शाह का रुतबा ऐसा कि जिसे जहां जगह मिली दुआ के लिए हाथ उठा लिए। हजरत ने भी अकीदतमंदों की मुरादें पूरी की। रविवार को जाजमऊ में हजरत मखदूम शाह के उर्स पर हजारों अकीदतमंद जुटे।
कुल के फातेहा के बाद ईदगाह गद्दियाना के पेश इमाम मौलाना हाशिम अशरफी ने आधे घंटे तक दुआ की। दुआ के वक्त तमाम लोगों की आंखें आंसुओं से नम हो गईं।
आलम यह था कि नई चुंगी से लेकर दरगाह तक और अशरफाबाद से दरगाह तक जो जहां पर भी था, वहीं पर दुआ को हाथ उठा लिए। शहर में हजरत मखदूम शाह आला का उर्स ही सबसे बड़ा होता है।
दो दिन तक उर्स का प्रोग्राम चलता है। कल शाम को मिलाद के बाद शुरू हुआ कव्वाली का दौर सुबह फजिर की नमाज से पहले तक चलता रहा। फिर कुरानख्वानी का एहतेमाम किया गया। कुरान ख्वानी के बाद नातों का नजराना पेश किया गया।
मौलाना हाशिम अशरफी ने तकरीर कर मखदूम शाह आला की सीरत पर रोशनी डाली। शहरकाजी मौलाना आलम रजा नूरी, मौलाना हसीब अख्तर, मौलाना गुलाम कादिर, मौलाना मुहम्मद नैयर, मौलाना शाहिदी, कारी मुहम्मद अली आदि ने कुरान की तिलावत की।
फातेहा के बाद नीम की पत्तियां तोड़कर खाई
फातेहा होने के बाद दरगाह के पास के पेड़ की पत्तियां भी मीठी हो जाती हैं। पत्तियां खाने से लोगों को शिफा होती है। इसलिए फातेहा खत्म होते ही वहां पर खड़े लोग पेड़ की पत्तियां तोड़ने लगे।