फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बकरा बाजार में मंदी, आज तेजी की उम्मीद

Fri, 01 Sep 2017 01:43 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन
बकरा बाजारों में पिछले साल के जैसी रौनक नहीं है। शहर में सबसे बड़ा बकरा बाजार नई सड़क पर लगा है। यहां बकरों के दामों में गिरावट और खरीददारों की संख्या में कमी है। बकरा बेचने वाले कारोबारी इसके पीछे कई वजहें बता रहे हैं। उनका कहना है कि सूबे के ज्यादातर अवैध स्लॉटर हाउस बंद होने और मीट दुकानों पर लाइसेंस की शर्त लगाने का असर पड़ा। ग्रामीण इलाकों में बकरा पालन करने वाले किसानों के बकरे ज्यादा नहीं बिके। ऐसे में अब ग्रामीण बकरीद में इन्हें दाम कम कर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। कुर्बानी कराने वाला दुकानदार वर्ग जीएसटी से प्रभावित होने की वजह से सस्ते बकरे खरीद रहा है। तमाम तो ऐसे हैं, जो इस बार बकरों की कुर्बानी न कराकर मदरसों व अन्य जगहों से बड़े जानवरों की कुर्बानी में हिस्सा ले रहे हैं, क्योंकि इसमें एक हजार रुपये में कुर्बानी हो जाती है। शुक्रवार रात तक बकरा मार्केट में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है।
विज्ञापन


पिछले साल की अपेक्षा मार्केट डाउन
बिधूना के किशनपाल 12 बकरे लेकर मंगलवार को आए थे। अभी तक उनके पांच बकरे ही बिक सके हैं। कहते हैं कि मार्केट डाउन है। बकरीद के एक दिन पहले रात में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इस बाजार में कन्नौज, फर्रुखाबाद, बिल्हौर, घाटमपुर, उन्नाव समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों से बकरे बिकने आते हैं। घाटमपुर के रईस अहमद, चौरा के रामविलास ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा मार्केट काफी डाउन है।

पांच हजार से 60 हजार रुपये तक बकरे
आम तौर पर लोग 12 से 15 हजार रुपये तक के बकरे खरीद रहे हैं। वैसे तो नई सड़क, बाबूपुरवा और जाजमऊ बकरा बाजार में पांच हजार से 60-80 हजार रुपये तक के बकरे हैं। कोई खास या बहुत ज्यादा महंगा बकरा है तो उसे लोग बाजार के अलावा व्यक्तिगत तौर पर घर जाकर संपन्न मुस्लिमों को बेच रहे हैं।
विज्ञापन


बकरा बेचने में ठगी का खेल
बकरा बेचने के लिए ठगी का खेल भी जारी है। बकरों को बेसन का घोल पिलाकर उनको फुलाकर मोटा ताजा दिखाकर रुपये ऐंठे जा रहे हैं। इसके अलावा बकरों को भैंस का दूध, चना देने के साथ-साथ शैंपू से नहलाकर उनके बालों को चिकना बनाकर आंखों में धूल झोंकने का खेल चल रहा है। केमिकल रंगों का इतेमाल कर बकरों पर ‘अल्लाह-मुहम्मद’ की उर्दू में प्रतिकृति उकेरकर महंगा बेचने की कोशिश करने वालों से भी सावधान रहने की जरूरत है। शहरकाजी मौलाना रियाज अहमद हशमती ने बताया कि किसी जानवर में अगर अल्लाह मुहम्मद का नाम लिखकर बेचा गया तो कुर्बानी कराने वाले के सवाब में इस वजह से कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी। बल्कि धोखा करके जानवरों को बेचने वाला पाप का भागीदार जरूर होगा।
विज्ञापन


-बकरा बाजार में मंदी, आज तेजी की उम्मीद
-स्लॉटर हाउस बंदी और मीट दुकानों पर लाइसेंस की शर्त का पड़ा असर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें