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रेलवे ने इस देश की तकनीकी पर दिखाया है भरोसा, इन दिक्कतों से मिलेगी निजात

Sat, 28 Oct 2017 10:50 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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ट्रेनों की लेटलतीफी, निरस्तीकरण जैसी तमाम समस्याओं से निजात पाने को उत्तर मध्य रेलवे ने नई जर्मन तकनीक अपनाई है। एनसीआर यानी उत्तर मध्य रेलवे के अधीन आने वाले सभी स्टेशनों के प्लेटफार्मों को अब वॉशेबल अप्रेन बनाया जाएगा।
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  कानपुर सेंट्रल के सारे प्लेटफार्म वाशेबल अप्रेन हैं। वाशेबल अप्रेन में स्लीपर के नीचे का जाल कंक्रीट का होता है। जबकि आम तौर पर कच्ची जमीन होती है। कंक्रीट का जाल बनाकर स्लीपर के बीच गड्ढे नहीं होते हैं। इससे पानी निकासी होती है। प्लेटफार्म साफ रहते हैं। बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या खत्म हो जाती है। रेडा तकनीकी से बने वाशेबल अप्रेन पर ट्रेनें 50 किमी प्रति घंटा की स्पीड से गुजर सकती हैं। जबकि आम प्लेटफार्म के ट्रैक से औसत स्पीड 30 किमी प्रति घंटा होती है। इसकी औसत आयु भी 15 वर्ष से बढ़कर 40 वर्ष हो जाती है। मरम्मत की जरूरत नहीं होती है।      
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जर्मन तकनीकी रेडा का प्रयोग शुरू

डेमो पिक
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों को वॉशेबल एप्रन में बदलने पर दो महीनों का समय नहीं लगेगा। रेलवे ने जर्मन तकनीकी रेडा का प्रयोग शुरू किया है। इसके तहत एक से सवा महीने के बीच वॉशेबल प्लेटफार्म का निर्माण हो जाएगा। इससे दो महीनों के लिए ट्रेनों का निरस्तीकरण, रूट डायवर्जन, आंशिक निरस्तीकरण से होने वाली यात्रियों की परेशानियों में कमी आएगी। इस तकनीकी का सफल प्रयोग टूंडला रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म को वॉशेबल एप्रन बनाने में किया गया है। 650 मीटर लंबे प्लेटफार्म का काम 42 दिनों में पूरा कर लिया गया। जबकि इसमें कम से कम 60 दिनों का समय लगना था।
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