तहसील परिसर में किट से निकले कपड़े फेंकते लोग
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बाढ़ पीड़ितों को बांटी गई राहत सामग्री पैकेट में राशन के बजाय पुराने कपड़े निकलने से लोग भड़क गए। लोगों ने तहसील परिसर में जमकर हंगामा किया। लोगों का कहना था कि कई पैकेट में राशन के नाम पर कुछ नहीं निकला। तहसील प्रशासन के अनुसार बाढ़ पीड़ितों को बांटने के लिए हिंदुस्तान लीवर से 500 किट आईं थीं। सभी में राशन था। लोग राशन निकाल कर कपड़े लेकर आ गए और हंगामा किया। यमुना व बेतवा का जलस्तर बढ़ने से बीते दिनों सदर तहसील के 33 गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए थे। लोगों को अपने घर छोड़ आश्रय स्थलों व सड़क के किनारे रहना पड़ा था। बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन की ओर से राहत किट का वितरण किया गया।
बताया जा रहा है कि करीब 20 दिन बीतने के बाद भी 500 से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवार राहत किट पाने से वंचित हैं। शनिवार को हिंदुस्तान लीवर की ओर से आई 500 किट का वितरण किया गया। किट में पुराने कपड़े देख लोग आक्रोशित हो गए। तहसील परिसर में जाकर किट को फेंककर हंगामा किया। पुलिस ने समझा बुझाकर शांत कराया।
लेखपाल की पर्ची लेकर भटक रहे बाढ़ पीड़ित
बाढ़ राहत किट पाने से अभी कई लोग वंचित हैं। ऐसे लोग तहसील और लेखपालों के चक्कर काट रहे हैं। तहसील में शनिवार को ऐसे लोगों की खासी भीड़ रही, जिन्हें लेखपाल ने पर्ची तो दी लेकिन किट उपलब्ध नहीं कराई।
भद्दा मजाक किया
प्रशासन ने घटिया किट बांटकर हमारे साथ भद्दा मजाक किया है। जानकारी होने पर मौके पर ही किट खोली। उसमें केवल पुराने कपड़े और चप्पलें निकलीं।
- जमुना प्रसाद।
पुराने कपड़े दिए
किसी किट में राशन नहीं मिला। राहत किट पाने के लिए सभी इकठ्ठा हुए लेकिन राहत सामग्री के नाम पर पुराने कपड़े दिए गए।
- राहुल कुमार
बाढ़ पीड़ितों के लिए 3000 राहत किट मंगाई गईं थीं। सभी का वितरण कर दिया गया। कुछ पात्र पाने से वंचित रह गए हैं। हिंदुस्तान लीवर फैक्टरी से 500 किट वितरण के लिए आईं थीं। इनमें और प्रशासन की किट में अंतर होना लाजिमी है। राहत सामग्री पाने के लिए भीड़ लग गई। गरीब समझ सभी को वितरण कराया गया। लोग घर ले जाकर उसमें दाल, चावल, तेल आदि निकाल लिए और कपड़े लेकर वापस आ गए। किट में राशन सामग्री थी। जो पात्र राहत किट पाने से वंचित रह गए हैं, उन्हें भी दी जाएगी।
- केडी शर्मा, एसडीएम सदर