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हमीरपुर नाव दुर्घटना: पांच परिवारों में पसरा मातम, उठीं छह अर्थियां, जिंदगी भर का गम दे गया हादसा

Sat, 09 May 2026 05:34 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

हमीरपुर जिले के नाव हादसे में छह अर्थियां उठीं तो पूरे गांव में मातम पसर गया। परिजनों का हाल देख हर आंख रोई। 
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हमीरपुर नाव हादसा - फोटो : सोशल मीडियो
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विस्तार
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यूपी के हमीरपुर जिले में कुरारा थाना क्षेत्र के कुतूपुर पटिया गांव में यमुना नदी में नाव पलटने से हुई छह लोगों की मौत के बाद शुक्रवार को अलग-अलग गांवों में शव का अंतिम संस्कार और दफन, जल प्रवाह हुआ। कहीं मासूमों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया तो कहीं मां-बेटे को एक साथ मिट्टी दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल रहा। हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा रहा।
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बुधवार शाम देशराज की नातिन की शादी समारोह के बाद रिश्तेदार और बच्चे नाव से यमुना पार टापू पर खरबूजा, तरबूज, खीरा और ककड़ी लेने गए थे। लौटते समय बीच धारा में नाव का संतुलन बिगड़ गया और नाव पलट गई। हादसे में बृजरानी, लव्यांश, रानी, आकांक्षा, अर्चना और गोरे उर्फ आदित्य की मौत हो गई, जबकि विष्णु, पारुल और रिंकू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

घटना की सूचना पर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल, पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक, एडीजी प्रयागराज जोन भानु भास्कर, डीआईजी चित्रकूटधाम परिक्षेत्र बांदा राजेश एस समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी और स्थानीय गोताखोरों की मदद से करीब 22 घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद सभी शव बरामद किए गए।

 

कुतूपुर में दफनाई गई रानी
नाव हादसे में जान गंवाने वाली रानी को शुक्रवार सुबह कुतूपुर पटिया गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। वह तीन भाइयों में सबसे छोटी थी और भौली स्थित श्री विंदेश्वरी जूनियर हाईस्कूल में कक्षा पांच की छात्रा थी। परिजनों के अनुसार वह पढ़ाई में होनहार थी और आगे पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहती थी। भाई श्याम सिंह ने बताया कि हादसे के बाद मां सावित्री बार-बार “बिट्टी-बिट्टी” कहकर बेसुध हो जा रही हैं। अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

 

जलाला में आकांक्षा को किया सुपुर्द-ए-खाक
जलाला गांव निवासी आकांक्षा को शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे दफनाया गया। वह अपनी मौसी की बेटी की शादी में शामिल होने एक दिन पहले कोतूपुर पटिया आई थी। हादसे के बाद उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल रहा। पिता रामहेत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं।

 
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घाटमपुर में गंगा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
घाटमपुर निवासी गोरे उर्फ आदित्य और अर्चना के शव गुरुवार देर रात घर पहुंचे। शुक्रवार को चंडिका माता मंदिर के पास गंगा घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने बताया कि आदित्य कक्षा छह का छात्र था। वह अपने पिता महेश, मां और भाई आशीष के साथ शादी में आया था। विदाई के बाद भाई घर लौट गया था, लेकिन आदित्य रिश्तेदारी में रुक गया था। वहीं अर्चना अपनी चाची के साथ शादी समारोह में शामिल होने आई थी।
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