हमीरपुर कलेक्ट्रेट में जेन अल्फा का प्रदर्शन
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फतेहपुर के बाद अब हमीरपुर में जेन अल्फा ने सुविधाओं ने लिए आवाज उठाई है। सड़क बनवा दो, हम भी पढ़ाई करेंगे और अफसर बनेंगे... बच्चों के इन नारों की गूंज मंगलवार को कलक्ट्रेट परिसर में गूंजती रही। बच्चे अपनी मांगें डीएम के सामने रखना चाहते थे लेकिन उन्हें रोक दिया गया। अफसरों के साथ बैठक खत्म कर डीएम पीछे के गेट से चले गए। पांच घंटे तक चले हंगामे के बाद मायूस बच्चे घर लौट गए।
मंगलवार को मनकी-हमीरपुर मार्ग के निर्माण के लिए चंदूपुर और आसपास के कई गांवों के स्कूली बच्चों ने कलक्ट्रेट की ओर कूच कर दिया। अफसरों ने उन्हें गोल चबूतरा पर प्रदर्शन करने के लिए कहा। बच्चे मान गए और डीएम को बुलाने की मांग की।
अधिकारियों ने पांच बच्चों को वार्ता के लिए बुलाया लेकिन डीएम अभिषेक गोयल नहीं मिले। इससे बच्चे भड़क उठे और डीएम दफ्तर की ओर बढ़ने लगे। पुलिस-पीएसी ने उन्हें रोक लिया। कुछ बच्चे डीएम दफ्तर पहुंचे लेकिन उन्हें वहां से निकाल दिया गया।
छात्र-छात्राओं ने वहां से गुजर रहीं अफसरों की गाड़ियों को घेरकर नारेबाजी की। बच्चों को एडीएम राकेश कुमार ने समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने एक न सुनी। इस दौरान वहां पहुंचे कुछ बच्चों के अभिभावकों को भी अफसरों ने डांटा। डीएम के चले जाने की सूचना पर बच्चे भी लौट गए।
डेढ़ किमी सड़क के लिए 40 दिन में दूसरी बार चार किमी पैदल चलकर पहुंचे नौनिहाल
हमीरपुर में कीचड़ बन चुकी मनकी-हमीरपुर सड़क की कुल लंबाई करीब डेढ़ किमी होगी। इस दलदली सड़क को पार करके चंदूपुर और आस-पास के गांवों के सैकड़ों बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है। बच्चे बस इसी सड़क को बनवाने के लिए 40 दिन में दूसरी बार चार किमी पैदल चल कर कलेक्ट्रेट पहुंचे।
उन्हें उम्मीद थी कि डीएम सर उनकी बात सुनेंगे और सड़क बन जाएगी। इससे स्कूल आने-जाने में सहूलियत होगी। अफसोस ऐसा न हो सका। डीएम सर उनसे मिले बगैर ही निकल गए। इससे पहले तीन जुलाई को भी बच्चों ने प्रदर्शन किया था।
मनकी हमीरपुर मार्ग आजादी के बाद से अब तक पक्का नहीं हो सका है। सपा सरकार में यह मार्ग पास हुआ था लेकिन वन विभाग ने रोड़ा अटका दिया। कई जगह टुकड़े कच्चे रह गए। चंदूपुर के पास सड़क कच्ची है। एक दिन की बारिश में ही यहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।
कई बार बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और पढ़ाई प्रभावित होती है। शिक्षकों की डांट भी खानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी समस्या के चलते कुछ बच्चों को पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी। ग्रामीणों का कहना था कि हमने तो जिंदगी गुजार ली लेकिन इन बच्चों के भविष्य की चिंता है। इस दौरान रागनी, सुधा, अनुसुइया, राधा,
डीएम कार्यालय में प्रवेश करने का प्रयास करते प्रदर्शनकारी।
साहब हमसे मिलें मा का डर
प्रदर्शन कर रही छात्रा कल्पना निषाद ने कहा, साहब को हमसे मिलें मा का डर है। सड़क की मांग ही तो करते हैं। हम बच्चे सड़क पर प्रदर्शन के लिए उतरे, इसका मतलब समझना चाहिए। हमारी उम्र प्रदर्शन की नहीं पढ़ने की है। अभी तो बालिग भी नहीं हुए। बरसात में दो दिन कोई अफसर रहकर देख ले या अपने बच्चों को कीचड़ से निकलने दे, तब दर्द महसूस होगा।
पिछले महीने मिट्टी डली... फिर नहीं हुआ काम
सड़क बारिश में कीचड़ में तब्दील हो चुकी है। तीन जुलाई को भी स्कूली बच्चों ने सड़क बनाने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया था। तब सड़क पर मिट्टी डलवाकर समस्या के अस्थायी समाधान का प्रयास किया गया लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ा। इससे बच्चे भड़क गए।
पूनम समेत बड़ी संख्या में छात्राएं, छात्र व उनके अभिभावकों के साथ ग्रामीण मौजूद रहे। अपर जिलाधिकारी राजस्व एवं वित्त राकेश कुमार ने प्रशासनिक बुलेटिन में बताया कि चंदूपुर व ब्रह्मा का डेरा समेत आस-पास के मजरा के लिए जो प्रदर्शन किया गया उन बच्चों को पहले भी समझाया था कि कच्ची सड़क की जो समस्या है उसे जिला प्रशासन ने संज्ञान में लिया है।
वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद उस पर लोक निर्माण विभाग से करीब 1600 मीटर सड़क के लिए कार्ययोजना बनाई है, जो शासन को भेज दी गई। कार्ययोजना की स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण के लिए टेंडर होंगे। तब तक के लिए गांव के लोगों को परेशान न होना पड़े तो मिट्टी डलवाई गई।
यह बच्चों का था। तकरीबन सौ लोग आए थे, उसमें ज्यादातर वयस्क थे। कुछ लोग अपने बच्चों के साथ आए थे। पहले भी यह लोग आ चुके हैं। शासन से धन आवंटित होते ही मांग पूरी कर दी जाएगी। तब तक अस्थायी तौर पर मिट्टी डलवाकर रोड को चलने लायक बनवा दिया जाएगा।-अभिषेक गोयल डीएम, हमीरपुर