मान्यता है कि गंगाजल में कभी कीड़े नहीं पड़ते हैं लेकिन औद्योगिक इकाइयों और गंदे नालों का कचरा लगातार गंगा में गिरने की वजह से गंगा में लाल रंग के कीड़े पाए गए हैं। इन कीड़ों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कानपुर का गंगाजल अब पीने लायक नहीं रहा है। जलकल विभाग के महाप्रबंधक ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) को पत्र लिखकर इस समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाई है। पीसीबी का कहना है कि गंगा जल काला और लाल होने की बात तो पहले आई थी, लेकिन लाल रंग के कीड़े आना बहुत गंभीर बात है। गुरुवार से जांच कराई जाएगी।
कीड़े कई दिनों से आ रहे हैं
कानपुर में गंगा की ये है हालत
एनजीटी में गंगा में नालों से और टेनरियों के जरिये जा रहे कचरे को रोकने पर पिछले तीन दिन से बहस चल रही है। इस बीच बिठूर के रास्ते गंगा बैराज होते हुए भैरोघाट के पंपिंग स्टेशन तक गंगा में बड़ी मात्रा में लाल रंग के कीड़े पाए गए हैं। कहा जा रहा है कि कीड़े कई दिनों से आ रहे हैं, लेकिन अब इनकी संख्या बहुत ज्यादा हो गई है।
जलकल विभाग भैरोघाट पंपिंग स्टेशन से गंगाजल खींच कर शुद्ध करके शहर में सप्लाई करता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिकंदर का कहना है कि जलकल विभाग से शिकायत आई है, अधिकारियों की टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि अक्सर पेपर मिल और डिस्टलरी से जो प्रदूषित कचरा गंगा में आता है, उससे पानी के लाल होने की शिकायत आती रही है। कीड़े नालों के पानी की वजह से हो सकते हैं। बिठूर और इसके आसपास कई नाले गंगा में सीधे गिरते हैं।
जलकल विभाग की शिकायत में ये कहा गया
कानपुर की गंगा में बढ़ा प्रदूषण
-गंगा के पानी में लाल रंग के कीड़े (लार्वा) आ रहे हैं।
-पानी को प्योरिफाई (शुद्धीकरण) में दिक्कत आ रही है। गंगा का पानी शुद्घीकरण कर शहरियों को जलापूर्ति की जाती है
कीड़े युक्त पानी को प्योरिफाई करने में ज्यादा केमिकल प्रयोग करने से खर्च बढ़ गया है।
-पहले भी इस तरह की शिकायत की गई लेकिन अभी तक इसका हल नहीं निकला।
जिम्मेदारों ने ये कहा
कानपुर की गंगा में बढ़ा प्रदूषण
जलकल विभाग महाप्रबंधक आरपीएस सलूजा ने कहा कि गंगा से भैरोघाट पंपिंग स्टेशन के माध्यम से लिए जा रहे कच्चे पानी में 15 दिन से लाल रंग के छोटे-छोेटे कीड़े आ रहे हैं। इन्हें मारते हुए पानी शोधित करने में फिटकरी और क्लोरीन का खर्च दोगुना हो गया है। डीएम को पत्र लिखा है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी से मामले को देखने को कहा गया है। इस बारे में जलकल विभाग के जीएम से भी जानकारी ली गई है। पानी कम होने की समस्या की सूचना पहले दी गई थी, अब कीड़े होने की बात सामने आई है, जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा।