शन, समर्थन और प्यार मेरे लिए अमूल्य हैं। मैं कई मायनों में आपकी तरह बनना चाहता हूं। आपकी दयालुता, धैर्य और समझ ने मुझे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की सीख दी। ऐसे अविश्वसनीय पिता होने के लिए, हमेशा मेरे साथ मौजूद रहने के लिए और मुझे प्यार और सराहना महसूस कराने के लिए आपका धन्यवाद। मैं आपसे शब्दों से परे प्यार करता हूं।
प्रेम और कृतज्ञता सहित आपका आज्ञाकारी पुत्र
- त्रियांश द्विवेदी पुत्र सुजीत द्विवेदी
आदरणीय पिताजी, सादर प्रणाम
इस पत्र से मैं आपके संघर्षों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहती हूं। मैं आपको धन्यवाद कहना चाहती हूं मेरे जीवन की सभी खुशियों के लिए। मैं आपकी आभारी हूं कि आपने मुझे जीवन में अनुशासन और परिश्रम का महत्व बताया। मेरा प्रोत्साहन बढ़ाकर आपने मेरे ढलते हुए उत्साह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आपने मेरी फरमाइशों को पूरा करने के लिए अपनी जरूरतों को पीछे छोड़ दिया। कभी-कभी सोचती हूं कि कैसे इतनी सारी जिम्मेदारियों का भार उठाने के बाद भी आप अपने जज्बातों को दबा कर रख लेते हैं। मैं यह तो नहीं जानती कैसे, पर इसका कारण जरूर समझती हूं। आप पूरी चिंता खुद रखकर हमें निश्चित देखना चाहते हैं। अगर मैं आपके त्याग और संघर्षों के बारे में बताने लगी तो मेरे शब्द कम पड़ जाएंगे। आपका धन्यवाद मुझ पर विश्वास करने के लिए। आप मेरे रोल मॉडल हैं पापा और वादा करती हूं कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब आपको मुझ पर गर्व होगा।
आपकी पुत्री, यशिका सिंह
अर्ची वर्मा अपने पिता के साथ
- फोटो : अमर उजाला
जब मैं छोटी थी तो मेरे पापा अक्सर हफ्तों तक बाहर रहते थे, उस टाइम पर फोन भी नहीं हुआ करते थे तो पापा कभी कभी पीसीओ से कॉल करते थे और बताते थे कि वह कब आएंगे। मैं रोज उनके इंतजार में मुझे सात समंदर पार से... गुड़ियों के बाजार से...पापा जल्दी घर आ जाना गाना सुनती थी। जिस दिन का पापा आने को बोलते थे, उस दिन मैं घर के बाहर उनका इंतजार करती थी और जब वह घर आ जाते थे, मैं मम्मी की शिकायत करना शुरू कर देती थी।
मेरे पापा के पास बहुत पैसे नहीं थे लेकिन फिर भी वह कानपुर की सबसे अच्छी दुकान पर कपड़े दिलवाने लेकर जाते थे। खुद पुराने कपड़े पहनते थे पर मुझे साल में कई बार नए कपड़े दिलवाते थे। मेरे पापा ने मेरे लिए बहुत कुछ किया है लेकिन सबसे अच्छा तब लगता है जब कोई कहता है कि तुम्हारे पापा बहुत अच्छे इंसान हैं।
पापा, अगर मैं आज लिखना चाहूं कि आपने मेरे लिए क्या किया तो शब्द कम पड़ जाएंगे। पापा..धूप, बरसात, ठंड में दिन भर काम करके मुझे आत्मनिर्भर बनने के लिए और मुझ पर बहुत विश्वास करने के लिए धन्यवाद।. आप हमसे खुश रहो... स्वस्थ रहो, यही मेरी प्रार्थना है ईश्वर से।
- अर्ची वर्मा
सुधीर कुमार गहलोत पिता जसमेर गहलोत के साथ
- फोटो : अमर उजाला
पिता छत हैं, जब साथ होते हैं तो विश्वास रहता है
पापा हर फर्ज निभाते हैं, जिंदगी भर कर्ज चुकाते हैं... यह वाक्य मेरे पिताजी की जिंदगी के फलसफे की कहानी बयां करता है। ताउम्र आर्थिक रूप से संघर्षशील रहने के बावजूद हमारे जीवन में कभी कोई अभाव नहीं आने दिया, यह केवल एक पिता का दिल ही कर सकता है।
मेरी सफलता के पीछे पिताजी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आज भी याद है किस तरह मेरे जीवन की हर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में साथ खड़े रहे और असफल होने पर मेरा हौसला बढ़ाया, यह निश्चल प्रेम व अपनत्व है। पिता छत की तरह हैं, जब वह साथ होते हैं तो एक विश्वास रहता है कि सब सही है। बेशक कहकर जता नहीं पाते हों पर प्यार बहुत करते हैं।
पिताजी पुलिस में थे। इसलिए दिन-रात ड्यूटी पर ही रहे। जनवरी की ठंड में रात को उन्हें स्कूटर से नाइट ड्यूटी पर जाते हुए देखता था तो हमेशा मन में आता था कि एक दिन इन्हें आराम और सुकून की जिंदगी देनी है। शायद उसमें सफल हुआ। परिवार के लिए समर्पित एक आदर्श पिता, बेटे व पति के रूप में उन्होंने मुझे बेहतर इंसान बनाया है। मैं उनकी बेहतर जिंदगी, स्वास्थ्य की ईश्वर से कामना करता हूं। उनका आशीर्वाद इसी तरह हम पर बना रहे।
यह फोटो उस दिन का है, जब यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पुलिस कमिश्नर दिल्ली ने मेरे अभिभावकों के साथ मुझे सम्मानित किया था। पिताजी की आंखों में अपने विभाग के सर्वोच्च पद पर आसीन बॉस से सम्मान पाने का गर्व देखकर लगा कि मेहनत सफल हुई।
- सुधीर कुमार, आईएएस, नगर आयुक्त पिता जसमेर गहलोत
श्वेता सुहाग अपने पिता राकेश सुहाग के साथ
- फोटो : अमर उजाला
आपने सिर्फ जीवन नहीं दिया बल्कि जीना भी सिखाया
डियर पापा,
आज जब जिंदगी की भागदौड़ एक पल के लिए रुकी तो दिल ने कुछ याद दिलाया... वह मजबूत हाथ जो हर मुश्किल में मेरा सहारा बना, आपकी मुस्कान जो मेरे डर को मिटा देती थी। आज बस यूं ही बैठे-बैठे एक ख्याल आया कि मैंने ठीक से कभी आपको ‘थैंक्स’ भी नहीं कहा। आज आप हमारे बीच नहीं हो, लेकिन मैं आपको हमेशा अपने साथ पाती हूं। कभी अपनी बचपन की कहानियों में तो कभी अपने अस्तित्व के उन अक्सों में जो दादी कहती हैं कि आपसे मिलते हैं।
आपने मुझे सिर्फ जीवन नहीं दिया, बल्कि जीना भी सिखाया। मुझे याद है कि कैसे मैंने सीखने के पहले ही दिन साइकिल को दौड़ा दिया था क्योंकि पता था कि आप मेरे पीछे हो और मुझे गिरने नहीं दोगे। पहले कदम से पहली उड़ान तक मेरा सहारा बने आप। समाज के तंग दायरों में आपने मुझे कभी नहीं सिमटने दिया। आपकी मेहनत, चुपचाप दी गईं कुर्बानियां और वह प्यार जो कभी खुल के जाहिर नहीं किया गया पर हर वक्त महसूस हुआ, सब मेरे लिए अनमोल है।
पापा, अगर जीवन में मैं कुछ भी बेहतर हासिल कर पाई हूं, वह आपके बिना संभव नहीं हो पाता। बस यही कहना है आपसे - शायद पहले कह देना चाहिए था - थैंक यू फॉर एवरीथिंग!
