हमीरपुर जिले में भरुआ सुमेरपुर कस्बे के वार्ड संख्या 15 में एक एजेंट ने चिटफंड में धनराशि जमा करने वालों से परेशान होकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि चिटफंड कंपनियां छह-सात साल पहले करीब 300 लोगों को रुपया लेकर फरार हो गईं। अब लोग एजेंट पर पैसा देने का दबाव बना रहे थे। तीन दिन पहले भी जमाकर्ताओं ने उसके घर पर उत्पात मचाया था।
थानाक्षेत्र के ग्राम पारा रैपुरा गांव का मूल निवासी राजशेखर प्रजापति (32) कस्बे के वार्ड संख्या 15 में मकान बनाकर परिवार सहित रहता था। वह चिटफंड कंपनी में बतौर एजेंट काम करता था। छह-सात साल पहले उसने जान पहचान एवं नाते रिश्तेदारों का लाखों रुपया चिटफंड कंपनी में लगवा दिया था। बाद में यह कंपनी कारोबार समेटकर फरार हो गई। इसके बाद लोग इससे तकादा कर रहे थे। तीन दिन पूर्व कुछ लोगों ने तकादे को लेकर घर आकर जमकर उत्पात मचाया था। इससे वह बेहद परेशान था।
शनिवार की रात उसने पत्नी के साथ खाना खाया और कुछ समय अकेले रहने की बात कहकर पत्नी को कमरे से बाहर कर दिया। इसके बाद साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। कमरे में किसी तरह की आहट न होने पर पत्नी ने अन्य परिजनों को बुलाया।
मृतक के भाइयों ने दरवाजा तोड़ा तो वह फंदे पर लटक रहा था। परिजन उसे फंदे से उतारकर अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वह अपने पीछे पत्नी आराधना, पुत्र आयुष और प्रांजन को रोता बिलखता छोड़ गया है। थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि अभी तक तहरीर नहीं मिली है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।
आधा दर्जन चिटफंड कंपनियों में कराया था 40-50 लाख का निवेश
फंदा लगाकर आत्महत्या करने वाले चिटफंड के एजेंट ने आधा दर्जन कंपनियों में रकम दुगना करने के लिए नाते रिश्तेदारों सहित जान पहचान वालों का करीब 40-50 लाख रुपया निवेश कराया था। कंपनियों के भागने के बाद निवेश करने वाले ग्राहक रुपया वापस दिलाने के लिए आए दिन विवाद कर रहे थे। इसी से हताश होकर उसने आत्महत्या कर ली है। पत्नी आराधना प्रजापति ने बताया कि पति चिटफंड कंपनी यूनीमैक्स, स्वर्ण भारती, एआईएम लाइफ, स्वदेशी सहित आधा दर्जन कंपनियों के एजेंट थे। कंपनियों के लोग शुरू में मामला सेबी आदि के नियंत्रण में होने की बात कहकर जल्द रकम वापसी का आश्वासन देते रहे। बाद में बातचीत भी बंद कर दी। इससे उसके पति दो-तीन वर्ष से बेहद परेशान थे। आए दिन फोन करके लोग धमका रहे थे।