यूपी के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृत्रिम बारिश कराने के लिए आईआईटी कानपुर को 15 लाख रुपये मिले हैं। यह धनराशि उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने दी है। कृत्रिम बारिश के लिए इंस्टीट्यूट स्तर पर काम शुरू हो गया है।
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कानपुर आईआईटी
पिछले दिनों आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने निदेशक से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की मदद के लिए खाका तैयार करने के लिए कहा था।
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कृत्रिम बारिश की तकनीक विकसित करने के लिए भी आईआईटी निदेशक को जिम्मेदारी दी थी। निदेशक प्रो. करंदीकर ने सिविल, मैकेनिकल, एयरोस्पेस, केमिकल और अर्थ साइंस विभागों को मिलकर इसपर काम करने के लिए कहा है।
बताया कि कृत्रिम बारिश कई चरणों में होती है। पहले चरण में कैल्शियम ऑक्साइड, कैल्शियम क्लोराइड और यूरिया का प्रयोग करते हुए हवा को वायुमंडल के सबसे ऊपरी सतह पर भेजा जाता है, जिससे कृत्रिम बादल बनता है। ये बादल हवा में मौजूद पानी को सोखने लगते हैं। इसके बाद अमोनियम नाइट्रेट, यूरिया सहित कुछ अन्य केमिकल का प्रयोग करके पानी की मात्रा बादल में बढ़ाई जाती है। यह सब प्रक्रिया एयरक्राफ्ट और ड्रोन की मदद से पूरी की जाती है।