4681 बच्चे और 29388 गर्भवती कुपोषित। यह आंकड़ा इटावा के 55 गांवों का है, जिनमें से कुपोषण दूर करने के लिए विभाग को 90 दिन मिले। लेकिन सिस्टम ही मर्ज बन गया और पूरे 12 महीने में महज 10 गांव ही सुपोषित हो पाए।
पुष्टाहार वितरण और निगरानी सिस्टम फेल मिला। कुपोषण से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने में भी कर्मचारियों ने जद्दोजहद नहीं की, नतीजतन कुपोषण से जंग में इटावा पिछड़ा मिला। अफसरों ने जरूर कोरोना वायरस को इसकी वजह बताया, लेकिन लक्ष्य पूरा करने के तय समय तक संक्रमण ने यहां दस्तक भी नहीं दी थी।
पुष्टाहार कब बंटता पता ही नहीं
इटावा के गांव दुगावली में हालत सबसे बदतर मिले। गांव में 16 गर्भवती-धात्री, 18 बच्चे कुुपोषित मिले। एक बच्चा अतिकुपोषित था। गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी थी। आगे बढ़ तो घरों के बाहर कुछ लोग बातें करते मिले।
उनसे गांव में कुपोषण, आंगनवाड़ी केंद्र, पुष्टाहार वितरण के बारे में पूछा तो उन्होंने हालत खराब बताए। यहीं के बृजकिशोर ने बताया कि आंगनाड़ी पर कब पुष्टाहार बंटता है पता नहीं। ही बातें यहीं रहने वाले देवानंद ने बताईं। कहा कि अधिकारी भी निरीक्षण करने नहीं आते हैं।