कानपुर। महंगी कलाई घड़ी, चश्मा, जूता बेचने वालों पर भी सरकार ने नजर टेढ़ी कर दी है। 10 लाख से अधिक कीमत के लक्जरी उत्पादों की बिक्री पर एक फीसदी टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (टीसीएस) वसूलना और जमा करना होगा। यह व्यवस्था 22 अप्रैल से लागू कर दी गई है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि टीसीएस आयकर कानून की धारा-206सी के तहत लागू और प्रभावी की गई है। टीसीएस की जिम्मेदारी विक्रेता व्यापारी पर निर्धारित की गई है। व्यापारी को प्राप्त धनराशि में से टीसीएस की कटौती करनी होगी। नियमानुसार निर्धारित समय अवधि के भीतर सरकारी कोष में जमा करना होगा। टीसीएस के रिटर्न भी दाखिल किए जाएंगे। ये नियम कलाई घड़ी, पेंटिंग्स, मूर्तियां, प्राचीन वस्तुएं जैसे एंटीक स्क्लप्चर, संग्रहीत सिक्के व स्टांप, रोइंग बोट, कनोई, हेलीकॉप्टर, चश्मा, बैग, पर्स, फुटवियर में जूता, खेलकूद के पहनावे व उपकरण जैसे गोल्फ किट व होम थियेटर सिस्टम, ऐसे घोड़े जो हॉर्स रेसिंग में प्रयोग किए जा रहे हैं, पर लागू हैं। पोलो खेल में उपयोग में आ रहे घोड़ों की बिक्री पर टीसीएस की वसूली विक्रेता को करनी होगी।
वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि कानपुर में बड़े पैमाने पर मूल्यवान उत्पादों की खरीद-बिक्री होती है, लेकिन कर की अदायगी नहीं की जाती है। 10 लाख से अधिक कीमत वाले मूल्यवान लक्जरी उत्पादों पर टीसीएस से इन वस्तुओं की खरीद व बिकी के लेन-देन आयकर विभाग के दायरे में आ सकेंगे। आयकर विभाग का मानना है कि इससे अघोषित लेन-देन पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा। विभाग इनका सत्यापन भी कर रहा है।
आयकर अधिनियम की धारा 206 सी (एक, एच) के तहत ऐसे कारोबारी जिनका पिछले वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ से अधिक टर्नओवर था और उनकी ओर से किसी व्यक्ति से चालू वित्तीय वर्ष में 50 लाख से अधिक भुगतान प्राप्त किया गया है। इस स्थिति में कारोबारी की ओर से क्रेता व्यापारी से 50 लाख से अधिक की धनराशि पर 0.1 प्रतिशत की दर से टीसीएस वसूला जाता था। अब इस धारा को एक अप्रैल 2025 से खत्म कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से धारा 206सी (एक-एच) के तहत टीसीएस कटौती के प्रावधान समाप्त कर दिए गए हैं। हालांकि धारा 194 क्यू के प्रावधान प्रभावी रहेंगे, जिसके तहत किसी व्यक्ति से 50 लाख से अधिक की खरीद पर 0.1 प्रतिशत की दर से टीडीएस की कटौती की जाएगी। दरअसल धारा 206सी (एक-एच) और धारा 194 क्यू के प्रावधान एक ही जैसे थे। करदाताओं को धारा 206 सी (एक-एच) निष्प्रभावी होने से अतिरिक्त नियमों से राहत मिलेगी।