डेमाे पिक
समय-समय पर सुरक्षित रखे गए मैप से वर्तमान स्थिति का मिलान किया जाएगा। इससे निर्माण का पता चल सकेगा। इसके अलावा गूगल मैप पर सुरक्षित रखी गई तस्वीर भविष्य में कालोनी के नक्शे के रूप में भी काम करेगी। जिस अधिकारी के कार्यकाल में निर्माण हुए हैं, उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
बिना लेआउट स्वीकृत कराए प्रदेशभर में हजारों अनाधिकृत कालोनियां बना दी गई हैं। अधिकतर कालोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवर आदि की मूलभूत सुविधाओं नहीं हैं, जहां हैं भी तो मानकों के अनुरूप नहीं हैं। प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) नितिन रमेश गोकर्ण ने पिछले सप्ताह प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, जिलाधिकारियों को रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर, लखनऊ के जरिए एक मई 2016 तक बसीं सभी अनधिकृत कालोनियों का गूगल मैप 15 दिन में तैयार करने का आदेश दिया है। शासनादेश के मुताबिक गूगल मैप के सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर वाली एक प्रति सील कर रख ली जाए। इसके अलावा एक-एक प्रति मंडलायुक्त/अध्यक्ष के साथ ही मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को उपलब्ध कराई जाए। प्रमुख सचिव ने विकास क्षेत्र को जोन में बांटने और इनमें तैनात प्रवर्तन अधिकारी को चार्ज छोड़ते-लेते समय गूगल मैप की हस्ताक्षरित प्रति अनिवार्य रूप से एक-दूसरे को देने के निर्देश दिए हैं। इससे यह पता चल सकेगा कि किसकी तैनाती के दौरान निर्माण हुए। संबंधित अधिकारी की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि में भी अनिवार्य रूप से टिप्पणी अंकित की जाएगी।