अमर उजाला ने 16 जुलाई के अंक में खोली थी पोल
दरअसल, यह पूरा मामला संकुल शिक्षकों के गठन और उनके परिवर्तन की नीतियों से जुड़ा हुआ है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकेश खरवार ने पहले 24 जून 2026 को संकुल शिक्षकों के गठन के संबंध में एक नियमसंगत आदेश जारी किया था। लेकिन महज 20 दिनों के भीतर ही विभागीय स्तर पर ऐसी खिचड़ी पकी कि उन्होंने अपने ही पूर्व के आदेश को पलटते हुए 14 जुलाई को एक नया और अजीबोगरीब आदेश जारी कर दिया।
14 जुलाई का आदेश निरस्त, BSA ने स्वीकारी विसंगति
शासन स्तर से जवाब-तलब होने की आशंका को देखते हुए बीएसए मुकेश खरवार ने तत्काल अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने 17 जुलाई को एक नया संशोधित कार्यालय आदेश जारी करते हुए स्पष्ट रूप से लिखा कि 14 जुलाई को जारी किया गया आदेश शासनादेशों की मूल भावना के अनुरूप नहीं था, इसलिए उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
अफसरों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
महज तीन दिन पहले जारी आदेश वापस लेने से बीएसए कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यह भी चर्चा है कि शासनादेशों का परीक्षण किए बिना विवादित आदेश कैसे जारी हो गया। यदि समय रहते त्रुटि सामने नहीं आती तो शासनादेश के विपरीत प्रक्रिया लागू हो सकती थी।