हरिद्वार से कानपुर के बीच गंगा किस तरह से और किस वजह से प्रदूषित हुई है, इसकी सच्चाई जानने के लिए अब रिटायर्ड जजों का एक पैनल पड़ताल पर निकलेगा। मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में गंगा नदी पर सुनवाई के दौरान चेयरमैन स्वतंत्र कुमार ने यह आदेश जारी किया। बता दें कि अभी तक गंगा में प्रदूषण फैलने की वजह की पड़ताल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की एक दर्जन एजेंसियां अपनी रिपोर्ट जमा कर चुकी हैं। जजों के पैनल आने के पीछे यह बात सामने आ रही है कि अभी तक सरकारी एजेंसियों की तरफ से दी गई रिपोर्ट मानकों के अनुरूप नहीं है। यही वजह है कि एनजीटी को यह फैसला लेना पड़ा।
कानपुर, उन्नाव में गंगा किनारे स्थापित टेनरियों के अलावा हरिद्वार से लेकर कानपुर के बीच 300 से अधिक नाले हैं, जो गंगा में किसी न किसी तरीके से गिर रहे हैं। इनको रोकने के लिए समय-समय पर कई उपाय किए जाने की बात एजेंसियों के सर्वे में बताया गया। कुछ एजेंसियों की रिपोर्ट क्रास चेकिंग में गलत हो चुकी है। यही वजह है कि एनजीटी हकीकत जानने के लिए अब जजों का सहारा ले रहा है। बताया जा रहा है कि एनजीटी के इस पैनल में छह रिटायर्ड जज होंगे। जो 700 किलोमीटर के दायरे में गंगा किनारे की दशा और दुर्दशा का ब्योरा इकट्ठा करेंगे। पैनल की रिपोर्ट के बाद फिर से एनजीटी में इस पर सुनवाई होगी। इसमें अभी कितना समय लगेगा यह तय नहीं है। गंगा के साथ इससे जुड़ी नदियां काली नदी और पांडु नदी का निरीक्षण भी रिटायर्ड जजों का पैनल करेगा।
एनजीटी ने पूछा जाजमऊ में कौन डालेगा सीवर लाइन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पूछा है कि जाजमऊ में सीवर लाइन अभी तक क्यों नहीं डाली गई। सीवर लाइन डालने की जिम्मेदारी छावनी परिषद की है या फिर नगर निगम के जलकल विभाग की। प्रदेश सरकार के हवाले से यह सूचना संबंधित विभाग के अधिकारियों को देने को कहा गया है। जाजमऊ में अभी तक सीवर लाइन नहीं होने से टेनरियों और शहर का पूरा कचरा टेनरियों के लिए बनाए गए ट्रीटमेंट प्लांट की लाइन से सीधे गंगा में जाता है।