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रिजर्व बैंक ने छिपाई थी एनपीए की सूचना

Sat, 09 Apr 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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अारबीअाई
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प्रदीप अवस्थी
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कानपुर। ब्रह्मावर्त बैंक में सालों तक होती रही अनियमितता और लगातार बढ़ते एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) के पीछे रिजर्व बैंक की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि रिजर्व बैंक समय पर सचेत हो जाता तो ब्रह्मावर्त बैंक में हजारों खाताधारकों के करोड़ों रुपये नहीं फंसते। ब्रह्मावर्त में बढ़ रही गड़बड़ियों के बावजूद रिजर्व बैंक की अनदेखी पर एजेंटों और कुछ खाताधारकों ने सूचना का अधिकार अधिनियम का सहारा लिया था लेकिन शीर्ष बैंक ने गोपनीयता का हवाला देकर न तो बैंक से संबंधित सूचना दी और न ही कोई कार्रवाई की।
शहर के आरटीआई कार्यकर्ता एवं एडवोकेट अश्विनी दीक्षित ने वर्ष 2012 में रिजर्व बैंक से सूचना मांगी थी कि वर्ष 2005 से 2011-12 तक साल दर साल ब्रह्मावर्त बैंक का एनपीए बताया जाए। इसके अलावा सीएसआर (कैश रिजर्व रेशियो) और एसएलआर (स्टेच्युअरी लायबिलिटी रेशियो) की प्रतियां भी उपलब्ध करवाई जाएं। यह भी पूछा कि सकल संपत्ति के सापेक्ष इसका एनपीए कितना प्रतिशत है। इसके जवाब में बैंक ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8 (1) का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रकार की सूचना नहीं देने के लिए छूट प्राप्त है। चूंकि यह धारा वित्तीय संस्थान की गोपनीयता बरकरार रखने का हवाला देती है। इस वजह से रिजर्व बैंक ने इसकी आड़ लेते हुए सूचना देने से इनकार किया।
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मंशा पर सवाल
गोपनीयता के नाम पर सूचना न देना अलग मसला है और किसी बैंक का एनपीए लगातार बढ़ते रहने के बाद भी उस पर अंकुश न लगाया जाना अलग। आरटीआई कार्यकर्ता ने इन्हीं बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं कि आखिरकार रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने ब्रह्मावर्त बैंक का एनपीए इतना क्यों बढ़ जाने दिया? रिजर्व बैंक यदि समय पर सचेत रहता तो बैंक के हजारों खाताधारकों का पैसा नहीं फंसा होता।
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बैंक प्रबंधन पर हो सकती है रिपोर्ट
पिछले नौ माह से वित्तीय लेनदेन ठप होने की वजह से बैंक के एजेंट सड़क पर आ गए हैं। बैंक के करीब 50 एजेंटों में 20 ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन एजेंटों ने बताया कि वह कुछ एजेंट व्यक्तिगत तौर पर इस मसले को लेकर हाईकोर्ट गए हैं। लेकिन वह बैंक प्रबंधकों पर आर्थिक अपराध के तहत मामला दर्ज कराएंगे। इसके लिए वकीलों से बात हो रही है। एजेंटों ने बताया कि बैंक की वजह से खाताधारकों के बीच उनकी साख गिर गई। खाताधारक अक्सर उनसे झगड़ा भी करते हैं।
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