गरीब भूखा पेट सोए और रोए... इन्हें फर्क नहीं पड़ता। ये तो अपना भरने में लगे हुए है। नए-नए तरीकों से सरकारी अनाज को ठिकाने लगाने के तरीके तलाश लेते हैं। घपलेबाजों का जाल ऐसा बिछ गया है कि इसे भेद पाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी ही घपलेबाजी का पर्दाफाश उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुआ है।
राशन माफियाओं ने सरकारी अनाज ठिकाने लगाने की निकाली नई तरकीब
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उन्नाव के सफीपुर में कोतवाली क्षेत्र की एक राइस मिल में सरकारी अनाज पकड़े जाने पर भेद खुला। पता चला कि राशन माफियाओं ने अब सरकारी अनाज ठिकाने लगाने की नई तरकीब निकाल ली है। इस मामले से पर्दा उठने पर सरकारी खाद्य महकमें की आंखे खुली की खुली रह गई।
सरकारी अनाज की छह हजार बोरियां पकड़ी
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शनिवार दोपहर खाद्य विभाग ने एक राइस मिल पर छापे में राशन के अनाज की छह हजार से अधिक बोरियां पकड़ी। इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी अनाज पकड़े जाने पर विभाग सतर्क हो गया है।
मिल संचालक से मांगे दस्तावेज तो नहीं मिला जवाब
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पकड़े गए राशन में गेहूं, चावल, धान मिला है। अधिकारी ने मिल संचालक से जब दस्तावेज दिखाने को कहा, तो वह कोई कागजात नहीं दिखा सका। डीएसओ ने राशन की कालाबाजारी की आशंका जताकर मुकदमा दर्ज कराने के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी है।
सफीपुर के रेलवे स्टेशन मार्ग पर श्याम सुंदर विनय कुमार राइस मिल है। शनिवार दोपहर करीब एक बजे जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) नसीम अख्तर ने टीम के साथ यहां छापा मारा। टीम के सदस्य मिल परिसर के अलग-अलग स्थानों पर पहुंचे तो कई कर्मचारी राशन की बोरियां काटते और अनाज के ढेर लगाते मिले। मिल के गोदाम में भी राशन की हजारों बोरियां मिलीं।
कालाबाजारी से सरकार को चूना
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जिला पूर्ति अधिकारी ने गिनती कराई तो 943 बोरी गेहूं, 1301 बोरी चावल और 4533 बोरी धान बरामद मिला। 25 बोरियां (नीले धागे से पैक) खुली और 10 सील पैक मिलीं। मौके पर मजदूर खाद्यान्न पैक करते भी मिले। डीएसओ ने राइस मिल के संचालक विनय गुप्ता से दस्तावेज दिखाने को कहा तो वह नहीं दिखा सके। डीएसओ ने बताया कि मामला कालाबाजारी का लग रहा है। डीएम के निर्देश पर दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।