उन्नाव सहित पूरे कानपुर मंडल में गंगा नदी के जल में प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब है। इन सभी स्थानों पर बीओडी (बायोडिजाल्व आक्सीजन) की मात्रा कहीं पर चार तो कहीं पर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर है जबकि यह जीरो होनी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में सिर्फ बिठूर को छोड़कर सभी जनपदों कानपुर, फर्रुखाबाद और कन्नौज में गंगा में प्रदूषण की रेटिंग सबसे खराब डी श्रेणी में रखी गई है।
बिठूर की स्थिति एक स्थान ऊपर सी श्रेणी में है। रिपोर्ट के अनुसार यह चेतावनी वाली स्टेज से ऊपर की स्थिति है। बीओडी की मात्रा इससे अधिक होने से जलीय जंतुओं की मौत होने लगती है। बीओडी बढ़ने से पानी में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।
गंगा में प्रदूषण बढ़ने की वजह नदी किनारे स्थापित औद्योगिक इकाइयों और सीवर का पानी सीधे गंगा में जाना है। चूंकि गंगा के जल स्तर में कमी आई है, ऐसे में प्रदूषण का स्तर और बढ़ता जा रहा है। कानपुर में गंगा की सबसे खराब स्थिति जाजमऊ और उसके उस पार यानी जाना गांव के समीप की है।
यहां के गंगा जल में हानिकारक कॉलीफार्म (झागनुमा प्रदूषित तत्व) की मात्रा 43 गुना ज्यादा मिली है, इसकी मात्रा जीरो होनी चाहिए। कॉलीफार्म पानी में उस जगह पाया जाता है, जहां पर बड़ी मात्रा में सीवर की गंदगी होती है। यह जानवरों के लिए भी पीने लायक नहीं होता है।
यह है स्थिति
बीओडी की मात्रा - जाजमऊ में 3.8, जाना गांव के पास 4.0, गोलाघाट 3.5, शुक्लागंज, कन्नौज, फर्रुखाबाद में 3.5, बिठूर में 3.0 मिलीग्राम प्रति लीटर पानी में। (होनी चाहिए जीरो)
कॉलीफार्म की मात्रा - जाना गांव में 43 हजार, जाजमऊ में 31 हजार, गोलाघाट 24 हजार, कन्नौज 25 हजार, शुक्लागंज 11 हजार एमपीएन प्रति 100 मिली लीटर। (होनी चाहिए जीरो)
‘किसी भी पानी मेें बीओडी की सामान्य मात्रा जीरो से तीन मिलीग्राम तक मानी गई है। इससे ज्यादा की स्थिति खतरनाक हो जाती है। कॉलीफार्म सीवर की गंदगी की वजह से पैदा होता है। इसकी मात्रा जीरो से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। -कुलदीप मिश्रा पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड