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नागपंचमी विशेष: जहरीले कोबरा से याराना, सैकड़ों सांपों को दिया जीवनदान; कानपुर के नाग रक्षक की अनोखी दास्तान

Mon, 17 Aug 2026 03:10 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: नागपंचमी पर पेश है एक ऐसे युवा की कहानी, जिसने जहरीले सांपों से दोस्ती कर सैकड़ों बेजुबानों की जान बचाई और कई बार इंसानों को भी खतरे से बाहर निकाला। नरवल तहसील के सरसौल विकासखंड के उमराव खेड़ा गांव निवासी मनोज कुमार पिछले सात वर्षों से सर्प मित्र के रूप में नि:स्वार्थ सेवा कर रहे हैं।
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Life Saved for Hundreds of Snakes - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सनातन संस्कृति में नागपंचमी का पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं और विशेषकर नाग देवता की आराधना का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर जहाँ एक ओर लोग मंदिरों में जाकर नाग देवता की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और दूध अर्पित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे असल जीवन के नायक भी हैं जो सिर्फ औपचारिकता निभाने के बजाय धरातल पर नागों और अन्य वन्य जीवों की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

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आज हम बात कर रहे हैं कानपुर के नरवल तहसील के अंतर्गत आने वाले विकासखंड सरसौल के उमराव खेड़ा गांव निवासी एक ऐसे ही युवा 'सर्प मित्र' मनोज कुमार की, जिन्होंने पिछले सात वर्षों से बिना किसी स्वार्थ और शुल्क के बेजुबान सांपों की जान बचाने का बीड़ा उठा रखा है।

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनोज का अनूठा संकल्प

साधारण किसान परिवार में जन्मे मनोज कुमार बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में खेतों, घरों और रास्तों पर सांपों का निकलना आम बात है। अक्सर जानकारी के अभाव में लोग डर के मारे इन बेजुबान जीवों को पीट-पीटकर मार डालते हैं। कई बार लोग सांप के काटने से घबराकर अपनी या दूसरों की जान जोखिम में डाल लेते हैं।

इन घटनाओं को बहुत करीब से देखने के बाद मनोज के मन में विचार आया कि इन मूक जीवों को बचाना और इंसानों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। बस इसी एक सोच और संकल्प के साथ उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, केवल अपनी सूझबूझ और साहस के बल पर सर्प रेस्क्यू का कठिन काम शुरू किया।

7 साल का सफर और अनगिनत खतरनाक रेस्क्यू

पिछले सात वर्षों की अपनी इस लंबी और जोखिम भरी यात्रा के दौरान मनोज ने एक से बढ़कर एक जहरीले और खतरनाक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने इस कार्यकाल में कोबरा (नाग), करत, वाइपर और रसेल वाइपर जैसे बेहद जहरीले सांपों को आबादी वाले इलाकों से सुरक्षित पकड़ा है।

मनोज बताते हैं कि कई बार रेस्क्यू के दौरान ऐसे मौके भी आए जब सांप ने हमला करने की कोशिश की या वे बेहद संकीर्ण जगहों पर छिपे थे, लेकिन उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी पैनी नजर और अनुभव का इस्तेमाल कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। वे अब तक सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों की संख्या में सांपों को सुरक्षित पकड़कर घने जंगलों और उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ चुके हैं।

बिना किसी शुल्क के चौबीस घंटे सेवा के लिए तैयार

मनोज कुमार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे इस नेक और खतरनाक कार्य के लिए किसी से भी एक रुपया शुल्क नहीं लेते। दिन हो या रात, बारिश का मौसम हो या भीषण गर्मी, जैसे ही उन्हें किसी ग्रामीण या शहरवासी का फोन आता है कि उनके घर या खेत में सांप निकला है, मनोज तुरंत अपनी बाइक या साइकिल उठाकर मौके पर पहुंच जाते हैं। दूर-दराज के गांवों से भी लोग उन्हें फोन करके मदद मांगते हैं और वे बिना किसी देरी के पहुंच जाते हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव के कारण आज वह क्षेत्र के बच्चे-बच्चे की जुबान पर 'सर्प मित्र' के रूप में जाने जाते हैं।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का मिलता है भरपूर सम्मान

शुरुआत में जब मनोज ने सांपों को पकड़ना शुरू किया था, तो उनके परिवार वाले भी उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों की जान बचने लगी और उन्होंने बेजुबानों के प्रति मनोज का समर्पण देखा, तो ग्रामीण भी उनका सम्मान करने लगे।

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आज स्थिति यह है कि गांव में किसी के भी घर सांप निकलने पर लोग पुलिस या किसी अन्य को फोन करने से पहले मनोज को याद करते हैं। ग्रामीण हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहते हैं। नागपंचमी के इस पवित्र पर्व पर मनोज की यह कहानी समाज को एक बेहद मजबूत संदेश देती है कि प्रकृति और जीवों के बिना हमारा अस्तित्व अधूरा है, इसलिए हमें इनसे डरने के बजाय इनकी रक्षा करनी चाहिए।
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