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कागजों में सील जारी और बन गया होटल

Sun, 21 Dec 2014 02:12 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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तिलक नगर स्थित पॉश इलाके में जो होटल रॉयल कॉटेज पूरे शानो-शौकत से चल रहा है, उसकी दूसरी मंजिल आज भी केडीए के रिकॉर्ड में सील है।
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सील होने के बावजूद निर्माण कैसे पूरा हो गया और इमारत का व्यावसायिक इस्तेमाल कैसे हो रहा है?, इस सवाल के जवाब में केडीए अधिकारी नोटिसबाजी का रिकॉर्ड दिखाते हैं।

 और बार-बार सूचना देने के बावजूद कुछ न करने की तोहमत कोहना पुलिस पर जड़ते हैं। कोहना थानाध्यक्ष से सवाल किया गया तो वे मासूम सा जवाब देते हैं, मैं तो अभी नया आया हूं।
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रिकॉर्ड देखकर ही बता पाऊंगा कि सील तोड़ने की रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज हुई ? इन सबसे कई कदम आगे रायल कॉटेज के मालिक गुलशन कुमार धूपर पहले तो सारे आरोपों से सीधे इनकार करते हैं।

मगर ठोस तथ्य सामने रखने पर राजनीतिक पहुंच और पैसा के बल पर जल्द ही सब कुछ ठीक करने का दावा करते हैं।  

‘अमर उजाला’ को शनिवार को सूचना मिली कि तिलक नगर में होटल विजय विला के सामने स्थित मकान नंबर 7/ 82 के मालिक एवं आईआईए चौबेपुर के अध्यक्ष गुलशन कुमार धूपर द्वारा केडीए और कोहना पुलिस की मिलीभगत से अवैध रूप से ‘रॉयल कॉटेज’ होटल का निर्माण कराया जा रहा है।

होटल की दूसरी निर्माणाधीन मंजिल को केडीेए ने चार साल में दो बार सील किया, पर भवन स्वामी ने नियमों को ताक पर रखकर दोनों बार सील तोड़ दी और धड़ल्ले से निर्माण जारी है।

इस पर संवाददाता मौके पर पहुंचा तो वहां बाहर से दोनों मंजिलें चमाचम नजर आईं। बेसमेंट पर ‘इन शेप’ के नाम से जिम चल रहा है। ग्राउंड फ्लोर में बने रिसेप्शन में अमर उजाला संवाददाता ग्राहक बनकर पहुंचा तो पता चला कि होटल चालू है।

एक पार्टी के लिए इस होटल का एक हाल बुक कराने के लिए पूछा तो रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी ने तुरंत हामी भर दी। कर्मचारी ने बताया कि एक हाल नहीं बुक होता, बल्कि ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट और सेकेंड फ्लोर की एक साथ बुकिंग की जाती है। इसमें दो हाल, किचन और 34 कमरे बने हैं।

हाल और कमरे एसी हैं। लिफ्ट भी लगी है। पूरी बुकिंग 24 घंटे के लिए की जाती है। फर्नीचर भी रहता है। इसके लिए 1.60 लाख रुपये किराया बताया गया। यह भी कहा गया कि टैक्स अलग से लिया जाएगा।

संवाददाता ने पूछा कि इस होटल के निर्माण के दौरान दूसरी मंजिल सील कर दी गई थी तो क्या उसे तोड़कर निर्माण हुआ है? रिसेप्शनिस्ट ने इस पर अनभिज्ञता जताते हुए जवाब दिया कि निर्माण तो 15 दिन पहले ही पूरा हो गया था। दूसरी मंजिल के कमरों को भी साथ में ही किराए पर दिया जाता है।

केडीए से पड़ताल करने पर पता चला कि इस भवन में अवैध निर्माण को केडीए प्रवर्तन दस्ते ने पहली बार 18 अक्तूबर 2010 को सील किया था।

इस परिसर को निगरानी के लिए कोहना पुलिस को निर्देशित किया, ताकि न तो सील टूट पाए और न ही पुन: निर्माण हो सके, पर भवन स्वामी ने सील तोड़कर पुन: निर्माण चालू कर दिया।

प्राधिकरण के अफसर लगभग चार साल तक नोटिस आदि देकर खानापूरी करते रहे।

सील तोड़कर अवैध रूप से निर्माण करने पर आईपीसी की धारा - 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन) के तहत की रिपोर्ट लिखाने के लिए दो बार कोहना थाने में तहरीर भी दी, पर केडीए से थाने में न तो कोई यह पूछने गया कि एफआईआर दर्ज हुई या नहीं और न ही एफआईआर की कॉपी मंगाई गई।

इस बीच अवैध निर्माण जारी रहा। केडीए अफसरों ने खुद को बचाने के लिए बीती 27 अगस्त दोबारा दूसरी मंजिल पर चल रहे अवैध निर्माण को सील किया और सील परिसर कोहना पुलिस के सुपुर्द किया, ताकि न तो सील टूट पाए और न ही पुन: अवैध निर्माण शुरू हो पाए। पर हकीकत सामने है।


