एमएसएमई का बढ़ाया गया दायरा, संशोधित रिटर्न चार साल तक भर सकेंगे
बजट में सरकार ने एमएसएमई का दायरा बढ़ा दिया है। इससे इन यूनिटों को सीधा लाभ मिल सकेगा। जीएसटी के कानून व नियमों में कई संशोधन किए गए हैं। संशोधित रिटर्न अब चार साल तक भरे जा सकेंगे। कार्यालय आए वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि माइक्रो इंटरप्राइजेज की श्रेणी में पांच करोड़ टर्नओवर को बढ़ाकर अब दस करोड़ कर दिया गया है। स्मॉल इंटरप्राइजेज के लिए इसे 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया गया है। नई टैक्स रिजीम के तहत करमुक्ति सीमा तीन लाख से बढ़ाकर चार लाख कर दी गई है। गृह संपत्ति से आय में 30 प्रतिशत की छूट भी मिलती रहेगी। अब 60 साल के वरिष्ठ नागरिक को बैंक से मिलने वाले ब्याज की धनराशि पर एक लाख तक पर टीडीएस की कटौती नहीं होगी। अब जीएसटी के विभागीय अधिकारियों की ओर से केवल अर्थदंड पारित आदेशों के खिलाफ अपील तब दाखिल हो सकेगी, जब 10 प्रतिशत पेनाल्टी का शुल्क जमा किया जा सकेगा। इसके पूर्व केवल टैक्स की धनराशि का 10 फीसदी प्री-डिपॉजिट करने की शर्त लागू थी। अर्थदंड के मामले में कोई धनराशि जमा नहीं की जाती थी। कारोबारियों को अब आर्थिक रूप से यह नियम परेशान करेगा।
होजरी और रेडीमेड के क्षेत्र के उद्यमियों के हाथ खाली
कार्यालय आए जेट निटवियर के एमडी बलराम नरूला ने बताया कि आम बजट में होजरी और रेडीमेड उद्योग के क्षेत्र में उद्यमियों के हाथ खाली कर दिए गए हैं। जबकि यह कारोबार और उद्यम का बड़ा सेक्टर है। आवश्यक जरूरतों में जो बातें आती हैं, उसमें रोटी मकान के साथ कपड़ा भी जुड़ा है। कपड़े की जो सबसे पहली जरूरत लोगों को होती है, वह है अंडरवियर और बनियान वह होजरी से ही जुड़ा है। लोअर, टी शर्ट, जितने भी कैजुअल वियर हैं, सभी इसी क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद इस सेक्टर को पूरी तरह से खाली रखा गया है। कानपुर की बात करें तो यहां होजरी का हब है। बजट में व्यवस्था नहीं होने से इस सेक्टर के कारोबारियों को निराशा हुई है। उन्होंने बताया कि बजट में सबसे ज्यादा भ्रम की स्थिति एमएसएमई सेक्टर में है। कहा गया है कि इस सेक्टर के जरिये दो लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा लेकिन यह रोजगार किस तरह से लोगों को मिल सकेगा, इसकी कोई कार्ययोजना नहीं बताई गई है। उन्होंने बताया कि जो आर्थिक रूप से कमजोर है, जिसमें पास नौकरी नहीं है, उसके लिए किस व्यवस्था के तहत लाभ दिया जाएगा। 100 में से 20 नौकरियां ही रह गईं हैं। जो पद खाली होते जा रहे हैं, उसे खतम किया जा रहा है। ऐसे में बेरोजगारी पर किस तरह से रोक लगाई जा सकेगी, यह स्पष्ट नहीं है।