संस्थान का नया भवन बनने के बाद विवि ने शासन से पूर्ण वेतनमान देने एवं पदों के सृजन की संस्तुति प्राप्त की। शासन ने विवि को निजी स्रोतों से पूर्ण वेतन देने और भविष्य में राज्य सरकार द्वारा कोई राशि न देने की शर्त के साथ संस्तुति दी। उन्होंने कहा कि 2020 में तत्कालीन कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता को पूर्ण वेतनमान देने एवं सृजित पदों के सापेक्ष नियुक्ति देने के लिए पत्र लिखा था।
इसके कुछ समय बाद प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की नियुक्ति कुलपति के पद पर हुई। प्रमोद ने कहा कि यही मांग तब प्रो. पाठक से की तो उन्होंने इसे नहीं माना। योग्य होने के बावजूद नौकरी से निकाल दिया गया। तीन महीने का वेतन भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि न्याय के साथ कुलपति को सजा भी मिले। ऐसा न हुआ तो आत्मदाह करने पर मजबूर होंगे।