कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अब ठेले पर खाना बिकते नजर आए तो समझ जाना यह अवैध है। दरअसल रेलवे के खानपान विभाग ने प्लेटफार्मों पर ठेलों में बिकने वाले खाने पर मंगलवार से पाबंदी लगा दी है। अभी तक रेलवे के चार ठेलों से अधिकृत रूप से खाना बिकता था लेकिन इसकी आड़ में अवैध वेंडर भी साठगांठ से अपने ठेलों से खाना बेचने लगते थे। इसके चलते रेलवे के वाणिज्यिक विभाग ने यह निर्णय लिया है। अब प्लेटफार्मों पर बने खाने पीने के स्टॉल, कमसम और सोपान कैंटीन से ही खाना पानी बिकेगा। रेलवे के इलाहाबाद मंडल के चीफ कैटरिंग इंस्पेक्टर एके मल्ल ने इस संबंध में सोमवार को सेंट्रल स्टेशन का निरीक्षण भी किया।
यूं तो रेलवे के खानपान विभाग के इन ठेलों से खाना बेचने के लिए एक विभागीय वेटर नियुक्त था लेकिन यात्रियों की भीड़ ज्यादा होने की वजह से बाहरी लोग भी सहयोग करते थे और बाहर का बना खाना भी बेचते थे। रेलवे के कैटरिंग से एक ठेले को अधिकतम 12 हजार रुपये का खाना रोजाना बेचने को दिया जाता था लेकिन कभी-कभी तो रोजना एक ठेला 50 हजार तक खाना बेच लेता है। मतलब बाकी खाना अवैध वेंडर बाहर से लेकर बेच लेते हैं। रेलवे के चार ठेलों के अलावा छह अवैध ठेले स्टेशन पर खाना बेचते हैं।
अब ज्यादा सक्रिय होंगे अवैध वेंडर
ठेलों के खत्म होने से यात्रियों को खाना लेने में परेशानी होगी। रेलवे की कैंटीन दूर हुई तो यात्री ट्रेन छूटने के डर में खाना लेने नहीं जाएगा। इस मौके को अवैध वेंडर भुनाएंगे। अभी भी प्लेटफार्म नंबर एक पर बनी कैंटीनों से ये वेंडर झोले में खाना लेकर ट्रेनों में बेचते हैं। इससे इनका अवैध कारोबार भी बढ़ जाएगा।