कानपुर। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर निशाना साधा। कहा कि 2014 से पहले तक औसत 15 प्रतिशत तक कर लगता था। 2017 में जीएसटी आने के बाद 11-12 प्रतिशत कर हुआ। अब जीएसटी रिफार्म 2.0 से 7-8 प्रतिशत औसत कर दर आने का आने का अनुमान है। जीएसटी से पहले 100 से ज्यादा टैक्स अलग-अलग राज्यों में लगते थे। कुछ अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि नए सुधार से जीएसटी कलेक्शन घटेगा लेकिन सुधारों से जीएसटी कलेक्शन भी बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों ये सुधार संभव हो सके। वह हमेशा देश के लोगों की चिंता करते हैं। जो कहते हैं वह करते हैं।
सेंट्रल जीएसटी की ओर से मर्चेंट चैंबर सभागार में आयोजित जीएसटी रिफार्म 2.0 संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए चौधरी ने अपने संबोधन में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधार में जो भी कमियां रह गई हैं उन्हें दूर किया जाएगा। कोई भी नई चीज करने में चुनौतियां सामने आती हैं। 2014 में जब प्रधानमंत्री ने देश में स्वच्छता अभियान की शुरुआत की तब भी कई लोगों ने आलोचना की थी। अब यह जन अभियान बन चुका है। देश भर में 12 करोड़ शौचालय बनवाए गए। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर, स्वदेशी अपनाओ का आह्वान किया है। इनसे से ही 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बन सकेगा। इसमें एमएसएसई, उद्यमियों और व्यापारियों का बड़ा योगदान होगा। विशिष्ट अतिथि सांसद अशोक रावत ने बताया कि प्रधानमंत्री ने जनता को दिवाली से पहले उपहार दिया है। ट्रैक्टर सस्ता होने से किसान खुश हैं।
सीबीआईसी सदस्य सुरजीत भुजबल ने कहा कि जीएसटी सुधार का लाभ जनता को दिया जाए। मुख्य आयुक्त सीजीएसटी पीके कटियार ने कहा कि उद्यमियों-व्यापारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। सीजीएसटी आयुक्त रोशन लाल ने उद्यमियों के सवालों के जवाब दिए और सुझावों को नोट करने की बात कही। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंश्याेरेंस सर्वेयर्स एंड लाॅस एसेसर के पूर्व निदेशक निर्मल त्रिपाठी ने बताया कि वित्त राज्यमंत्री को ज्ञापन देकर बीमा क्षेत्र में काम कर रहे सर्वेयर और एसेसर की समस्या बताई है। कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से भी सुझावों का ज्ञापन दिया गया। कार्यक्रम खत्म होने के बाद केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री ने आर्यनगर में जनसंपर्क कर दुकानों को जीएसटी कम होने के फायदे बताए। इस दौरान भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल, जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित, विधायक नीलिमा कटियार, एमएलसी अरुण पाठक, आर्थिक प्रकोष्ठ संयोजक संजीव पाठक बॉबी के अलावा अलग-अलग उद्योग और व्यापार संगठन के पदाधिकारी, सीए और कर अधिवक्ता मौजूद रहे।
संवाद कार्यक्रम के दौरान शहर के उद्यमियों, व्यापारियों, सीए और कर अधिवक्ताओं ने जीएसटी नए सुधार कार्यक्रम में उन्हें आ रही परेशानियों के बारे में बताया। सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने जीएसटी प्रथम अपील की तिथि बढ़ाने की बात रखी। उद्यमी जसवंत सिंह ने कहा कि पांच रुपये के बिस्कुट, नमकीन पैकिंग में 35 पैसे की छूट के बदले भार बढ़ाने की अनुमति दी जाए। हालांकि अफसरों ने अभी इस तरह की व्यवस्था न होने की बात कही। आईआईए के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने शहर में जीएसटी अपील ट्रिब्यूनल का गठन कराने और पुराना स्टाक से जुड़ी समस्या बताई। इस पर अफसरों ने कहा कि व्यापारी एमआरपी पर स्टीकर चस्पा कर सकता है लेकिन आम ग्राहक को नए रेट पर ही सामान उपलब्ध करवाया जाए।
मर्चेंट चैंबर के जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने शून्य कर होने वाली वस्तुओं पर आईटीसी वापस दिलाने के लिए विभाग से रिफंड मैकेनिज्म तैयार करने की बात रखी। चैंबर के औद्योगिक कमेटी के चेयरमैन सुशील शर्मा ने रक्षा उत्पाद पर लगने वाले जीएसटी की दरों को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग रखी। उद्यमी मिक्की मनचंदा ने कपड़े धोने के साबुन पर लगाए गए 18 प्रतिशत जीएसटी को 5 प्रतिशत करने की बात कही। इसके अलावा सीए छवि जैन, आईआईए महिला विंग की अध्यक्ष सुचेता वाही, उद्यमी वंदना मिश्रा, हर्षिता अग्रवाल, अभिमन्यु कपूर, यूपी मोटर ट्रांसपोटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कटारिया, विनीत रूंगटा, व्यापार मंडल अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने भी अपनी बात रखी।