चकरनगर। चंबल और यमुना नदियों में पिछले दिनों आई बाढ़ ने तहसील क्षेत्र के 13 गांवों में भारी तबाही मचाई है। जहां कई लोगों के आशियाने उजड़ गए हैं। सड़कें टूट गयीं हैं, खेतों में खड़ी फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गईं हैं। राजस्व व कृषि विभाग के सर्वेक्षण में सामने आया है कि कुल 206 हेक्टेयर भूमि की फसलों का नुकसान हुआ है। किसानों को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
तहसील क्षेत्र के गौहानी, खिरीटी, ककरैया, रनियां, चकरपुरा, नीमाडाडा, गढ़ाकसदा, भरेह, सहसों, कांयछी, पालीघार और कंधेशीघार सहित 13 गांव बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन गांवों में बाजरा, उड़द, मूंग और तिल की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं हैं। बाढ़ का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहने से मवेशियों का चारा भी सड़ गया है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। एडीओ कृषि ब्रजेश कुमार ने बताया कि एक हेक्टेयर में लगभग 35 कुंतल पैदावार होती है। इस आधार पर 206 हेक्टेयर में करीब 7210 कुंतल अनाज का नुकसान हुआ है, जिसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के पानी से कई गांवों की सड़कें टूट गईं और बिजली के खंभे गिरने से संचार व्यवस्था भी बाधित हुई थी। एसडीएम ब्रह्मानंद कठेरिया ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम ने फसल क्षति का सर्वे पूरा कर लिया है। बाढ़ में प्रभावित किसानों से बैंक खाता, आधार और आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं। शासन की ओर से किसानों को प्रति हेक्टेयर आठ हजार रुपये की दर से मुआवजा दिया जाएगा। किसी भी किसान को एक हजार रुपये से कम सहायता राशि नहीं मिलेगी। वहीं, किसानों ने नुकसान का अनुपात देखते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की है।