रघुवर ने बताया कि दोनों फर्रुखाबाद के गुरुकुल इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर की कक्षाएं साथ में चला रहे थे। बृहस्पतिवार सुबह दोनों वहीं जा रहे थे। मृतक के मामा राकेश ने बताया कि आकाश तीन भाइयों ने बड़ा था। दो बहनें हैं।
कोतवाल सुरेश सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। परिजन ने उनके पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम कराने की बात कही है। तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण एजेंसी की लापरवाही बनी हादसे की वजह
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर डिवाइडर और सड़क के दोनों तरफ लोहे की सेफ्टी ग्रिल लगाने का काम चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण एजेंसी ने यहां पर दो ग्रिलों के बीच तीन फीट का अंतर रखा है। ग्रिल के बाहरी सिरे पर पिलर न लगे होने से करीब पांच फीट लंबी ग्रिल निकली थी। कार के टकराते ही ग्रिल इंजन के तरफ से बाएं टायर के ऊपर से घुसी और अंदर तक घुसती चली गई। उधर, जानकारों का कहना है कि अगर ग्रिल एंगल को भी स्टील पिलर लगाकर बोल्ट से कस दिया गया होता तो कार पिलर में टकराने के बाद वहीं पर रुक गई होती। कार भले ही क्षतिग्रस्त हो जाती और बैठे लोगों को चोटें भी आती, लेकिन युवक के पेट में न घुसती।
लखनऊ तक कार चलाकर लाया था आकाश, नींद आने पर रघुवर को दी थी
साथी रघुवर ने बताया कि लखनऊ तक आकाश कार चलाकर आया था, फिर उसे नींद आने लगी। इस पर आकाश ने उसे कार चलाने के लिए कहा। कुछ दूर चलने पर रघुवर को भी झपकी आई तो उससे कहीं रुककर चाय पीने की बात कही, लेकिन उसने मना कर दिया। रघुवर के मुताबिक रास्ते में उसे कब झपकी आई पता ही नहीं चला और यह घटना हो गई।
चालक को झपकी आने से हादसा हुआ है। हाईवे की सड़क नौ मीटर चौड़ी है। सड़क से करीब तीन-चार मीटर बाद ग्रिल लगी है। उनका दावा है कि ग्रिल लगाने में कोई कमी नही है। - अभय कुमार, इंजीनियर, एनएचएआई