यूपी के हरदोई जिला अस्पताल परिसर में सरकारी शव वाहन खड़ा होने के बाद भी परिजनों को बेटी का शव ले जाने के लिए अस्पताल स्टाफ के सामने गिड़गिड़ाना पड़ा। आर्थिक तंगी के कारण रिश्तेदारों की मदद से किराये का वाहन कर परिजन बेटी का शव लेकर चले गए।
पचदेवरा थाना क्षेत्र के गौंटिया गांव निवासी रामनाथ भूमिहीन है। वह मजदूरी कर परिवार चलाता है। गुरुवार सुबह उसकी 13 वर्षीय बेटी सरोजनी गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय गंभीर रूप से झुलस गई थी। रामनाथ ने उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां पर उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने शव मोर्चरी मेें रखवा दिया। पैसे न होने के कारण दंपति रात में बेटी का शव नहीं ले जा सके।
शुक्रवार दोपहर एक बजे शहर कोतवाली पुलिस पंचनामा भरने पहुंची। पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिसकर्मियों ने पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने को कहा। आर्थिक तंगी के कारण वह बेटी का शव ले जाने को लेकर घंटों परेशान रहा। किसी भी कर्मचारी ने नि:शुल्क शव वाहन सेवा उपलब्ध होने की जानकारी नहीं दी। अस्पताल परिसर में सरकारी शव वाहन खड़ा रहा। लेकिन इसे उपलब्ध नहीं कराया गया। जब शव ले जाने के लिए प्राइवेट शव वाहन चालकों से बात की तो उन्होंने काफी दूरी का हवाला देकर 2400 रुपये किराया बताया।
बेटी का शव ले जाने के लिए परिजनों को हाथ फैलाने पड़े। इस पर कुछ रिश्तेदारों व अस्पताल में मौजूद लोगों की मानवता जाग उठी। उन्होंने किराया इकट्ठा कर प्राइवेट शव वाहन चालक को दिए। आर्थिक तंगी पर आंसू बहाते दंपति बेटी के शव का पोस्टमार्टम कराकर घर ले गए। सीएमएस डॉ. रामवीर सिंह ने बताया कि अस्पताल में अगर किसी की मौत होती है। उसके शव को घर तक भेजने के लिए नि:शुल्क शव वाहन सेवा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों ने इस संबंध में जानकारी दी होती तो शव वाहन उपलब्ध करा दिया जाता।