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पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट ने कहा 'सेना को आईआईटीयंस की जरूरत' ,

Sat, 28 Oct 2017 08:47 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा
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एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना के पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा ने कहा कि जवानों की संख्या के मामले में हम चीन को जोरदार टक्कर दे रहे हैं, टेक्नोलॉजी के मामले में हमें और मजबूत होने की जरूरत है।
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कारगिल युद्ध से जुड़ी कई बातें भी बताईं

पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा - फोटो : अमर उजाला
कानपुर। इंडियन आर्मी के पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा ने आईआईटी कानपुर के छात्रों से देश की सैन्य क्षमता को तकनीकी तौर पर मजबूत करने के लिए कहा है। उन्होने कहा कि जवानों की संख्या के मामले में हम चीन को जोरदार टक्कर दे रहे हैं। टेक्नोलॉजी के मामले में हमें और मजबूत होने की जरूरत है। इसे आप (आईआईटीयंस) पूरा कर सकते हैं। 

इंस्टीट्यूट के कल्चरल फेस्टिवल अंतराग्नि में आए देशभर के छात्र-छात्राओं के साथ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा कारगिल युद्ध से जुड़ी कई बातें भी बताईं। कहा, हमारी एकता ने ही कारगिल में हमें जीत दिलाई है। यही हमारी ताकत है। साहा ने छात्रों से कहा कि पढ़ाई करने के बाद कॅरियर किसी भी क्षेत्र में बनाएं, लेकिन अपने राष्ट्र को सबसे पहले रखें। अंतराग्नि के चेयरमैन डॉ. रित्विज भौमिक ने लेफ्टिनेंट साहा का स्वागत स्मृति चिह्न देकर किया।

 

युवाओं को गुमराह करने में जुटे कुछ लोग

पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा - फोटो : अमर उजाला
एक छात्र ने लेफ्टिनेंट साहा से सवाल किया कि जेएनयू में हुए देश विरोधी नारेबाजी को आप कैसा मानते हैं? इस पर लेफ्टिनेंट साहा ने कहा कि कुछ लोग युवाओं को गुमराह करके उन्हें देश विरोधी कामों में लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोग गलत वीडियो, ऑडियो और फोटो का सहारा लेते हैं और युवाओं को एक नई सोच में ढाल देते हैं। इससे युवाओं को बचना चाहिए। इंफेंट्री डे पर उन्होंने छात्रों के साथ दो मिनट का मौन रखकर युद्ध में शहीद  हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।


 
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साहा ने छात्रों को बताया

पूर्व डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा
सेना का हर एक जवान और अधिकारी देश के लिए अपने ‘आज’ की कुर्बानी देता है।
सेना के जवान मरने से नहीं डरते। उनके लिए राष्ट्र पहले और बाकी सब बाद में होता है।
अगर जंग में मेरा एक साथ मरता है तो हम दुश्मनों के चार साथी मारने का जज्बा रखते हैं।
लोग कहते हैं कि फौजियों का दिमाग नहीं होता, मेरा मानना है कि वह दिल से सोचता है।
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