ट्रेनों की लेटलतीफी, निरस्तीकरण जैसी तमाम समस्याओं से निजात पाने को उत्तर मध्य रेलवे ने नई जर्मन तकनीक अपनाई है। एनसीआर यानी उत्तर मध्य रेलवे के अधीन आने वाले सभी स्टेशनों के प्लेटफार्मों को अब वॉशेबल अप्रेन बनाया जाएगा।
कानपुर सेंट्रल के सारे प्लेटफार्म वाशेबल अप्रेन हैं। वाशेबल अप्रेन में स्लीपर के नीचे का जाल कंक्रीट का होता है। जबकि आम तौर पर कच्ची जमीन होती है। कंक्रीट का जाल बनाकर स्लीपर के बीच गड्ढे नहीं होते हैं। इससे पानी निकासी होती है। प्लेटफार्म साफ रहते हैं। बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या खत्म हो जाती है। रेडा तकनीकी से बने वाशेबल अप्रेन पर ट्रेनें 50 किमी प्रति घंटा की स्पीड से गुजर सकती हैं। जबकि आम प्लेटफार्म के ट्रैक से औसत स्पीड 30 किमी प्रति घंटा होती है। इसकी औसत आयु भी 15 वर्ष से बढ़कर 40 वर्ष हो जाती है। मरम्मत की जरूरत नहीं होती है।