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रैनसमवेयर वायरस से साइबर अटैक कर हैक किया डाटा, पहले भी भारत समेत कई देश इसकी चपेट में आ चुके

Wed, 03 Apr 2019 06:32 PM IST
शिखा पांडेय सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक फोटो
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कानपुर में हैकर ने रैनसमवेयर वायरस से साइबर अटैक कर रुद्र रियल इस्टेट कंपनी का डाटा हैक किया है। यह खुलासा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने किया है। हैकर कमजोर सिक्योरिटी सिस्टम वाले कंप्यूटरों को इस वायरस से निशाना बनाते हैं।
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उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर सुरक्षा सलाहकार राहुल मिश्रा ने बताया कि वर्ष-2017 में रैनसमवेयर वायरस से बड़ा साइबर अटैक हुआ था। इसमें भारत सहित अमेरिका, चीन, जापान, इटली और स्पेन आदि देशों के करीब ढाई लाख कंप्यूटरों में रैनसमवेयर वायरस से अटैक किया गया था। उसके बाद बिटकॉइन की मांग की गई थी।

राहुल के मुताबिक, जिस तरह से रुद्र रियल इस्टेट का डाटा हैक कर फाइलों को इन्क्रिप्ट किया गया है, ठीक वैसे उस दौरान भी हुआ था। वहां भी बिटकॉइन की मांग की गई थी। इससे साफ है कि यहां में भी रैनसमवेयर से ही साइबर अटैक किया गया है।

अनजान लिंक पर न करें क्लिक
राहुल के मुताबिक, अक्सर अलग-अलग वेबसाइट पर काम करते वक्त कई तरह के लिंक डिस्प्ले होते रहते हैं। इन लिंक पर क्लिक करने से साइबर हैकर यूजर का डाटा अपने पास ट्रांसफर कर लेते हैं। उसके बाद आसानी से किसी भी वायरस से सिस्टम यानी कंप्यूटर पर अटैक कर सकते हैं। इससे कंप्यूटर के डाटा पर उनका कब्जा होता है।

अपडेट करते रहें ऑपरेटिंग सिस्टम
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इस तरह के साइबर अटैक से बचना है तो कंप्यूटर में अपडेटेड ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करें। जब उसका नया वर्जन आए तो उसे अपडेट जरूर करें। इससे वायरस अटैक से बचा जा सकता है।

ऐसे फंसाते हैं जाल में
सीओ क्राइम चक्रेश मिश्रा ने बताया कि हैकर डाटा हैक करने बाद ब्लैकमेल करते हैं। वह तय रकम मांगकर डाटा रिलीज करने की बात कहते हैं। उनके झांसे में आकर जो भी पेमेंट कर देता है, उसे वे अपने जाल में और फंसाते जाते हैं। डाटा रिलीज करने के बजाय वह रकम बढ़ाने लगता है। इसलिए इस तरह के मामलों में फिरौती देने के बजाय तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
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वर्जन
 रैनसमवेयर वायरस से अटैक कर डाटा हैक किया गया है। यह खतरनाकवायरस होता है। इससे बचने के लिए कंप्यूटर का सिक्योरिटी सिस्टम बेहतर करना होगा। - अमित दुबे, साइबर एक्सपर्ट 

प्रदेश भर में ऐसे एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। मामलों की तह तक पहुंचना आसान नहीं है। यही वजह है कि ये हैकर पकड़े नहीं गए हैं। इसलिए एहतियात जरूरी है। इंटरनेट का इस्तेमाल सोच समझकर करें। - आईपीएस डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, साइबर एक्सपर्ट 
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