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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: बच्चे भी स्ट्रेस का शिकार, जरा सी बात पर मरने-मारने पर हो जाते उतारू

Wed, 10 Oct 2018 05:53 PM IST
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर

सार

- नींद पूरी न होने से किशोरों और युवाओं में बढ़ रहा स्ट्रेस 
- ग्रो सोसाइटी का सर्वे, 40 फीसदी बच्चे स्ट्रेस का शिकार
 
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विस्तार
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्तूबर) की थीम इस बार युवाओं पर रखी गई है। युवा सबसे अधिक मानसिक रोग की चपेट में आ रहे हैं। स्कूल-कालेज के बच्चे जरा सी बात और दबाव बढ़ने पर अवसाद में चले जाते हैं। वे मरने और मारने पर उतारू हो जाते हैं। इस समस्या के कारणों का एक बड़ा पहलु किशोरों और युवाओं की नींद पूरी न होना है।
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कानपुर में ग्रो सोसाइटी के ताजा सर्वे में पता चला है कि पांच से 18 साल के बीच की उम्र के लड़कों और लड़कियों की नींद कम हो रही है। इससे हारमोंस का बैलेंस बिगड़ने के साथ स्ट्रेस बढ़ रहा है। स्ट्रेस से इनकी बर्दाश्त की क्षमता कम हो रही है।  

ग्रो सोसाइटी ने विभिन्न स्कूलों के छह हजार छात्र-छात्राओं पर सर्वे किया है। इनकी शारीरिक स्थिति और बीमारियों के संबंध में जानकारी जुटाने केसाथ ही इन छात्र-छात्राओं स्ट्रेस लेवल भी मापा गया। इसमें 40 फीसदी छात्र-छात्राएं स्ट्रेस में मिले हैं।
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मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर इंटरनेट सर्फिंग की लत की वजह से ये सामान्य से कम नींद ले रहे हैं। इससे इन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापा सरीखे रोग का खतरा तो है ही सबसे ज्यादा मानसिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।

स्ट्रेस में रहने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम भी प्रभावित होने लगता है। सर्वे के दौरान जानकारी जुटाने पर पता चला कि ये छोटी-छोटी सी बात पर अधिक रिएक्ट कर रहे हैं। बहुत दिनों तक स्ट्रेस में रहने की वजह से इनके मस्तिष्क के न्यूरो केमिकल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का अंदेशा विशेषज्ञ जाहिर कर रहे हैं। सर्वे प्रमुख और सीनियर पीडियाट्रिक इंड्रोक्रोनोलोजिस्ट डॉ. अनुराग वाजपेयी का कहना है कि सर्वे केदौरान इन छात्र-छात्राओं का स्ट्रेस लेवल जानने के लिए कुछ तकनीकी प्रश्नावली हल करवाई गई, जिससे इनकेस्ट्रेस लेवल का पता चला।

छात्र-छात्राओं में स्ट्रेस का कोई बड़ा बाहरी कारण नहीं था। अधिकांश में ज्यादातर को स्ट्रेस नींद पूरी न होने से रहा। छात्रों में स्ट्रेस अधिक पाया गया। इनमें अधिक स्ट्रेस होने की वजह इनकी शारीरिक प्रक्रिया रही है।
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सर्वे की अवधि एक वर्ष
कुल छात्र-छात्राएं- 6000
छात्रों की संख्या- 3600
छात्राओं की संख्या- 2400
आयु वर्ग- 5 से 18 वर्ष

अभिभावकों को सलाह
- बच्चों को अधिक मोबाइल, कंप्यूटर पर सर्फिंग न कर दें
- उनकी समय से सोने की आदत डालें
- बच्चों को उपेक्षित महसूस न होने दें
- बच्चों से उनकी बातें साझा करें
- खेलकूद, स्वस्थ बातचीत में रुझान पैदा करें
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