लखनऊ पुलिस कमिश्नर आईपीएस डीके ठाकुर, नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस आलोक सिंह
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नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुए एक साल पूरे हो गए हैं। कमिश्नरेट के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। पुलिस को अधिकार मिले तो कानून-व्यवस्था बेहतर हुई। अपराधियों पर नकेल कसने में आसानी हुई और महिला अपराध में भी कमी आई। दोनों शहरों में बीते कई वर्षों की अपेक्षा 2020 में हर तरह के अपराध में कमी दर्ज की गई। कानपुर और वाराणसी में कमिश्नरेट लागू करने का खाका शासन तैयार कर चुका है।
संगठित अपराध पर लगाम
नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस आलोक सिंह ने बताया कि कमिश्नरेट लागू होने से मजिस्ट्रियल पावर पुलिस को मिली। इससे शातिर अपराधियों पर गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की ज्यादा कार्रवाई कम समय में की गईं। इससे संगठित अपराध में कमी आई। धारा 144 लागू करने का अधिकार मिलने की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थित नहीं आई। आंदोलन हो या कोई अन्य गतिविधि अधिकार का इस्तेमाल कर धारा 144 लागू की गई। पहले इन सभी कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे वक्त जाया होता था और स्थितियां गंभीर हो जाती थीं।