देश में पहली बार काइमरिक स्टेम सेल थैरेपी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में दी जाएगी। इस थैरेपी से लाइलाज माने जाने वाले आनुवांशिक रोगों का इलाज संभव हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। इस थैरेपी में रोगी की स्टेम सेल को उसके माता-पिता या सगे भाई-बहन की स्टेम सेल के साथ कल्चर कर काइमरिक सेल बनाई जाती है। इसे रोगी को दिया जाता है। यह इलाज जीन थैरेपी की तुलना में बहुत सस्ता होता है।
आम रोगी इसका खर्च वहन कर सकता है। कॉलेज ने काइमरिक सेल बनाने वाली लैब से बात कर ली है। अभी तक 30 रोगियों ने थैरेपी के लिए बुकिंग कराई है। काइमरिक सेल थैरेपी अभी अमेरिका में दी जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में स्टेम सेल के इस नए रूप काइमरिक सेल से पहली बार इलाज किया जाएगा। काइमरिक थैरेपी न्यूरो मस्कुलर डिस्ऑर्डर, स्पाइन मस्कुलर डिस्ऑर्डर, लिंब गर्डल मस्कुलर डिस्ऑर्डर, मोटर न्यूरॉन डिजीज आदि रोगों में दी जाएगी।