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Kanpur News: आज से शहर में नहीं उठेगा कूड़ा, सफाई व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति ने आमसभा में की घोषणा

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कानपुर। शुक्रवार से न तो शहर में झाड़ू लगेगी और न ही कूड़ा उठेगा। सफाई व्यवस्था के पूरी तरह से हो रहे निजीकरण के विरोध में यह घोषणा गुरुवार को संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति ने आमसभा ने की।
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संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के सदस्यों ने दोपहर में नगर निगम मुख्यालय स्थित दफ्तरों में काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर निकालकर दरवाजे बंद कराए। कामकाज पूरी तरह से ठप कर दिया। इसके बाद नारेबाजी करते हुए मुख्यालय के पोर्टिको पर आमसभा की। इसमें विभिन्न जोनों में कार्यरत दो हजार से ज्यादा कर्मचारी नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। इनमें से कई जत्थों ने हाथों में झाड़ू लेकर प्रदर्शन किया।



आमसभा में समिति के सदस्यों रमाकांत मिश्रा, मुन्ना हजारिया, विनोद रावत, धीरज गुप्ता, हरिओम वाल्मीकि आदि ने 15 मई से सड़कों की सफाई और कूड़ा उठान के काम की बहिष्कार करने की घोषणा की। पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक निजीकरण के टेंडर निरस्त नहीं किए जाएंगे, तब तक कूड़ा उठान बंद रहेगा। अपर नगर आयुक्त (प्रथम) आवेश खान और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने कर्मचारी नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया पर बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
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सभा में नेताओं ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय से तत्काल समस्या के समाधान की मांग करते हुए धमकी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। आमसभा में जयपाल सिंह, कमरुद्दीन, अजीत बाघमार, सुधाकर मिश्र, उस्मान अली शाह, मुन्ना हजारिया, अखिलेश सिंह, रामगोपाल चौधरी, दीप वाल्मीकि, पिंटू चौधरी, मुकेश वाल्मीकि, राम प्रकाश भारती, युसूफ अली आदि शामिल रहे।



जनवरी से हो रही टेंडर निरस्त करने की मांग



कर्मचारी नेताओं ने कहा कि जनवरी से लगातार निजीकरण संबंधी टेंडर निरस्त करने की मांग की जा रही है लेकिन नगर निगम प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया। आरोप लगाया कि कर्मचारियों की भावनाओं की अनदेखी किए जाने के कारण आंदोलन और कार्य बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा। नेताओं ने कहा कि जनहित को देखते हुए जलकल की जलापूर्ति, सीवर व्यवस्था और मार्ग प्रकाश व्यवस्था को आंदोलन से अलग रखा गया है।
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संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के सदस्यों से दोबारा वार्ता करने की कोशिश की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही हल निकलेगा।



अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
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