केस: एक
पत्र में जिसे मामले का मास्टर माइंड बताया गया है, वह मसवानपुर लोहे वाले पुल के पास रहता है। घर के बाहर उसके बुजुर्ग पिता बैठे मिले। बेटे के बारे में पूछने पर बताया कि करीब चार दिन पहले वह सुल्तानपुर स्थित गांव चला गया है। पिछले एक साल से सऊदी में रहकर वेल्डिंग का काम करता था। दो फरवरी को लौटकर आया है। चार साल पहले उसका निकाह हुआ था। कोई संतान नहीं है। विवाद के कारण उसकी पत्नी मायके में रहती है।
केस: दो
पत्र में मसवानपुर में रहने वाले जिस दूसरे शख्स का नाम है, उनकी के घर के नीचे टेलीकॉम (पत्र में भी बताई गई) की दुकान थी, जो मोहल्ले में काफी चर्चित थी। हाल में उस दुकान को किराये पर उठा दिया गया है। वे अपने घर पर नहीं मिले, लेकिन उन्होंने फोन पर बात कर बताया कि वह सपा से पार्षदी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। बताया कि करीब एक माह पूर्व (पत्र वायरल होने से पहले) सचेंडी पुलिस उनसे इसी सिलसिले में पूछताछ कर चुकी है।
केस: तीन
पत्र में मसवानपुर में रहने वाले एक कांग्रेसी नेता का भी नाम है। आरोप है कि उन्होंने सभी को संरक्षण देने का दावा किया था। उनका घर भी मिला, लेकिन वे अपने घर पर नहीं थे। बहन ने बताया कि किसी जरूरी काम से बाहर गए हैं। फोन पर हुई बात में जानकारी दी कि करीब डेढ़ माह पहले पुलिस ने कुछ नामों के संबंध में पूछताछ की थी। इसके बाद से कोई संपर्क नहीं किया।
केस: चार
चौथा व्यक्ति की पान मसाले की दुकान रोड पर ही है। दुकान पर उनके छोटे भाई की पत्नी मिली। उन्होंने बताया कि जेठ और उनके पति दोनों पहले दुकान संभालते थे। अब प्राइवेट नौकरी करने लगे हैं। इसके चलते उनसे अभी मुलाकात नहीं हो सकती।
वायरल पत्र में बताए गए लोगों की पड़ताल के लिए टीम लगाई गई है। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। जल्द ही पत्र की सच्चाई सामने आएगी।- बीपी जोगदंड, पुलिस कमिश्नर, कानपुर