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हाईटेक तरीके से गूगल मैप लगाएगा अनियमित कालोनियों पर अंकुश

Mon, 28 May 2018 10:56 AM IST
आदर्श त्रिपाठी, अमरउजाला कानपुर

सार

- एक मई 2016 तक प्रदेश में बनीं अनाधिकृत कालोनियों के निर्माणों की ली जाएगी सेटेलाइट इमेज
- गूगल मैप में इमेज की जाएगी सेव, समय-समय पर होगा मिलान
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डेमाे पिक
अनियमित कालोनियों पर अंकुश लगाने के लिए यूपी सरकार अब ऐसी कालोनियों की आसमान से निगरानी कराएगी। एक मई 2016 तक बनी अनाधिकृत कालोनियों की मई 2018 तक की स्थिति की सेटेलाइट इमेज को गूगल मैप पर सुरक्षित रखा जाएगा।
 
 
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समय-समय पर सुरक्षित रखे गए मैप से वर्तमान स्थिति का मिलान किया जाएगा। इससे निर्माण का पता चल सकेगा। इसके अलावा गूगल मैप पर सुरक्षित रखी गई तस्वीर भविष्य में कालोनी के नक्शे के रूप में भी काम करेगी। जिस अधिकारी के कार्यकाल में निर्माण हुए हैं, उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
बिना लेआउट स्वीकृत कराए प्रदेशभर में हजारों अनाधिकृत कालोनियां बना दी गई हैं। अधिकतर कालोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवर आदि की मूलभूत सुविधाओं नहीं हैं, जहां हैं भी तो मानकों के अनुरूप नहीं हैं। प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) नितिन रमेश गोकर्ण ने पिछले सप्ताह प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, जिलाधिकारियों को रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, लखनऊ के जरिए एक मई 2016 तक बसीं सभी अनधिकृत कालोनियों का गूगल मैप 15 दिन में तैयार करने का आदेश दिया है। शासनादेश के मुताबिक गूगल मैप के सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर वाली एक प्रति सील कर रख ली जाए। इसके अलावा एक-एक प्रति मंडलायुक्त/अध्यक्ष के साथ ही मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को उपलब्ध कराई जाए। प्रमुख सचिव ने विकास क्षेत्र को जोन में बांटने और इनमें तैनात प्रवर्तन अधिकारी को चार्ज छोड़ते-लेते समय गूगल मैप की हस्ताक्षरित प्रति अनिवार्य रूप से एक-दूसरे को देने के निर्देश दिए हैं। इससे यह पता चल सकेगा कि किसकी तैनाती के दौरान निर्माण हुए। संबंधित अधिकारी की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि में भी अनिवार्य रूप से टिप्पणी अंकित की जाएगी।

 
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यह होगा फायदा

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- नई अनाधिकृत कालोनियों के विस्तार पर रोक लगेगी। 
- 2016 के बाद की बसीं कालोनियों की पहचान हो सकेगी।
- भविष्य मेें यदि इन कालोनियों का नियमितीकरण होता है तो पुरानी कालोनियों को वरीयता दी जाएगी, ऐसे में पुरानी कालोनियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। 
- कब्जेदार सालों पुराना निर्माण होने का झूठा दावा नहीं कर सकेगा। 

 
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केडीए में जारी है इस तकनीक से निगरानी

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डेमाे पिक
केडीए के विकास क्षेत्र में 152 अवैध कालोनियां हैं। केडीए ने इस साल की शुरुआत में शहर के अवैध निर्माणों की आकाशीय निगरानी शुरू करा दी है। नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, लखनऊ के जरिए केडीए ने इसरो से सेटेलाइट इमेज वाली दो सीडी ली थीं। केडीए वीसी सौम्या अग्रवाल ने बताया कि प्राधिकरण ड्रोन के जरिए प्रत्येक माह निर्धारित तारीख पर विभिन्न कालोनियों की तस्वीरें लेता हैं। दोनों तस्वीरों के मिलान से नए निर्माण की जानकारी मिल जाती है।
केडीए के विकास क्षेत्र में 152 अवैध कालोनियां हैं। केडीए ने इस साल की शुरुआत में शहर के अवैध निर्माणों की आकाशीय निगरानी शुरू करा दी है। नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, लखनऊ के जरिए केडीए ने इसरो से सेटेलाइट इमेज वाली दो सीडी ली थीं। केडीए वीसी सौम्या अग्रवाल ने बताया कि प्राधिकरण ड्रोन के जरिए प्रत्येक माह निर्धारित तारीख पर विभिन्न कालोनियों की तस्वीरें लेता हैं। दोनों तस्वीरों के मिलान से नए निर्माण की जानकारी मिल जाती है।
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