कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक शोध अध्ययन में हीमोग्लोबिन विकारों (हीमोग्लोबिनोपैथी) को लेकर महत्वपूर्ण रुझान सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, कानपुर क्षेत्र में पुष्टि किए गए कुल हीमोग्लोबिन विकारों में एचबीई ट्रेट की हिस्सेदारी लगभग 11% (10.8%) दर्ज की गई है। पारंपरिक रूप से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में पाया जाने वाला यह विकार अब जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण उत्तर भारत में भी उल्लेखनीय रूप से देखा जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं में समय पर जांच और विवाह-पूर्व एचपीएलसी (परीक्षण इस प्रकार के आनुवंशिक रक्त विकारों की प्रभावी रोकथाम के लिए बेहद जरूरी है। एचबीई ट्रेट से प्रभावित सभी मरीज पूरी तरह से लक्षणहीन पाए गए और उनका हीमोग्लोबिन स्तर लगभग सामान्य था। यदि किसी बच्चे में माता-पिता दोनों से एचबीई और बीटा-थैलेसीमिया के गुण एक साथ वंशानुगत मिलते हैं।