मन में सेवा भाव कम और पैसा कमाने की ललक रखने वाले डॉक्टरों के लिए नजीर हैं डॉ. अजीत मोहन चौधरी। मरीजों की सेवा के लिए उन्होंने कानपुर के चेतना चौराहा हनुमान मंदिर के किनारे सड़क पर क्लीनिक खोल ली है। टेबल डालकर एक छाते के नीचे बैठकर डॉ. चौधरी (फिजीशियन) रोजाना 20 से 25 मरीजों का मुफ्त में इलाज करते हैं। साथ ही उन्हें दवाइयां भी देते हैं।
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शहीदों के परिवार की मदद के लिए रखा है दानपात्र
वह रोजाना सुबह 10 से 11:30 बजे तक बैठते हैं। उन्होंने शहीदों के परिवार की सहायता के लिए एक दानपात्र भी रखा है, अगर कोई मरीज पैसा देना चाहता है तो उससे रुपये दानपात्र में डालने को कहते हैं।
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शहीदों के परिवार की मदद के लिए रखा है दानपात्र
डॉ. चौधरी ने वर्ष-1978 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से पीजी किया था। कुछ दिन एचएएल की डिस्पेंसरी में काम करने के बाद नौकरी छोड़ दी। उसके बाद उन्होंने पत्नी डॉ. स्मृति चौधरी के साथ लाल बंगला चौकी रोड पर 100 बेड का सरला नर्सिंगहोम खोला। यहां भी नार्मल चार्ज में मरीजों का इलाज होता है। डॉ. चौधरी बताते हैं कि उनके अंदर हमेशा से ही गरीबों और शहीद के परिजनों के लिए कुछ करने की ललक थी।
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सड़क पर क्लीनिक, मुफ्त में इलाज
इसके चलते 20 दिन पहले ही उन्होंने एक छाते और टेबल से ही क्लीनिक की शुरुआत कर दी। पहले तो मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों का चेकअप शुरू किया। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, मरीजों की संख्या बढ़ती गई। परीक्षण के बाद मरीजों को मुफ्त में दवाइयां भी दी जाती हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ दवाइयां बाहर से लिख दी जाती हैं। दवाइयों के एवज में जो मरीज पैसा देना चाहता हैं, उसके लिए शहीदों के परिवार की सहायता के लिए दानपात्र रखवाया है।
वह इस पैसे को शहीद सैनिकों के परिवार तक पहुंचाएंगे। गरीबों का इलाज करके बहुत शांति मिलती है। डॉ. चौधरी का एक बेटा अभिषेक चौधरी आईआईटी टॉपर है, वह अमेरिकन मल्टीनेशनल कंपनी में चांसलर है। वहीं, बेटी लवीना सिंगापुर में डॉक्टर हैं। छोटा बेटा डॉ. प्रदीप मोहन चौधरी और उसकी पत्नी डॉ. ज्योति चौधरी केपीएम में हैं।