कानपुर। सिखों की लंगर परंपरा के पीछे के संदेश, शहीदी परंपरा में छिपी जांबाजी और गुरुओं के सिद्धांतों को अब विषयों के रूप में पढ़ाया जाएगा। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में स्थापित गुरु तेग बहादुर शोध पीठ के पाठ्यक्रम को तय करने के लिए शुक्रवार को स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में शोध पीठ में संचालित होने वाले कोर्सों पर सहमति बनी। 17 जून को उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय इस पाठ्यक्रम के ब्रोशर का शुभारंभ करेंगे।
स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के निदेशक डॉ. सर्वेशमणि त्रिपाठी, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. मनप्रीत सिंह मन्ना, श्री गुरु सिंह सभा के चेयरमैन कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक से पहले बोर्ड के सदस्य सरदार गुरजिंदर सिंह सलूजा के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। प्रो. मनप्रीत सिंह ने बताया कि शोध पीठ की शुरुआत इसी सत्र से हो जाएगी। इसमें दो साल का ऑनलाइन डिप्लोमा इन सिख स्टडीज कोर्स संचालित किया जाएगा।
नई शिक्षा नीति के तहत लागू इस कोर्स को तीन भाषाओं में शुरू किया जाएगा। गुरुमुखी, हिंदी के अलावा अंग्रेजी भाषा में भी कोर्स होगा। 12वीं पास करने वाला किसी भी उम्र का व्यक्ति आवेदन कर सकता है। इसकी फीस 2000 रुपये है। 80 क्रेडिट के कोर्स में चारों सेमेस्टर में अलग-अलग कोर्स संचालित होंगे। पहले सेमेस्टर में जहां गुरुओं के जीवनकाल उनके सिद्धांतों के बारे में जानने का मौका मिलेगा, दूसरे सेमेस्टर में संस्थानों की नींव, लंगर सेवा के बारे में जानकारी दी जाएगी।
तीसरे सेमेस्टर में शहीदी परंपरा को पढ़ने का मौका मिलेगा तो अंतिम सेमेस्टर में वर्तमान समय में सिख आइडियोलॉजी की महत्ता के बारे में पढ़ाया जाएगा। ऑनलाइन लाइव सेशन के साथ ही वीडियो भी अपलोड किए जाएंगे। प्रैक्टिकल भी कराए जाएंगे। गुरुद्वारों का भ्रमण छात्रों को केस स्टडी के रूप में तैयार करना होगा। इस मौके पर सिमनरजीत सिंह, डॉ. अंकित त्रिवेदी, डॉ. प्रशांत, डॉ. श्रीप्रकाश सहित अन्य शामिल रहे।