पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी मंगलवार को पत्नी प्रतिभा शुक्ला (पूर्व विधायक) समेत भाजपा में शामिल हो गए। प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने लखनऊ में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। उन्होंने कहा कि वारसी दंपति पार्टी को नई दिशा देने में कामयाब होंगे। वारसी के साथ करीब एक हजार लोगों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
कई अल्पसंख्यक वर्ग के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। इधर, राजनीति के जानकारों का मानना है कि वारसी के पत्नी समेत भाजपा का दामन थामने से जिले में बसपा और भाजपा के राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। पता चला है कि प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराने के साथ ही पति-पत्नी को उनकी मनचाही दो विधानसभा सीटों (रनिया और सिकंदरा) से यूपी 2017 में प्रत्याशी बनाने का भी भरोसा दिया है।
समाजवादी पार्टी से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले अनिल शुक्ल वारसी की भाजपा तीसरी पार्टी है। कुछ दिन पहले बड़े बेआबरू होकर उन्होंने बसपा का दामन छोड़ दिया था। रनिया विधानसभा सीट को लेकर बसपा में काफी समय से धमाचौकड़ी चल रही हैै। कुछ दिन पहले तक अनिल की पत्नी प्रतिभा शुक्ला इसी सीट से बसपा की प्रत्याशी थीं, लेकिन एक झटके में उनका नाम हटा दिया गया।
इससे वारसी दंपति का बसपा से मोहभंग हो गया। बसपा ने अभी तक किसी का नाम इस सीट से घोषित नहीं किया है। माना जा रहा है कि किसी सतीश शुक्ला ने प्रत्याशी बनने के लिए बसपा सुप्रीमो की डिमांड पूरी कर दी है। जल्दी उनका नाम भी सामने आ सकता है। अनिल शुक्ल वारसी बसपा की ब्राह्मण लॉबी के बड़े नेता माने जाते हैं। ऐसे में उनका भाजपा में आना, इस क्षेत्र में भाजपा की राजनीति को भी प्रभावित करेगा। वारसी अकबरपुर लोकसभा सीट से बसपा से दो बार प्रत्याशी हुए, एक बार सांसद भी चुने गए।
ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के सामने प्रमुख दावेदारों में अनिल का नाम जुड़ गया है। उधर राजाराम पाल के कांग्रेस में जाने के बाद अनिल शुक्ल के भी पार्टी छोड़ने से बसपा में बड़े नेताओं का संकट पैदा होता जा रहा है। इसकी भरपाई के लिए भी बसपा को जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
इस संबंध में बसपा के मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर अशोक सिद्घार्थ का कहना है कि वारसी बसपा से निकाले गए हैं, उनका अब कोई अस्तित्व नहीं है।