टैक्स चोरी पकड़ने के लिए डिपार्टमेंट को अब मुखबिरी पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। जीएसटी नेटवर्क खुद ही कारोबारियों की जासूसी करेगा। जहां कहीं भी अव्यवहारिक लेनदेन या लेखा जोखा सामने आया, इसकी सूचना तमाम एजेंसियों तक ऑटोमेटिक ही पहुंच जाएगी।
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कानपुर शहर के जाने माने सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने टैक्स सलाहकारों को यह सीख शुक्रवार को मर्चेंट चैंबर सभागार में दी। उन्होंने बताया कि टैक्स से जुड़े विभाग चाहे जीएसटी हो या आयकर अथवा आर्थिक अपराध का विंग प्रवर्तन निदेशालय। इस नेटवर्क की मदद से ये विभाग अपने काम की सूचना तलाश लेंगे। इस वजह से कारोबारी या उसके टैक्स सलाहकार जरा भी ऊंचा नीचा करने से पहले विचार जरूर करें। जीएसटी में टैक्स चोरी पकड़े जाने पर बच निकलने का रास्ता नहीं है।
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उन्होंने बताया कि चार्टर्ड एकाउंटेंट अभी तक जीएसटी नेटवर्क का 25 फीसदी काम ही समझ पाए हैं। 75 फीसदी काम इतना गोपनीय है कि उसे समझना आसान नहीं। यही 75 फीसदी हिस्सा देश भर के कारोबार की निगरानी करेगा। अव्यवहारिक लेनदेन या लेखा जोखा इसके नेटवर्क में हमेशा मौजूद रहेंगे। किसी की कभी भी जांच हो सकती है।
वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने की पूर्व संध्या पर कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन, मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश, कानपुर चार्टर्ड एकाउंटेंट सोसाइटी की ओर से जीएसटी की उलझनें सुझलाने के लिए कार्यक्रम कराया गया था। अमर उजाला ने मीडिया पार्टनर की भूमिका निभाई।