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हाईवे पर चालक को आई झपकी: कार को चीर युवक के पेट में ग्रिल घुसने से मौत, चालक घायल

Thu, 12 Jun 2025 09:49 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

Unnao News: लोहे की डब्ल्यू शेप ग्रिल चालक के बगल वाली सीट में बैठे युवक के पेट में घुसते हुए डिक्की तक पहुंची। ग्रिल एयरबैग को भी चीरकर घुसी।
 
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अकाश राजभर की फाइल फोटो व क्षतिग्रस्त कार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बृहस्पतिवार दोपहर करीब 12:40 बजे तेज रफ्तार कार चालक को झपकी आने से हाईवे किनारे लोहे की सेफ्टी ग्रिल में घुस गई। ग्रिल में पिलर न लगा होने से करीब पांच फीट लंबी ग्रिल कार के बाएं तरफ से घुसी और आगे की सीट पर बैठे युवक के पेट में घुस गई। एयरबैग भी खुला, लेकिन ग्रिल ने उसे भी चीर दिया। इससे उसकी मौत हो गई। वहीं, एयरबैग ने कार चालक की जान बचा ली। पुलिस के मुताबिक, कार की रफ्तार करीब 120 किमी प्रति घंटा रही होगी। हादसे के बाद हाईवे पर करीब एक घंटे तक यातायात रेंगता रहा।
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सिद्धार्थनगर जिले के थाना बांसी के कदमहवा गांव निवासी आकाश राजभर (24) पुत्र साधुशरण बलरामपुर जिले के थाना और कस्बा तुलसीपुर निवासी साथी रघुवर (22) पुत्र संतोष बरनवाल के साथ फर्रुखाबाद जा रहे थे। दोनों बृहस्पतिवार सुबह सात बजे सिद्धार्थनगर से निकले थे। दोपहर 12:40 बजे लखनऊ-कानपुर हाईवे पर चमरौली गांव के पास पहुंचे थे, तभी कार चला रहे रघुबर को झपकी आ गई। इससे कार अनियंत्रित हो गई।
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हाईवे पर लहराते हुए कार का बाएं तरफ का हिस्सा किनारे लगी लोहे की सेफ्टी ग्रिल से टकरा गई। ग्रिल के छोर पर पिलर न लगा होने से करा करीब पांच फीट बाएं तरफ के टायर के ऊपर से घुसी और कार की बॉडी को फाड़ते हुए चालक के बगल वाली सीट पर आगे बैठे आकाश राजभर के पेट में घुस गई। इससे उसकी मौत हो गई। रघुवर भी घायल हो गया। पुलिस ने घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया, बाद में उसे छुट्टी दे दी गई।

रघुवर ने बताया कि दोनों फर्रुखाबाद के गुरुकुल इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर की कक्षाएं साथ में चला रहे थे। बृहस्पतिवार सुबह दोनों वहीं जा रहे थे। मृतक के मामा राकेश ने बताया कि आकाश तीन भाइयों ने बड़ा था। दो बहनें हैं।
कोतवाल सुरेश सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। परिजन ने उनके पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम कराने की बात कही है। तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण एजेंसी की लापरवाही बनी हादसे की वजह
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर डिवाइडर और सड़क के दोनों तरफ लोहे की सेफ्टी ग्रिल लगाने का काम चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण एजेंसी ने यहां पर दो ग्रिलों के बीच तीन फीट का अंतर रखा है। ग्रिल के बाहरी सिरे पर पिलर न लगे होने से करीब पांच फीट लंबी ग्रिल निकली थी। कार के टकराते ही ग्रिल इंजन के तरफ से बाएं टायर के ऊपर से घुसी और अंदर तक घुसती चली गई। उधर, जानकारों का कहना है कि अगर ग्रिल एंगल को भी स्टील पिलर लगाकर बोल्ट से कस दिया गया होता तो कार पिलर में टकराने के बाद वहीं पर रुक गई होती। कार भले ही क्षतिग्रस्त हो जाती और बैठे लोगों को चोटें भी आती, लेकिन युवक के पेट में न घुसती।
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लखनऊ तक कार चलाकर लाया था आकाश, नींद आने पर रघुवर को दी थी
साथी रघुवर ने बताया कि लखनऊ तक आकाश कार चलाकर आया था, फिर उसे नींद आने लगी। इस पर आकाश ने उसे कार चलाने के लिए कहा। कुछ दूर चलने पर रघुवर को भी झपकी आई तो उससे कहीं रुककर चाय पीने की बात कही, लेकिन उसने मना कर दिया। रघुवर के मुताबिक रास्ते में उसे कब झपकी आई पता ही नहीं चला और यह घटना हो गई।

चालक को झपकी आने से हादसा हुआ है। हाईवे की सड़क नौ मीटर चौड़ी है। सड़क से करीब तीन-चार मीटर बाद ग्रिल लगी है। उनका दावा है कि ग्रिल लगाने में कोई कमी नही है। - अभय कुमार, इंजीनियर, एनएचएआई

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