कानपुर देहात। पशुचिकित्सा विभाग मवेशियों को मुंहपका और खुरपका बीमारी से बचाने के लिए कागजों में अभियान चला रहा है। धरातल पर डॉक्टर व पैरावेट गांवों में नजर नहीं आ रहे हैं। किसान बारिश में मवेशियों को बीमारी से बचाने के लिए टीम का इंतजार कर रहे हैं।
जनपद में 618 ग्राम पंचायतों में 979 गांव हैं। बारिश के मौसम में मवेशियों में खुरपका-मुंहपका बीमारी तेजी से फैलती है। मवेशियों को बीमारी से बचाने के लिए 22 जुलाई से एफएमडी टीकाकरण शुरू किया गया है। 45 दिन का यह अभियान आठ सितंबर तक चलेगा। जनपद में 10 ब्लॉकों में कुल 27 टीमें लगाई गई हैं। इसमें 14 टीकाकरण टीमों का दायित्व केवल सात डॉक्टरों को दिया गया है।
कंचौसी, रनियां, रसूलाबाद, संदलपुर, रूरा, सरांय छह पशुचिकित्सालयों में डॉक्टर नहीं हैं। सात डॉक्टरों पर दो-दो टीमों का प्रभार है। सात टीमों में केवल दो-दो पैरावेट ही हैं। तीन टीमों में तीन-तीन पैरावेट और एक टीम में केवल एक पैरावेट है। पशुचिकित्सकों की कमी होने से टीमें गांवों में देर से पहुंच रही हैं। ऐसे में सवाल ये भी है कि 45 दिन के भीतर 27 टीमें 618 पंचायतों के सभी गांवों के मवेशियों को टीका लगा भी पाएंगी या नहीं।
टीकाकरण में लगी नौ टीमों में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं है। सदस्यों की कमी से जूझ रही टीकाकरण टीमें तमाम गांवों में पहुंच नहीं पा रही हैं। खुरपका-मुंहपका से मवेशियों के बचाव टीकाकरण के लिए पशुपालकों को टीके के आने का इंतजार है। कुल 5.50 लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि 10 दिनों में 1.04 लाख मवेशियों का टीकाकरण करा लिया गया है। दो साल से तबादला सत्र शून्य होने से डॉक्टरों की कमी है। टीकाकरण टीमें सभी गांवों में जा रही हैं की नहीं इसकी नियमित रिपोर्टिंग की जा रही है।
...............
बयान........
प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक बहुउद्देशीय वाहन और आठ पशु एंबुलेंस समेत 18 वाहनों को भी टीकाकरण में लगाया गया है। उपलब्ध स्टाफ के आधार पर 27 टीकाकरण टीमें बनाई गई हैं। टीमें हर गांव तक पहुंचे यह सुनिश्चित किया जाएगा। केवल गाभिन मवेशियों व अवयस्क पशुओं का टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। - डॉ. सुबोध कुमार बर्नवाल, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी
.................
झींझक में आठ हजार मवेशियों को लगे टीके
झींझक। ब्लॉक में पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) टीका लगाने के लिए दो टीमें लगी हैं। अब तक करीब आठ हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। मलगांव, रतनपुर, अमौली ठकुरान और सबलपुर गांवों में टीकाकरण पूरा करा लिया गया है। शुक्रवार को बनीपारा महाराज गांव में पशुओं को टीके लगाए गए। पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत कटियार ने बताया कि ब्लॉक झींझक व झींझक व कंचौसी नगर मिलाकर कुल 68,500 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य है। (संवाद)
.......................
रियल टाइम ऑनलाइन फीडिंग पीछे
कानपुर देहात/राजपुर। भले ही धरातल पर 1.04 लाख मवेशियों को टीके लगाने का दावा अधिकारी कर रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन फीडिंग काफी पीछे है। दस दिनों में रियल टाइम अपलोडिंग केवल 25 फीसदी तक सीमित है। टैग और वेक्सिनेशन के फार्मूले पर विभाग द्वारा पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। ओटीपी आधारित टीकाकरण है। इसमें कुछ पशुपालकों के पास मोबाइल नहीं हैं। वहीं कुछ के नंबर बंद होने की दिक्कत है। वहीं कई किसानों के परिजन ओटीपी नहीं दे पा रहे हैं। इसकी वजह से रियल टाइम अपलोडिंग बेहद कम है। राजपुर ब्लॉक में सिर्फ 11 हजार 300 पशुओं को टीके लग पाए हैं। (संवाद)
......................
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार हो रहा टीकाकरण
राजपुर पशु अस्पताल के प्रभारी पशुचिकित्सक डॉ. गौरव सक्सेना ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। बीहड़ क्षेत्र के गांवों में नियमित पशुओं का टीकाकरण कराया जा रहा है। टीकाकरण को लेकर कर्मचारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वह अपने पशुओं को टीका जरूर लगवा लें। (संवाद)
.................
पशुपालकों ने बताई समस्या
संदलपुर। पशु चिकित्सालय संदलपुर में एक वर्ष से चिकित्सक नहीं है। 37 गांवों वाले क्षेत्र में अतिरिक्त प्रभार कठरा के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अजय कुमार के पास है। सुमेर पुरवा के हरनाम सिंह, नैपलापुर के संतोष कुमार ने बताया कि अतिरिक्त प्रभार होने से कभी-कभार ही पशुचिकित्सक संदलपुर चिकित्सालय आते हैं। ड्रेसर शनी वर्मा ही पशुओं का इलाज करते हैं। गांव में अभी टीकाकरण टीम नहीं आई है। (संवाद)