रॉयल कॉटेज में मालिक गुलशन कुमार धूपर दूसरी मंजिल पर अवैध निर्माण करा रहे हैं। इसे दो बार सील किया।

बीते अप्रैल में मैने कार्यभार संभालने के बाद नोटिस देने के बाद सीलिंग कर इसे पुलिस के सुपुर्द  कर दिया, पर सील तोड़कर पुन: निर्माण चालू हो गया।

अब फिर गुलशन कुमार धूपर के खिलाफ एफआईआर कराने के लिए तहरीर तैयार करा ली गई है। इसे सोमवार को कोहना थाने भेजेंगे।

एमके मिश्रा, अधिशाषी अभियंता, जोन-1 (प्रवर्तन)


मुझे एक महीने पहले ही इस थाने का चार्ज मिला है। होटल रॉयल कॉटेज में अवैध निर्माण का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि केडीए से तहरीर मिली तो एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

नीरज यादव, थानाध्यक्ष, कोहना


होटल मालिक गुलशन कुमार धूपर से बातचीत

सवाल - मैं आज आपके होटल रॉयल कॉटेज गया था, न केवल सेकेंड फ्लोर तक बनकर तैयार है, बल्कि चल भी रहा है। ये कैसे हो गया, सेकेंड फ्लोर तो केडीए के रिकॉर्ड में सील है ?

जवाब- नहीं...नहीं आपको किसी ने गुमराह किया होगा। यह होटल नहीं है, गेस्ट हाउस है।

सवाल- अब जो भी हो, लेकिन मैने तो केडीए का रिकॉर्ड देखा है। पहली बार 18 अक्टूबर 2010 में सील हुआ था। बाद में भी सील करने की कार्रवाई हुई। रिकॉर्ड में तो यह अब भी सील है।

आखिर सील बिल्ंिडग में आपने निर्माण कैसे करवा लिया? केडीए का रिकॉर्ड बताता है कि आपने दो बार सील तोड़ी। केडीए ने पुलिस को भी सूचना दी थी। ये तो पुलिस से मिलीभगत से अवैध निर्माण का मामला है ?  

 जवाब - नहीं ऐसा नहीं है, मैने पुलिस की मिलीभगत से नहीं बनवाया है। केडीए ने मुझे कोई नोटिस नहीं दी और न ही मैने कोई जवाब दिया।

सवाल- आप गलतबयानी कर रहे हैं, मैने केडीए के रिकॉर्ड में आपका जवाब भी देखा है।

जवाब- आप ऐसा करें कल मेरे पास आ जाए, मैं आपको संतुष्ट कर दूंगा। जैसा आप समझ रहे हैं, वैसा कुछ भी नहीं है।

सवाल- चलिए अवैध निर्माण की बात छोड़िये, ये तो मानेंगे कि मकान नंबर 7/ 82 (इसी मकान पर रॉयल कॉटेज स्थित है) का नक्शा तो आवासीय है तो फिर व्यावसायिक निर्माण कैसे करा लिया?  

जवाब - हां, यह सच है कि नक्शा आवासीय है, पर हमने अवैध रूप से नहीं बनाया। उनके दिमाग में है कि अवैध बनाया। मैने यह निर्माण अभी नहीं कराया है, बल्कि 2009 में बेसमेंट, ग्राउंड, फर्स्ट फ्लोर बनवाया था।

मैं 2009 की फोटो दिखा दूंगा कि सेकेंड फ्लोर की स्लैब तभी पड़ी थी। अब इसे सजाया गया है।


सवाल - तो फिर आप इसका व्यावसायिक उपयोग कैसे कर रहे हैं? क्योंकि होटल और गेस्ट हाउस व्यावसायिक में आते हैं?

जवाब - गेस्ट हाउस आवासीय क्षेत्र में बनते हैं। मैने निर्माण को नियमित कराने के लिए संशोधित नक्शा पेश किया है। हमें उम्मीद है कि चार - छह दिन में नक्शा स्वीकृत करा लेंगे। संशोधित नक्शा पास कराने के लिए मैने पॉलिटिकल प्रेशर डलवाया है। अमिताभ वाजपेयी मेरे छोटे भाई हैं।
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हो सकती है छह महीने की सजा

केडीए प्रवर्तन विभाग के अधिशाषी अभियंता एमके मिश्रा ने बताया कि गुलशन कुमार धूपर द्वारा सील तोड़कर निर्माण करने पर आईपीसी की धारा - 188 के तहत एफआईआर कराने के लिए दो बार थाने में तहरीर दी।

तीसरी तहरीर तैयार है। इसे एक - दो दिन में थाने भेजा जाएगा। धारा-188 का उल्लंघन करने पर छह महीने की सजा का प्रावधान है।
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