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सामने आया राशन विभाग का बड़ा घोटाला, गैंग बनाकर गरीबों के अनाज पर डाल रहे थे डाका

Sun, 26 Aug 2018 03:27 PM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, कानपुर

सार

- विभागीय कर्मचारी, कोटेदार और 17 लोगों की मिलीभगत रही
- डाटा बेस में दूसरे आधार नंबर डालकर थंब वेरीफाई कराकर खेल
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विस्तार
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प्रदेश भर में अनाज घोटाला राशन विभाग की मिलीभगत से डाटा बेस में सेंध लगाकर किया गया है। इस घोटाले में विभागीय कर्मचारी, कोटेदार, तकनीकी आपरेटरों और 17 लोगों की मिलीभगत रही। इन सभी लोगों ने एक गैंग बनाकर गरीबों के अनाज पर डाका डाला।
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राशन कार्डों को आधार कार्ड से लिंक कर ई पॉस मशीनों से थंब इंप्रेशन के बाद अनाज वितरण होता है। संबंधित कार्डधारक राशन की दुकान पर जाकर ई पॉस मशीन पर थंब लगाता है। थंब लगाते ही आधार कार्ड से बायोमेट्रिक मैच होने पर राशन का आहरण हो जाता है। ई पॉस मशीन से इसकी रसीद भी निकलती है। यह व्यवस्था लागू करने के लिए खाद्य तथा रसद विभाग ने कार्डधारकों का डाटाबेस एक्सल सीट पर तैयार किया है।
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इस तरह किया घोटाला

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1- साइबर एक्सपर्ट हेमंत गुप्ता ने बताया कि तकनीकी आपरेटर ने डाटाबेस में जाकर संबंधित राशन कार्ड धारक का आधार नंबर हटाकर किसी दूसरे व्यक्ति का आधार नंबर डालकर उसी व्यक्ति का थंब इंप्रेशन वेरीफाई करा दिया। यह काम करते समय कार्डधारक के नाम, उसके आश्रितों के नाम और पते आदि जानकारी से कोई छेड़खानी नहीं की गई। अब कार्डधारक का नाम और अन्य जानकारी तो डाटा बेस में ज्यों की त्यों रही। सिर्फ आधार नंबर बदला और बदले गए आधार नंबर का थंब वेरीफाई कराया गया। इसके बाद राशन वितरण की प्रक्रिया के तहत ई पॉश मशीन पर बदले गए आधार नंबर वाले व्यक्ति का थंब लगवाया। थंब लगते ही बदले गए आधार नंबर से थंब इंप्रेशन वेरीफाई हो गया। इस तरह राशन का आहरण कर लिया गया। इसके बाद डाटाबेस जाकर फिर से संबंधित राशन कार्ड धारक का आधार नंबर फीड कर दिया गया। यह प्रक्रिया एक ही आधार कार्ड धारक का सहारा लेकर कई बार दोहराई जाती रही। 

2-आधार कार्ड से लिंक किसी भी व्यवस्था में ट्रांजेक्शन करने पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज जाता है। अनाज घोटाला करने के लिए दूसरे व्यक्ति का आधार नंबर और उसके थंब इंप्रेशन का प्रयोग किया गया। इसलिए जितनी भी बार यह प्रक्रिया दोहराई गई, उतनी ही बार संबंधित व्यक्ति के रजिस्टर्ड मोबाइल पर ही सूचना जाती रही। राशन कार्ड धारक के पास अनाज आहरण का मैसेज ही नहीं गया।

किस की किस तरह की मिलीभगत
1-विभाग-हर विभाग का डाटा बेस पासवर्ड प्रोटेक्ट होता है। इसलिए बिना विभाग के कर्मचारी या अफसर की मिलीभगत से डाटा बेस तक तकनीकी आपरेटर नहीं पहुंच सकता है। आपूर्ति विभाग इंसपेक्टर, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों और जिला पूर्ति अधिकारी को यूनिट बढ़ाने, घटाने, राशन कार्ड निरस्त करने के काम के लिए पासवर्ड मिले हुए हैं। ज्यादातर इंसपेक्टर, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों ने यह सब काम कराने के लिए व्यक्तिगत आपरेटर रख लिए हैं। इनके सहारे भी डाटा बेस में सेंध लगाई जा सकती है।

2-कोटेदार-राशन वितरण कोटेदार करता है। वह ई पॉश मशीन पर थंब इंप्रेशन के बाद संबंधित कार्डधारक को राशन देता है। कार्डधारकों का ब्योरा भी उसके पास होता है। अनाज आहरण कर कालाबाजारी के लिए ही कोटेदारों ने तकनीकी आपरेटर की मदद से घोटाला किया। इसके लिए विभागीय कर्मचारियों और अफसरों या उनके व्यक्तिगत ऑपरेटर का हिस्सा तय कोटेदारों ने ही तय किया।

3-आधार कार्ड धारक-कोटेदार, तकनीकी आपरेटर और विभागीय लोगों के मिलने के बाद भी अनाज घोटाला नहीं हो सकता था। इसके लिए आधार कार्ड धारकों की जरूरत थी। इनकेआधार कार्ड नंबर और थंब का प्रयोग कर ही घोटाला हो सकता था। इसलिए कुछ लोगों इस घोटाले की कुछ राशि देने की बात तय कर उन्हें आधार कार्ड देने और बार-बार थंब लगाने को राजी किया गया। यह लोग जानकारी न होने की बात कहकर भी नहीं मुकर सकते, क्योकि बार-बार अनाज उठाने की जानकारी इनके रजिस्टर्ड मोबाइल पर आती रही।
 
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ऐसे खुला मामला

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जिन लोगों के आधार कार्ड नंबर से छेड़छाड़ कर अनाज घोटाला किया, ऐसे लोग जब राशन लेने कोटेदार के पास पहुंचे तो उन्हें लौटाया जाने लगा। कहा गया कि आप लोग राशन ले चुके हो। शिकायत अफसरों तक पहुंची तो कोटेदारों से पूछा गया। कोटेदारों ने राशन लेने की अपनी बात प्रमाणित करने के लिए राशन लेने की रसीदें बतौर प्रमाण अफसरों ने पेश कर दी। इस पर अफसरों ने इन कार्डधारकों को लौटा दिया।

कुछ कार्डधारक भी तेज निकले। जब कोटेदार ने रसीद पेश की तो उन्होंने अपने मोबाइल पर मैसेज न आने का प्रमाण रखा। पहले तो इस प्रमाण को ठुकराया जाता रहा। ज्यादा संख्या में इस तरह की बातें आईं तो अफसरों का माथा ठनका। उन्होंने आयुक्त खाद्य तथा रसद विभाग को इस मामले से अवगत कराया। जांच के बाद शहर में 17 आधार कार्ड नंबरों से बार-बार अनाज आहरण का मामला खुल गया।
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