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डिग्री पाकर चहके आईआईटियंस

Tue, 28 Jun 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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उन्नत जैन को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल देते अध्यक्ष्‍ा संचालक मंडल आरसी भार्गव व निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना। - फोटो : amarujala
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कानपुर। आईआईटी के  49वें दीक्षांत समारोह में डिग्री पाकर पीजी स्टूडेंटों के चेहरे खिल उठे। देश और समाज के लिए काम करने के इरादे के साथ-साथ स्टूडेंटों ने डिग्री मिलने की खुशी में देर शाम तक जश्न मनाया। हवा में टोपी लहराकर स्टूडेंटों ने जब हिप-हिप-हुर्रे बोला तो परिवार के सदस्यों ने ताली बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। इस मौके पर भारत रत्न से सम्मानित प्रो. सीएनआर राव ने भी स्टूडेंटों को शुभकामना दी।  
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आईआईटी के पहले चरण के दीक्षांत समारोह का उद्घाटन यूनिवर्सिटी ऑफ बफलो के प्रेसीडेंट प्रो. सतीश कुमार त्रिपाठी, बीओजी चेयरमैन डॉ. आरसी भार्गव और निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया। इसके बाद पीएचडी, एमटेक, एमबीए, एमडैस, एमएससी (दो वर्षीय), एमएससी (पांच वर्षीय), एमएस और वीएलएफएम के 1247 स्टूडेंटों को डिग्री और मेडल देकर सम्मानित किया गया। इसमें 1042 लड़के और 205 लड़कियां शामिल रहीं। समारोह करीब साढ़े चार घंटे तक चला। स्टूडेंटों की हर उपलब्धि पर तालियां बजीं। इसके गवाह स्टूडेंटों के माता-पिता और परिजन भी बने। समारोह के समापन बाद स्टूडेंटोें ने आॅडिटोरियम ग्राउंड में जश्न मनाया। दोस्त और परिवार के साथ फोटो लिए। सबने कहा कि अब बेहतर भविष्य की शुरुआत करेंगे। देश और समाज के लिए काम करना है।
रूबिया को मिला केडेन्स गोल्ड मेडल
कानपुर (ब्यूरो)। आईआईटी से मैटेरियल साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में एमटेक करने वाली जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले की रूबिया हसन ने अलगाववादियों को आईना दिखाया है। सामाजिक बंधन को तोड़ कर पढ़ाई की और अब विदेश से पीएचडी करने का इरादा है। बेस्ट परफारमेंस के बाद भी रूबिया ने जॉब ऑफ स्वीकार नहीं किया। आईआईटी के दीक्षांत समारोह मेें सोमवार को रूबिया हसन को केडेन्स गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। यह सर्वश्रेष्ठ खिताब होता है। एनआईटी श्रीनगर से बीटेक (88 फीसदी) करने वाली रूबिया कहती हैं कि घाटी की लड़कियां बुद्धिमान हैं, फिर भी सामाजिक भेदभाव पढ़ाई में बाधा डाल रहा है। पढ़ने की आजादी नहीं है। हमारा परिवार (पिता गुलाम हसन बट रिटायर टीचर), मां जोहेरा बानो, चार भाई और दो बहन) पढ़ा-लिखा है, इसलिए सामाजिक भेदभाव आड़े नहीं आया। विवाद को लेकर पिछले दिनों चर्चा में आए एनआईटी श्रीनगर के मुद्दे पर रूबिया ने कहा इसमें कुछ नया नहीं है। भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी किक्रेट मैच होता है, तभी विवाद होता है। इस बार इसे तूल दे दिया गया। रूबिया ने राजनीति से संबंधित सवालों का जवाब नहीं दिया लेकिन इतना जरूर कहा कि घाटी के लोगों का दर्द समझने में सब नाकाम हैं। इसी का नतीजा है कि अशिक्षा, बेरोजगारी बढ़ी है। 
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151 रिसर्च स्कॉलर को पहली बार डिग्री
पहली बार आईआईटी के 151 पीएचडी स्कॉलर को डिग्री मिली है। इससे पहले अधिकतम 105 को डिग्री दी गईं थी। इस बार एमटेक के 64, एमबीए के 34, एमडैस के 37, एमएससी दो वर्षीय के 125, एमएससी पांच वर्षीय के 21, एमएस के 76 और वीएलएफएम के 39 स्टूडेंटोें को डिग्री दी गई।  
सना खान को अवार्ड
अर्थ साइंस की सना खान को बेस्ट एमटेक थीसिस के लिए डॉ. विश्वनाथ वाजपेयी मेमोरियल गोल्ड मेडल मिला है। यह अवार्ड डॉ. विश्वनाथ वाजपेयी की स्मृति में दिया गया। डॉ. विश्वनाथ आईआईटी के छात्र थे। कुछ साल पहले उनका निधन हो गया था। उन्हीं की याद में पत्नी इला वाजपेयी ने सम्मान दिलाने का सिलसिला शुरू किया।
पारंपरिक वेशभूषा में छात्राएं
आईआईटी से पीएचडी और एमटेक करने वाली छात्राएं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं। ज्यादातर छात्राएं साड़ी पहनकर मंच पर पहुंचीं और डिग्री प्राप्त की। यह देखकर लोगों ने लड़कियों को शाबाशी भी दी।
उन्नाव के उदित ने बढ़ाया मान
उन्नाव के उदित सिंह ने भी एमटेक की डिग्री हासिल करके मां ऊषा रानी का मान बढ़ाया। आईआईटी में एडमिशन से पहले ही उदित के पिता जगन्नाथ वर्मा (सरकारी अधिवक्ता) का निधन हो गया था। इससे छह महीने तक पढ़ाई बाधित रही। इसके बाद उदित ने खुद को संभाला। उदित को जॉब ऑफर मिल चुका है। आगे पीएचडी करने का इरादा है।
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