आपकी बेटी
श्वेता सुहाग, हरियाणा सिविल सर्विसेस (पीसीएस), एमडी शुगर मिल्स रोहतक, हरियाणा पिता राकेश सुहाग
मुस्कान और उसके पिता अजीत अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
डियर पापा जी
बचपन से लेकर आज मेरे विवाह तक पापा जी ने मेरी हर जरूरत, हर सपने को पूरा किया। चाहे मेरी ड्रेस, खिलौने और बड़े कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई हो, कभी रोका टोका नहीं। सबसे अच्छा तो जब लगा कि मेरे विवाह में मेरे साथ साथ 11 अनाथ बेटियों का प्रस्ताव रखा तो हमको बहुत बहुत खुशी हुई। पापा जी पिछले आठ साल से गरीब बेटियों का विवाह कर रहे हैं लेकिन हमारे विवाह में 11 और बेटियों के विवाह की बात सिर फक्र से ऊंचा हो गया। भगवान बदरी विशाल जी प्रार्थना है कि मेरे पापा जी जैसे पापा सबको मिलें। पापाजी हमको आप पर गर्व है, आप सालों साल तक बेटियों का विवाह करते रहें।
मुस्कान अग्रवाल पुत्री अजीत अग्रवाल
शिल्पी यादव अपने स्वर्गीय पिता जगदीश यादव के साथ
- फोटो : अमर उजाला
आपके साथ स्कूटर पर चलना आकाश में उड़ने जैसा था
पापा
आप जहां भी हैं, मुझे पता है आप आज भी मेरी फिक्र करते हैं। तभी तो आपके जाने के चार वर्ष बाद भी ऐसा लगता है कि आप हर पल मार्गदर्शक बने हैं। यह आपकी परवरिश का नतीजा है कि मैं जीवन के हर पथ पर निरंतर सफलता के आयाम गढ़ रही हूं। आज जो भी हूं, आपकी वजह से ही हूं। यह मेरा सौभाग्य है कि मेरे पिता ही मेरे अंग्रेजी शिक्षक थे और आपने जो साहस, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाया, वह आज की इस जटिल दुनिया में मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आज चाहे कार का सफर कर लूं या हवाई जहाज का लेकिन आपके स्कूटर पर आगे खड़े होकर चलती थी तो लगता था कि मैं दुनिया के सबसे सुरक्षित विमान से सैर पर हूं और आकाश में उड़ रही हूं। आज बड़े-बड़े मॉल से खरीदारी करने में वह मजा नहीं मिलता जो आपके के साथ पीरोड या नवाबगंज की किसी छोटी सी साधारण दुकान से कपड़े खरीदने में मिलता था। मैं अगले कई दिनों तक उन फ्राॅक्स को पहनती थी, उन पर इतराती थी। कक्षा छह में प्रथम स्थान आने पर आपने मुझे जो घड़ी दिलाई थी, वह आज भी मुझे मेरा सबसे सुंदर समय याद दिलाती है। आज भी जब आपकी याद आती तो लगता है कि आपके गले लग जाऊं। मैं इंटर कॉलेज की लेक्चरर आपकी वजह से बन सकी। लव यू पापा।
- शिल्पी यादव, नवाबगंज
अरमान गुप्ता अपने पिता आशीष गुप्ता के साथ
- फोटो : अमर उजाला
मुझे लिखने का शौक, पापा लाते हैं किताबें
मेरे प्यारे पापा, मै अपनी इस कलम की स्याही से आपको प्रेम भरा पत्र लिख रहा हूं। आपके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए यह कागज काफी नहीं है पर फिर भी इसको मेरे प्रेम की अभिव्यक्ति माने। जब से मैं इस धरती पर जन्मा, आपने मुझे दुलार किया। मुझे अपने खूब प्यार दिया। मैंने आपके कंधों पर बैठकर दुनिया का दर्शन किया। मां ने मुझे बड़ा किया पर पापा आपने मुझे मजबूत बनाया। मेरे लेखन की कला को निखारने में आपका सबसे बड़ा योगदान है। हर क्विज में अव्वल इसी लिए आता हूं कि आप मेरे लिए एक से एक अच्छी किताबें लाते हैं। जिनको पढ़कर मैं खुद को बेहतर बनाता हूं, नए-नए शब्दों को सीखता हूं। मेरे मानसिक और बौद्धिक विकास में आपने महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भले ही पिता दिवस हो पर मेरे लिए हर दिन पिता दिवस है क्योंकि आपका स्नेह अतुलनीय व अनमोल हैं। - आपका बेटा अरमान गुप्ता, निवासी डिवनिटी होम्स, इंद्रानगर
अपने पिता अंकुर खन्ना के साथ गौरी खन्ना
- फोटो : अमर उजाला
तू बस एक बार कोशिश कर, मैं हमेशा तेरे साथ हूं
पिता... एक ऐसा शब्द जो सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन की दिशा तय करता है। मेरे जीवन में मेरे पापा का स्थान केवल एक संरक्षक या कमाने वाले व्यक्ति का नहीं है। बल्कि वे मेरी प्रेरणा, मेरी ताकत और मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। सबसे बड़ा बदलाव जो मेरे पापा ने मेरे जीवन में लाया, वह है आत्मविश्वास। जब मैं छोटी थी और पहली बार स्टेज पर गई थी, तो डर के मारे कांप रही थी। उस समय पापा ने कहा, “तू बस एक बार कोशिश कर, मैं हमेशा तेरे साथ हूं।” वही वाक्य आज भी हर मुश्किल समय में मेरा हौसला बन जाता है। उन्हीं की प्रेरणा से सीए बनने की तैयारी कर रही हूं। एमकॉम की परीक्षा भी दे रही हूं। उन्होंने मुझे सिखाया कि एक लड़की सिर्फ घर तक सीमित नहीं होती। वह खुद भले ही कभी ज़्यादा नहीं बोले, पर उनके काम बोलते हैं।
- बेटी गौरी खन्ना, निवासी क्लू ब्लाक गोविंद नगर
पिता के साथ पल्लवी कौर
- फोटो : अमर उजाला
मां बचपन में छोड़ गईं, पापा आप हमारे लिए मजबूत दीवार बने
आदरणीय पापा,
शायद आदरणीय शब्द भी आपके लिए बहुत छोटा है, क्योंकि आपने जो मेरे लिए किया है, उसे कोई शब्द पूरी तरह व्यक्त नहीं कर सकता। जब मां हमें बचपन में ही छोड़ गईं, तब आपने खुद को तोड़कर हमारे लिए एक मजबूत दीवार बनना चुना। आपने मां की गोद का सुकून और पिता की ढाल, दोनों बनकर मुझे हर तूफान से बचाया। आपने मुझे अपनी बांहों में भरकर बोतल से दूध पिलाया, मुझे बड़ा किया, हर मोड़ पर मेरा साथ दिया, कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होने दिया।
जब भी जिंदगी में डर लगा या रास्ते धुंधले हुए, आपने मेरा हाथ थाम कर मुझे हिम्मत दी। आपने हर उस चुनौती को स्वीकार किया जो समाज ने एक अकेले पिता के रूप में आपके सामने रखी। आपने हमें कभी ‘बस एक लड़की’ की सीमाओं में नहीं बांधा। आज आपकी वही दो बेटियां सॉफ्टवेयर इंजीनियर और सीनियर फाइनेंस एग्जीक्यूटिव बनीं। आप हमारे पहले हीरो थे, हैं और हमेशा रहेंगे। आपका प्यार, त्याग और हौसला हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। हम धन्य हैं कि हमें आपके जैसा पिता मिला। बस यही कहना चाहूंगी कि कभी असली भगवान के दर्शन नहीं कर पाई हूं पर ये पता है कि के इकदम आप जैसे होंगे।
पल्लवी कौर जौहर
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ,टीसीएस, एफ ब्लॉक पनकी
पिता के साथ रजत धवन
- फोटो : अमर उजाला
आपने अपनी किडनी देकर मेरे जीवन में किया उजाला
प्रिय पिताजी,
पिता वह वट वृक्ष है जिसने मुझ जैसे मुरझाए पौधे को नवजीवन देते हैं। मुझे पता है कि मैं अक्सर अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, लेकिन आज मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि आप मेरे लिए कितने मायने रखते हैं। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे आपके द्वारा दिए गए अनगिनत बलिदान और बिना शर्त प्यार याद आता है। मुझे याद है कैसे आपने मुझे चलना सिखाया, कैसे हर बार गिरने पर मुझे उठाया और कैसे मेरी हर छोटी जीत पर सबसे ज्यादा खुश हुए।
