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अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंचे घर में रहते थे सिंहानिया, उसके होेंगे शुक्रगुजार जो करेगा ये काम

Sat, 12 Jan 2019 12:30 AM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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हिन्दुस्तान के प्रमुख कारोबारी समूह रेमंड ग्रुप के प्रमोटर और चेयरमैन गौतम हरि सिंघानिया और उनके पिता विजयपत सिंघानिया के बीच चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है।  गौतम ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वह उस व्यक्ति के शुक्रगुजार रहेंगे जो उनके पिता को उनके साथ रहने को राजी कर सके। 'वह मेरे पिता हैं, 81 साल के हो चुके हैं। अगर मैं उनका ख्याल नहीं रखूंगा तो कौन रखेगा?' भविष्य की योजनाओं पर बोलते हुए गौतम ने कहा कि 'मैं रेमंड को एक मॉडल कंपनी बनाना चाहता हूं। रेमंड परिवार द्वारा संचालित कंपनी है, मेरे बच्चे अभी छोटे हैं और मेरी जिम्मेदारी अपने शायरहोल्डर्स के प्रति है।'
आगे पढ़ेंः-- कानपुर में बीता बचपन, जीएनके में पढ़े थे...

 
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विजयपत बाबू का बचपन कानपुर शहर में गंगा किनारे स्थित अपने घर ‘गंगाकुटी’ (कैंट) में बीता। संयुक्त परिवार में इनका पालन पोषण हुआ। सिविल लाइंस स्थित गुरुनारायण (जीएनके) खत्री इंटर कालेज से पढ़े। इसके बाद पिता के साथ रहने मुंबई चले गए। वहां 36 मंजिला ऊंचे भव्य घर में रहने के बावजूद कानपुर को नहीं भूले। परिवार के सदस्यों के बुलावे पर या फिर जब भी मन हुआ, त्योहारों में शहर आते रहे। जब भी शहर आए, परमट में आनंदेश्वर बाबा के दर्शन जरूर किए।

 
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1925 में बनी रेमंड कंपनी
1958 में मुंबई में खुला पहला शोरूम
1980 में संभाली रेमंड कंपनी की कमान
1986 में रेमंड का प्रीमियम ब्रांड पार्क एवेन्यू लॉन्च किया
1990 में देश के बाहर ओमान में कंपनी का पहला विदेशी शो रूम खोला

 

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ये हैं सिंघानिया के कारनामे
- 24 दिन में पूरी की 34 हजार किलोमीटर की उड़ान
- 67 साल की उम्र में सबसे ऊंचाई पर उड़ाया हॉट एयर बैलून
- ऊंचाई पसंद थी इसीलिए बनवाया 36 मंजिला घर
- मुकेश अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंचे घर पर रहे 

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विजयपत सिंघानिया रेमंड समूह के संस्थापक हैं और उन्हें बीते साल अक्टूबर में रेमंड समूह के अवकाशप्राप्त अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। विजयपत सिंघानिया ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बेटे गौतम को 37% हिस्सेदारी गिफ्ट कर दी थी, जिसकी कीमत 1000 करोड़ रुपये थी, इसके बाद गौतम ने उन्हें जेके हाउस में डुप्लेक्स देने से इनकार कर दिया और उनके साथ बुरा बर्ताव किया।  अपने पिता के साथ इन दिनों विवाद का सामना कर रहे रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया अपने पिता विजयपत सिंघानिया के साथ सभी मसलों पर बैठकर बात करना चाहते हैं। उन्होंने अपने पिता को अपने साथ रहने का भी ऑफर दिया है।
 
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पिता के साथ चल रहे विवादों पर सफाई देते हुए कहा है कि अगर कोई ये सोचता है कि उन्होंने अपने पिता को निकाल दिया है, तो वो गलत है। उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें कई बार ऑफर दिया कि आइए और मेरे साथ रहिए.' एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक गौतम सिंघानिया ने कहा, 'वे मेरे पिता हैं और 81 साल के हैं. अगर मैं उनकी देखभाल नहीं करूंगा तो कौन करेगा? कई लोगों ने उन्हें मेरे साथ लाने की कोशिश की, लेकिन वे नाकामयाब रहे'
 
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गौतम के मुताबिक परिवार द्वारा स्थापित कंपनियों में स्वामित्व बेटे या बेटी को नहीं मिलनी चाहिए बल्कि वारिस के काबिलियत पर संचालन दिया जाना चाहिए वरना कंपनी को प्रोफेशनली चलाया जाना चाहिए। रेमंड के सीएमडी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के कुछ दिनों बाद बात कर रहे थे। कोर्ट ने उनके पिता विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा 'द इनकंप्लीट मैन' (एक अधूरा आदमी) के खिलाफ आदेश देने से इंकार कर दिया था।

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कहा जाता है कि 2015 में विजयपत सिंघानिया ने कंपनी का स्वामित्व और अपने शेयर बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दिए थे। विजयपत सिंघानिया के मुताबिक उन्हें कंपनी से अलग करने के साथ-साथ फ्लैट से भी हटा दिया गया था। गौतम ने कहा कि मैं तीन साल तक अपने पिता के सम्मान के लिए चुप रहा।

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अब वो एक किताब लिख रहे हैं और इसमें ज्यादातर चीजें मेरे खिलाफ ही होंगी। किताब में 95% उनकी कल्पना होगी। साथ ही रेमंड के सीएमडी ने कहा कि अगर मेरे पिता को कोई समस्या है तो हम बैठकर सभी मसलों पर बात कर सकते हैं, किताब क्यों लिखना? अगर उन्हें कोई समस्या ना हो तो मैं बैठकर बात करने को तैयार हूं।
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उन्होंने कहा कि भगवान ने मुझे सबकुछ दिया है, मुझे किसी से कोई समस्या नहीं। मगर मुझे ऐसी चीजें करने को मत कहिये जो करना मेरे लिए संभव न हो। गौतम ने यह भी कहा कि मैं यह चाहूंगा कि ऐसी समस्या मेरे और मेरी बेटियों के बीच कभी न हो। 
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