पराली प्रबंधन की बैठक में मौजूद डीएम, एसपी व अन्य अधिकारी।
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कानपुर देहात। कलक्ट्रेट सभागार में शनिवार को डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने पराली प्रबंधन की बैठक की। उन्होंने ग्राम प्रधानों से कहा कि धान की कटाई के बाद बचा पुआल कतई न जलाया जाए। पराली जलाना अपराध है। जुर्माना लगाने के साथ एफआईआर भी कराई जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि व्यापक प्रचार प्रसार कर किसानों को जागरूक किया जाए।
डीएम ने बताया कि पराली जलाने से खेत की उर्वरता घटती है। जमीन में मौजूद मित्र कीट नष्ट होने से फसल उत्पादन प्रभावित होता है। पराली जलाने से उठने वाला धुआं कोहरा और धुंध का कारण है। कहा कि पराली मिट्टी में पलट से खाद बनती है और इससे फसल उत्पादन बढ़ता है। किसानों का खाद का खर्च बचता है। उन्होंने कहा कि किसान गोआश्रय स्थल में पराली दान दे सकते हैं। वहीं एसपी केशव कुमार चौधरी ने भी किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की अपील की। यहां एडीएम प्रशासन पंकज वर्मा, एडीएम वित्त एवं राजस्व साहब लाल, उप कृषि निदेशक विनोद यादव, जिला कृषि अधिकारी सुमित पटेल, जिला सूचना अधिकारी वीएन पांडेय, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी अशोक कुमार आदि रहे।
जिले में 43 कस्टम हायरिंग सेंटर
कलक्ट्रेट में पराली प्रबंधन की बैठक के ठीक पहले डीएम ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिले में पूर्व में 43 कस्टम हायरिंग सेंटर और 7 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। 17 व्यक्तिगत यंत्र कृषकों के पास हैं। इनसे पराली प्रबंधन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सेटेलाइट से पराली जलाने की निगरानी की जा रही है। 1 से 6 अक्टूबर तक जिले में पराली जलाने की तीन घटनाएं हुई। एफआईआर दर्ज कराकर 15 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। कहा कि वर्ष 2020-21 में 9 फार्म मशीनरी बैंक और 6 ग्राम पंचायत फार्म मशीनरी बैंक का चयन किया गया है।
दो एकड़ पराली जलाने पर ढ़ाई हजार जुर्माना
डीएम ने बताया कि एनजीटी पराली जलाने पर सख्त है। 2 एकड़ पराली जलाने पर 2500 रुपये जुर्माना है। 5 एकड़ तक में 5000 रुपये और 5 एकड़ से अधिक में पराली जलाने पर 15000 रुपये जुर्माना लगता है। सजा का भी प्रावधान है।