आज भी जब मैं किसी मुश्किल में होता हूं तो सबसे पहले आपका ही चेहरा सामने आता है। मेरे जीवन में जब वह क्षण आया जब मेरी किडनी खराब होने के कारण मुझे जीवन अंधकारमय लगने लगा। मेरा क्रिएटिनन 586 हो गया। हफ्ते में दो दिन डायलिसिस होने लगी, तब आप मेरे जीवन में उजाला लेकर आए। आपने अपनी किडनी मुझे प्रत्यारोपित होने के लिए दी। मैं नहीं जानता कि मैं आपके प्यार और त्याग का कर्ज कभी चुका पाऊंगा या नहीं, लेकिन मैं आपको यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपको कभी निराश नहीं करूंगा।
आपका प्यारा बेटा
रजत धवन
डॉ. राज तिलक अपने पिता के साथ
- फोटो : अमर उजाला
मेरा वजूद आपकी विरासत है भइया
भइया (पिता श्री तिलक को इसी संबोधन से बुलाते रहे) आप आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सच बताऊं कि पता ही न चला मैं कब जैसे आप में तब्दील हो गया। मेरा शरीर, मेरा सोच, मेरे सपने, मेरा वजूद सब आप की विरासत हैं। आपने ही तो सिखाया था कि अपने आसपास होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील रहना। बहुआयामी बौद्धिक विमर्श, विश्लेषण और विचार मंथन के बाद राय कायम करना।
आपने ही तो दी थी अपनी बात रखने और सोच को अभिव्यक्ति देने की आजादी। आपको देखकर ही तो मैंने सीखा कि विरोधी विचारों का समुचित सम्मान करते हुए उन्हें भी समग्र सच का अनिर्वचनीय हिस्सा समझना। आचरण में पर्याप्त पारदर्शिता बरतना और अपने किए की जिम्मेदारी लेना आपने ही सिखाया। आपने मुझे हौसला दिया और उड़ने के लिए पंख भी। आपकी धुरी के चारों तरफ मेरी परिधि विकसित हुई। जैसे बड़ा तानपुरा बजने पर छोटे तानपुरे के तार स्वयं झंकृत हो जाते हैं, वैसे ही मेरी सोच में फलित आदर्शवादिता, सामाजिक चेतना और उसूलों के लिए जुझारूपन भी आपका ही अक्स है।
आज पितृ दिवस पर आप का कृतित्व, व्यक्तित्व और पितृत्व का स्मरण करते हुए यह स्वीकार करता हूं कि आप का योगदान मैं तब तक समझ नहीं पाया, जब तक मैं स्वयं पिता नहीं बन गया। मैं उस सफर-ए-हयात का अगला पड़ाव हूं जो… आप से पहले शुरू हुआ और मेरे बाद तक… रहती दुनिया तक बना रहेगा। हर नई मंजिल, पिता से मिले गुणसूत्रों में मौजूद जीन्स में अपनी बुनियाद के लिए अपने से पहले वाली पीढ़ियों की आभारी रहेगी।
आपका बेटा
अन्नू (डॉ. राज तिलक)
नृपेंद्र कुमार मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
सुखों का त्याग कर पिताजी ने हमें पहुंचाया मुकाम पर
मेरे पिता दिवंगत उमाशंकर मिश्र हमेशा से मेरे आदर्श रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन हमेशा सच्चाई और ईमानदारी के साथ कार्य किया। अपने परिवार में हमेशा संघर्ष करते हुए हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। हमारी मां अक्सर बीमार रहती थीं, पिताजी बताते थे कि हमारे बचपन में बीमार मां की देखभाल भी करते थे और हम सभी भाई बहनों का पालन-पोषण करते हुए अपनी नौकरी भी करते थे।
हमारा जन्म तो गांव में हुआ लेकिन पिताजी बचपन में ही हम लोगों को पढ़ाने के लिए शहर लेकर आए और किराये का मकान लेकर हम लोगों का एडमिशन एक अच्छे विद्यालय में कराया। पिताजी एक बात हमेशा कहते थे कि जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए, यही जीवन का असल उद्देश्य होना चाहिए। पिताजी ने हम सभी भाई बहनों को पढ़ाने के लिए अपने सुखों का त्याग किया। उनका यह त्याग हमेशा मुझे याद आता है और आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। मैं अपनी बेटी को भी अपने पिता के संघर्षों और त्याग के विषय में हमेशा बताता हूं और कहता हूं कि बेटा जिस प्रकार हमारे पिता त्याग कर हमको गांव से छोटे शहर लेकर आए और मैं तुमको छोटे शहर से लेकर बड़े शहर कानपुर लेकर जा रहा हूं। असल में यही असली विकास है और तुम जीवन में आगे बढ़ना और अपने बाबा का नाम रोशन करना।
