जीटी रोड स्थित डीएमएसआरडीई में आयोजित रूबी जुबली राष्ट्रीय संगोष्ठी में स्मारिका का विमोचन करते
- फोटो : amarujala
कानपुर। देश के वैज्ञानिक उड़ने वाली कार और अदृश्य होने वाले लड़ाकू जहाजों को बनाने वाले मैटेरियल पर रिसर्च कर रहे हैं। नैनो मैटेरियल से यह संभव है और रिसर्च में काफी सफलता भी मिली है। नैनो मैटेरियल से ऐसी-ऐसी खोजें हो सकती हैं जो अजूबे से कम नहीं होंगी। डिफेंस मैटेरियल एंड स्टोर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई) के राष्ट्रीय सेमिनार में ये जानकारियां दी गईं। वैज्ञानिकों ने कहा कि नैनो मैटेरियल ही भविष्य है। अब इन पर अधिक फोकस करने का समय है।
डीएमएसआरडीई अपनी स्थापना के चालीस साल पूरे होने का जश्न मना रहा है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस जश्न का गुरुवार से राष्ट्रीय सेमिनार के रूप में आगाज हुआ। देशभर से जुटे रक्षा वैज्ञानिकों ने सेना को और अधिक मजबूत करने के लिए मंथन किया। डीएमएसआरडीई और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की उपलब्धियां गिनाईं। आईआईएससी बंगलूरू के डायरेक्टर पद्मश्री प्रो. दीपांकर बनर्जी ने नैनो फिलर व सिल्वर की खूबियां गिनाई। कहा नैनो पार्टिकल के जरिए काफी नया रिसर्च किया जा सकता है। एयरोप्लेन का वजन कम किया जा सकता है, उसकी स्पीड हाई की जा सकती है। उड़ने वाली कार बन सकती है।
मुख्य अतिथि रक्षा वैज्ञानिक पद्मविभूषण पी. रामा राव ने देश के विकास के लिए विज्ञान, तकनीक और शैक्षिक संस्थानों को एकसाथ मिलकर काम करने की सलाह दी। आईआईटी रोपड़ के डायरेक्टर प्रो.सरित दास ने रिसर्च में मैकेनिकल प्रापर्टी के प्रयोग पर प्रकाश डाला। आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने ग्रेफिन मैटेरियल से जुड़ी कई अहम जानकारी दी। कहा दुनिया बनाने में कई ऐसे ही मैटेरियल का प्रयोग ईश्वर ने भी किया होगा। इसके पूर्व डीएमएसआरडीई के डायरेक्टर एन. ईश्वरा प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत किया। डा. अशोक रंजन, डा. आरके तिवारी , डा.एसवी कामत, डा. अनुराग श्रीवास्तव, डा. एसआर वडेरा, डा. डीके सेतु, डा. केयू भाष्कर राव, डा. डीएन त्रिपाठी आदि ने विचार व्यक्त किए।