गौरव सिंह चंदेल हत्याकांड में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश खुलेआम घूमते रहे। मॉल में जाकर शॉपिंग की और लूट की कार से नंबर प्लेट हटा फर्राटा भरते रहे, लेकिन पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी।
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फोरेंसिक टीम व डॉग स्क्वॉड ने कार की छानबीन की। नोएडा के एक मॉल में की गई शॉपिंग की पर्चियां गौरव की कार से मिलीं। पर्चियों पर जो तारीख लिखी है, वह हत्याकांड के बाद की हैं। साफ है कि हत्यारे वारदात को अंजाम देने के बाद मॉल गए थे। ड्राइवर साइड की खिड़की के पास पान मसाले का रैपर मिला है।
कार पर धूल भी जमी थी, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि कार को कहीं खड़ा रखा गया था। पुलिस का कहना है कि जिस जगह कार मिली, वह हापुड़ रोड से करीब एक किमी दूर अंदर की तरफ है। तीन मोड़ पार करने के बाद उस स्थान पर पहुंचा जा सकता है। कार लेकर आए हत्यारों को आकाश नगर के रास्तों की जानकारी थी। लिहाजा, अंदेशा है कि हत्याकांड में कोई स्थानीय व्यक्ति शामिल हो सकता है।
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आखिर कहां थी पुलिस
कार की अगली नंबर प्लेट टूटी है, जबकि पिछली नंबर प्लेट गायब है। ग्रेटर नोएडा में वारदात के बाद कार गाजियाबाद तक पहुंच गई। बड़ा सवाल यह है कि बिना नंबर की सेल्टॉस कार सड़क पर दौड़ती रही। उस वक्त नोएडा व गाजियाबाद पुलिस कहां थी। कार को तिगरी गोल चक्कर से लाया गया है तो कार को नोएडा के फेज-थ्री, बिसरख तथा गाजियाबाद के विजयनगर, कविनगर, मसूरी थानाक्षेत्र से होकर निकाला गया होगा, लेकिन पुलिस को कुछ पता नहीं लगा।
चार रास्तों पर लगे सीसीटीवी पर फोकस
मसूरी में कार बरामद होने के बाद पुलिस चार रास्तों पर फोकस कर रही है। इन रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। इन रास्तों में एनएच-24, नोएडा से गौड़ सिटी होते हुए क्रॉसिंग से डासना मसूरी, बुलंदशहर से डासना और मेरठ-हापुड़ रोड शामिल हैं। पुलिस आशंका जता रही है कि इन रास्तों से गुजरकर ही बदमाश आकाश नगर पहुंचे। एनएच-24 पर छिजारसी टोल पर भी लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
गुमराह भी कर सकते हैं बदमाश
दिल्ली, गुरुग्राम , फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, मेरठ से लेकर बागपत तक के बदमाशों पर पुलिस की नजर है। इसके लिए 351 सक्रिय बदमाशों की सूची भी बनाई गई है। पुलिस आशंका जता रही है कि कहीं दूसरे जगह के बदमाशों ने तो आकाश नगर में लाकर कार खड़ी नहीं कर दी, ताकि पुलिस का फोकस डासना, मसूरी के बदमाशों पर हो जाए और असली बदमाश पुलिस के रडार से दूर हो जाएं।
हद है! लापरवाही पर लापरवाही करती रही गाजियाबाद पुलिस
रात में ही क्यों नहीं की पड़ताल
गाजियाबाद पुलिस अगर सूचना को गंभीरता से लेकर कार के पार्किंग स्टीकर की पड़ताल रात में ही कर लेती, तो नाकाबंदी कर बदमाशों को पकड़ा जा सकता था। सुबह होने पर पुलिस सक्रिय हुई और करीब 10 घंटे बाद नोएडा पुलिस को सूचना दी गई।
15 घंटे बाद कार को घेरा गया
बेहद संवेदनशील मामला होने के कारण फोरेंसिक टीम को फिंगर प्रिंट व अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने थे, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। मंगलवार रात 11 बजे पुलिस पहुंच चुकी थी। बुधवार सुबह से ही लोग कार को छूकर देखते रहे। दोपहर करीब दो बजे पुलिस ने कार के आसपास टेप लगाकर घेरा बनाया। लगभग 15 घंटे तक कार बिना घेरे के खड़ी रही।