- नृपेंद्र कुमार मिश्रा
अपने पिता के साथ एजाज़ (नजफ़)
- फोटो : amar ujala
प्रिय पापा,
आपने हमेशा बिना कहे सब कुछ किया — अपने सपनों को मेरे लिए रोक दिया, ताकि मैं अपने सपनों को खुलकर जी सकूं। जब भी ज़िंदगी में किसी मोड़ पर अंधेरा हुआ, आपकी छाया ने मुझे रास्ता दिखाया। आपके संघर्ष और त्याग की कोई गिनती नहीं। आज जब आप लंबे समय से बीमार हैं, तब भी आप एक चट्टान की तरह मजबूत बने हुए हैं। दर्द को मुस्कान से ढककर, हमें हिम्मत देते हैं। आपकी ये सहनशक्ति मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। पिता का प्यार अक्सर शब्दों से परे होता है, मगर आज मैं आपको बताना चाहता हूं। आपकी हर सीख, हर त्याग, हर चुप्पी में बसी ममता मेरे जीवन का सबसे बड़ा उपहार है। आप मेरे पहले हीरो हैं, और हमेशा रहेंगे। इस फादर्स डे पर, मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं। शुक्रिया पापा, मुझे जीवन देना ही नहीं, जीना सिखाने के लिए और आज भी हिम्मत देना नहीं छोड़ने के लिए।
आपका बेटा
एजाज़ (नजफ़)
अपने पापा के साथ पीहू
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प्यारे पापा,
वैसे तो मेरे लिए हर दिन फादर्स डे है, क्योंकि आप हमेशा मेरे साथ हैं और मुझे प्यार देते हैं। लेकिन आज, मैं अपनी भावनाएं आपके साथ बांटना चाहती हूं। पापा, आप मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। आपकी मौजूदगी मुझे सुरक्षा और प्यार का एहसास कराती है। मैं बड़ी होकर आपकी तरह बनना चाहती हूं, आपकी परछाई बनना चाहती हूं। आप जैसे सबका साथ देते हैं, सबका भला सोचते हैं और दूसरों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। आपकी यह खूबियां मुझे बहुत प्रेरित करती हैं। आपके साथ रहने से मुझे लगता है कि मैं कुछ भी कर सकती हूं, मैं आपके साथ पूरी दुनिया को जीतने का हौसला रखती हूं। पापा, आप मेरी हिम्मत हो, मेरी ताकत हो, आपके बिना मैं कुछ भी नहीं हूं। मैं आपको धन्यवाद देना चाहती हूं कि आपने मुझे इतना प्यार दिया इतना समर्थन दिया। मैं आपकी तरह बनकर दिखाऊंगी, आपका नाम रोशन करूंगी और आपका साथ हमेशा दूंगी।
Love you papa :)
आपकी प्यारी पीहू...
अपने पिता के साथ कनक
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Dear papa...
आप से कभी ये कहा नहीं पर आज कुछ कहना चाहती हूं...कभी धूप तो कभी छांव बन जाते हैं आप।
मेरे लिए दिन में चांद बन जाते हैं आप। अपने शुभ आशीष से सदा मेरे हौसलों को नई उड़ान दे देते हो आप।
बड़ी ही सहजता से जीवन के संदेशो को सिखा देते हो आप।
समुंदर के बीच में फंसी मेरी कश्ती को आसनी से बाहर निकाल लाते हो आप ।
सच कहूं तो मेरी जिंदगी की असली मझधार हो आप।
टीकी है मेरी नाव इस बेरहम दुनिया के बीच , क्यूंकि मेरी नाव की पतवार संभालने वाले हो आप।
चंचल सी में छोटी सी,संध्या आप के घर आने पर दौड़ी चली आती थी मेरे पापा- पापा कहने से आप की सारी थकान मिट जाती थी।
सोचती हूं एक दिन जब बड़ी हो जाऊंगी,
शादी लग्न की घड़ी आएगी,
कैसे आपसे विदाई लूंगी,
कैसे खुद को संभालूंगी,
सहम जाती हूं ये सोचकर आखिर क्यों ऐसी रीत जग ने बनाई, आखिर क्यों हर बेटी अपने पिता से दूर एक पराए घर को जाई।
सच कहूं तो मेरे लिए दुनिया के सबसे नायाब उपहार हो आप।
यह जिंदगानी भी आपके द्वारा दी गई है और सदा आपके चरणों में समर्पित रहे गी पापा..
