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एक्सपोर्टरों को पांच हजार करोड़ का नुकसान

Sat, 03 Dec 2016 09:41 AM IST
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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भैंस के कच्चे चमड़े के सबसे बड़े उत्पादक शहर कानपुर और उन्नाव में लेदर एक्सपोर्टरों को नोट बंदी से करीब पांच हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। नवंबर और दिसंबर माह में होने वाली कच्चा चमड़ा, सेडलरी आइटम व लेदर के अन्य प्रोडक्ट की डिलीवरी लटक गई है। इससे करीब दो हजार करोड़ के आर्डर पर संकट मंडरा रहा है। यही हालात रहे तो लेदर प्रोडक्ट के आर्डर धड़ाधड़ कैंसिल होने लगेंगे। माना जा रहा है कि अगले पांच छह माह तक हालात सामान्य नहीं होंगे। 
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उद्यमियों को करेंट एकाउंट से सिर्फ 50 हजार रुपये निकालने की छूट है। इस कारण टेनरी संचालक जानवरों की खाल लेकर आ रहे मजदूरों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से या निचले तबके से आने वाले ऐसे लोग उद्यमियों से चेक भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसी कारण शहर के अधिकतर स्लाटर हाउस भी बंद हैं। करेंसी की किल्लत की वजह से कानपुर और उन्नाव में कच्चे चमड़े का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो चुका है। समय पर भुगतान न हो पाने की वजह से टेनरियों में काम करने वाले श्रमिक काम छोड़कर चले गए हैं। प्रोडक्ट तैयार होने से पहले चमड़ा कई प्रक्रियाओं और हाथों से होकर गुजरता है। टेनरियों और स्लाटर हाउस बंद होने से लेदर प्रोडक्ट बनानी वाली फैक्ट्रियों को कच्चा माल नहीं पहुंच रहा है। इस कारण उत्पाद नहीं बन रहे हैं। 
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आंकड़ों की जुबानी 
-400 टेनरियां हैं शहर में 
-17000 पीस रोज आता था चमड़ा 
-500 से 1000 पीस हो रही अब सप्लाई 
-450 एक्सपोर्टर हैं शहर और उन्नाव में 
-12,000 करोड़ का टर्नओवर है सालाना 
-1000 करोड़ का माल हर माह जाता है विदेश 
-2000 करोड़ का अब तक हो चुका नुकसान 
-5000 करोड़ तक नुकसान पहुचने की आशंका 
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