कानपुर में डीआईजी की स्वाट टीम ने लॉकडाउन में बेरोजगारी की मार से त्रस्त नौजवानों को फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने हरबंशमोहाल थाना क्षेत्र स्थित ग्लोबस मॉल की छठवीं मंजिल और चुन्नीगंज में संचालित हो रहे दो कॉल सेंटरों में छापा मारकर मुख्य आरोपी व भारी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस 50 मोबाइल, भारी मात्रा में सिम, डायरी व अन्य सामान बरामद किए हैं।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेश और कानपुर की बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने के बहाने बेरोजगारों से ठगी करते थे। स्वाट टीम प्रभारी अमित तोमर ने बताया कि ग्लोबस मॉल स्थित एसकेएस डिजिटल सोल्यूशन और चुन्नीगंज में संचालित एसीएस कम्यूनिकेशन सेंटरों पर छापा मार मूलरूप से प्रतापगढ़ के पट्टी मझगांव निवासी हरिओम पांडेय को गिरफ्तार कर लिया।
वह वर्तमान में नोएडा के सेक्टर 58 में परिवार संग किराये के फ्लैट में रहता है। नोएडा में कंपनी का मुख्यालय भी बना रखा है। हरिओम ने बताया कि उसके गिरोह में दो अन्य पार्टनर प्रतापगढ़ निवासी अजय और विवेक हैं जो नोएडा में रहते हैं।
युवतियों से कराते थे कॉल
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मोबाइल का डाटा दिल्ली की कंपनियों से खरीदता था। इसके बाद दोनों कॉल सेंटर में मौजूद 16 युवतियों से बेरोजगारों को कॉल कर नौकरी दिलवाने का झांसा दिलवाता था। युवतियों के झांसे में आए युवक प्रोसेसिंग फीस के रूप में 11 से 12 हजार रुपये खाते में जमा कर देते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बदल देते या बंद कर देते थे। रकम कम होने के चलते ज्यादातर युवक इसकी शिकायत भी नहीं करते थे।
बीए पास शातिर, 20 से 25 लाख की इनकम
बीए पास हरिओम ने बताया कि उसकेपिता अर्जुन प्राइवेट जॉब करते हैं। बीए करने के बाद वह अपने साथियाें संग कॉल सेंटर के जरिए जालसाजी करने लगा। 10 से 12 हजार रुपये में युवतियों को जॉब पर रखा। प्रतिमाह 20 से 25 लाख रुपये की कमाई करता है। उसके पास एक लग्जरी कार भी है। दोनों कॉल सेंटर पर आठ-आठ युवतियां काम करती हैं। वह नोयडा से प्रतिमाह शहर आता है। पिछले एक साल में करोड़ों रुपये कमा चुका है।