kanak
डॉ. सबा यूनुस और उनके पिता
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सब कहते है, मैं पापा जैसी हूँ! पर पापा से हमेशा एक डर सा लगता था खुल के बात करना ना_मुमकिन था..तो कुछ भी कहना हो मम्मी के ज़रिये बाद पहुंंचाई जाती थी। पापा कभी प्यार जताते नहीं थे…लेकिन फ़िक्र उन्हें हमेशा रहती थी। बस एक मर्तबा की याद मेरे ज़हन में हमेशा ताज़ा रहती है जब पहली बार पापा को प्यार जताते देखा था। मैं तक़रीबन 19 साल की थी अचानक तबियत बहुत ख़राब हो गई, तो पापा कॉलेज लेने आए और वही से हॉस्पिटल ले गए। उस वक़्त तो होश नहीं था, तो सुबह जब उठी तब पापा पास बैठे थे और अपने हाथ से दलिया खिला रहे थे। मम्मी भी वहाँ मौजूद थी पर पापा के हाथ से पहली बार कुछ खाया था, तबियत बिलकुल सही हो गई थी! उस दिन मुझे यह अहसास हुआ के पापा लोग सख़्त बनते है होते नहीं! मेरे पापा भी ऐसे ही हैं.. उनसे डर आज भी लगता है… लेकिन अब उनके कंधे पे हाथ रख के साथ में कभी हस भी लेती हूँ और सेल्फ़ी भी कभी कभी ले ही लेती हूँ! पापा ने ही सख़्त बन के मुझे मज़बूत बनाया है! पापा सख़्त ना होते तो शायद मैं कामयाब भी ना होती! पापा आपको अच्छी सेहत और लंबी उम्र मिले ये मेरी हमेशा दुआ है!
डॉ. सबा यूनुस
(अंतरराष्ट्रीय समाजशास्त्री)
सक्षम सिंह और उनके पिता
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प्रिय पिताजी,
मैं सबसे पहले आपका धन्यवाद कहना चाहता हूँ। आपने अपना पूरा जीवन हमारी ख़ुशी के लिए जिया है। आप अपनी चाह और रूचि को भुलाकर दूसरों की इच्छाओं को पूरी की है। आप बिना रुके, बेजोड़ मेहनत करते हैं और अपना पूरा ध्यान अपने काम पर लगाते हैं। आप हमें हमेशा एक अच्छा और ख़ुशहाल जीवन देने की कोशिश करते हैं। चाहे कोई अवसर अच्छा न हो, आपकी मौजूदगी से आप महान हैं। मैं कभी-कभी अपने दोस्तों के पापा से आपकी तुलना करता हूँ। मुझे यह कहने में बिल्कुल संकोच नहीं कि मेरे पापा ही दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं। आपने हमेशा मुझे सही दिशा दी। आपके निर्णय हमेशा सही रहे। आपने मुझे सिखाया कि अच्छाई और सच्चाई से दूर मत हटना। आप जानते हैं कि मेरे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। आज इस अवसर पर मैं आपको कहना चाहता हूँ कि आप मेरे लिए पूरी दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं और आपको पिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपका प्रिय पुत्र,
सक्षम सिंह
कक्षा 9
अपने पिता के साथ आदित्य नारायण मिश्रा
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मेरे पिताजी का नाम श्री अखिलेश मिश्रा है। वह एक वरिष्ठ नागरिक है। मेरे पिताजी पढ़े लिखे व्यक्ति हैं। वह बहुत अच्छे एवं सबकी मदद करने वाले हैं। वे पढ़ाई में मेरी सहायता भी करते हैं। यदि मुझे थोड़ा सा भी कष्ट होता है, तो उसे दूर करने का वे हर संभव प्रयास करते हैं। वे सभी को सम्मान देते हैं और सभी लोग उनका भी सम्मान करते हैं। वे मेरे साथ समय-समय पर खेलते भी हैं। उन्हें खीर बहुत पसंद है, वे मुझे बहुत प्यार करते हैं और मैं भी उन्हें बहुत प्यार करता हूं। मैं उनकी सारी बात मानता हूं। मेरे पिताजी मुझे अच्छा नागरिक बनना चाहते हैं।
