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दो फाड़ हुआ आईआईटी कानपुर, 4 प्रोफेसरों पर एफआईआर, बचाव में आपातकाल बैठकें

Tue, 20 Nov 2018 09:19 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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आईआईटी कानपुर के दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले में आरोपी चारों प्रोफेसरों पर एफआईआर के बाद पूरा कैंपस दो फाड़ में बंट गया है। शिक्षकों के साथ छात्र भी दो गुटों में बंट गए हैं। सोमवार को फैकल्टी और स्टूडेंट फोरम ने अपनी अलग-अलग आपातकाल बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की।
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फैकल्टी फोरम की बैठक में 130 से ज्यादा शिक्षक शामिल हुए। सभी ने साथी चारों प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर की निंदा की। उपनिदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल और एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष पर मामले में एक पक्ष का साथ देने का आरोप लगाते हुए पद से हटाने की मांग का प्रस्ताव पास किया। कहा गया कि जब बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) ने चारों प्रोफेसरों को एससी-एसटी उत्पीड़न मामले से बरी कर दिया था, तब उनपर इस धारा में एफआईआर क्यों किया गया।

शिक्षकों ने एक मत में कहा कि इस मामले में इंस्टीट्यूट प्रशासन की तरफ से चारों प्रोफेसरों का बचाव करना चाहिए और उन्हें विधिक सहायता भी देनी चाहिए। चारों प्रोफेसरों ने परिजनों को भी हर तरह की मदद देने का आश्वासन दिया।
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24 घंटे के अंदर शिक्षकों के सामने पूरी बात रखें निदेशक
शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि अभी तक के पूरे प्रकरण से हर शिक्षकों को अवगत कराने की जिम्मेदारी भी निदेशक की है। सभी ने मांग की कि 24 घंटे के अंदर निदेशक को शिकायत से लेकर अभी तक के पूरे प्रकरण की जानकारी और जांच रिपोर्ट साझा करनी पड़ेगी।

सुरक्षा प्रभारी प्रो. दीपू फिलिप को हटाने की मांग
प्रोफेसरों ने कहा कि रविवार की रात जब वे लोग निदेशक से मिलने गए थे, तब सुरक्षाकर्मियों ने उनके वीडियो बनाए थे। यह बेहद गलत है। एक प्रोफेसर अपने निदेशक से क्या खुलकर बात भी नहीं कर सकता। प्रोफेसरों ने एक स्वर में कहा कि अगर वीडियो निदेशक के निर्देश पर बनाए गए हैं, तो उन्हें सभी से माफी मांगनी चाहिए और अगर यह सुरक्षा प्रभारी प्रो. दीपू फिलिप के निर्देश पर बने हैं, तो उन्हें तुरंत उन्हें पद से हटाना चाहिए।

 
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प्रेस को सही सूचना दी जाए
शिक्षकों ने मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा की। प्रस्ताव पास किया की इंस्टीट्यूट प्रशासन को इस मामले में यह स्पष्ट करना चाहिए कि चारों प्रोफेसरों को जांच में दलित उत्पीड़न का दोषी नहीं पाया गया है।

फैकल्टी फोरम में यह भी प्रस्ताव हुए पास
- फोरम में शामिल सभी सीनेटर्स इंस्टीट्यूट प्रशासन से सीनेट की आपात बैठक बुलाने के लिए अनुरोध करें।
- चारों प्रोफेसरों को उनके इस केस से छुटकारा दिलाने के लिए उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ेगा। इसलिए सभी फैकल्टी मिलकर उन्हें आर्थिक सहायता देंगे।
- फैकल्टी फोरम में शामिल सभी सदस्य उन सभी बैठकों का बहिष्कार करेंगे, जिसमें उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल और एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष सदस्य या चेयरमैन हैं।

छात्रों ने कहा, कैंपस का विवाद कैंपस में ही सुलझे
करीब 200 की संख्या में छात्रों ने भी आपात बैठक बुलाकर पूरे मामले की चर्चा की। तय किया की चारों प्रोफेसरों का समर्थन किया जाएगा। पूरे विवाद को कैंपस में ही सुलझाने के लिए कहा गया। कुछ छात्रों ने इंस्टीट्यूट की छवि खराब होने की बात कहते हुए कैंपस में मीडिया के प्रवेश को प्रतिबंधित करने को कहा। कुछ छात्रों ने विरोध भी किया।
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