आदित्य नारायण मिश्रा, कक्षा 4
I-44, केशव पुरम, कल्याणपुर, कानपुर
सुमित और उनके पिता
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प्यारे पापा,
मैं नहीं जानता कि ये पत्र आपको कहाँ मिलेगा — शायद आसमान के किसी कोने में, किसी तारे की रौशनी में या मेरी हर साँस में जो आपकी याद से भरी होती है। लेकिन आज दिल की गहराइयों से कुछ कहने का मन कर रहा है… और वह सबकुछ बस आपसे कहने का। पापा, आप जब साथ थे, तब शायद मैं अपनी भावनाओं को ठीक से जाहिर नहीं कर पाया। आपने हमेशा मेरी हर जरूरत पूरी की, हर दर्द को खुद सहकर मुझे मुस्कुराना सिखाया। आप मेरे पहले हीरो थे, हैं… और हमेशा रहेंगे। अब जब आप इस दुनिया में नहीं हैं, तो हर दिन आपकी कमी मुझे तोड़कर रख देती है। आपकी आवाज़, आपके हाथों का स्पर्श, आपका डाँटना भी… सब याद आता है। अब समझ आता है कि आपकी डाँट में भी प्यार था, आपकी खामोशी में भी फिक्र थी। मैं आपको बहुत मिस करता हूँ, पापा। जब कभी मुश्किलों से घिर जाता हूँ, तो बस आपकी आँखें याद आती हैं — जो बिना कहे सब समझ जाती थीं। जब कभी कुछ अच्छा होता है, तो दिल चाहता है कि भागकर आपको बताऊँ, लेकिन फिर याद आता है कि आप वहाँ नहीं हो… कम से कम इस दुनिया में तो नहीं। काश! एक बार और आपसे मिल पाता, आपके गले लग पाता, और कह पाता “पापा, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। आज भी आपकी यादों से ही जीता हूँ।” आपने मुझे जो संस्कार दिए, जो हिम्मत दी, वही मेरे रास्ते का उजाला बन गए हैं। आप भले ही नजरों से दूर हो गए, पर दिल से कभी नहीं गए।
आपका बेटा,
सुमित
चैतन्या सिंह और उनके पिता
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प्रिय पापा,
सादर प्रणाम एवं आपको पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
मैं आपके उज्जवल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना ईश्वर से सदैव करती हूँ । आप मात्र एक सफल व्यक्ति ही नहीं अपितु एक सर्वश्रेष्ठ पिता भी हैं। आप एक ऐसे पिता हैं जो अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास में सदैव तत्पर रहते हैं। आज भी वो दिन मुझे अच्छे से याद है जब मैं एक गुड़िया के लिए बाजार में आपसे जिद्द करने लगी जबकि पहले से ही मेरे खिलौने की अलमारी पूरी तरह से ठसाठस भरी थी, माँ के मना करने के बाद भी आपने यह कहकर मुझे वह गुड़िया दिला दी थी कि क्या मैं अपनी इतनी प्यारी गुड़िया को एक छोटी सी गुड़िया के लिए रोता हुआ छोड़ दूं। पुराने विद्यालय में जब विषयों के समझने में मुझे असहजता महसूस हुई तो आपने मेरा प्रवेश अगले सत्र से शहर के सबसे प्रसिद्ध विद्यालयों में से एक विद्यालय में करवा दिया। आपके द्वारा किए गए उपकारों एवं निश्छल प्रेम के लिए मैं जीवन भर कृतज्ञ रहूंगी। मैं आपको ये विश्वास दिलाती हूं कि आगे चलकर मेरे लिए देखे गए आपके सपनों को अपनी मेहनत और लगन से अवश्य साकार करूंगी।
आपकी प्रिय पुत्री,
चैतन्या सिंह